December 28, 2020

स्वामी विवेकानंद की जीवनी | Swami Vivekananda Biography In Hindi

स्वामी विवेकानंद की जीवनी  

प्राचीन काल से भारत ने दुनिया को बहुत सारे संत और आध्यात्मिक नेता प्रदान किए हैं। जिनमे स्वामी विवेकानन्द का नाम भी शामिल है। जिन्होंने अपनी दृष्टि और ज्ञान से दुनिया को मंत्रमुग्ध कर दिया है।

उनमें से सबसे प्रसिद्ध आध्यात्मिक नेता, स्वामी विवेकानंद हैं। जो दुनिया में हिंदुत्व के सकारात्मक पक्ष को फैलाने और हिंदुत्व को जीवन के एक मार्ग के रूप में पेश करने के लिए जाने जाते हैं।

आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़ी  सारी बातो के बारे में जिक्र करेंगे। स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़े कई विचार भी इस आर्टिकल के माध्यम से आप तक पहुचायेंगे।

स्वामी विवेकानंद की प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

स्वामी विवेकानंद, जो अपने प्रारंभिक जीवन में नरेंद्र नाथ दत्ता के नाम से जाने जाते थे। उनका जन्म  12 जनवरी 1863 को कोलकाता में एक संपन्न परिवार में हुआ था। उनके पिता विश्वनाथ दत्त कई विषयों में एक सफल वकील थे और उनकी माँ भुवनेश्वरी  गहरी भक्ति मजबूत चरित्र और अन्य गुणों से संपन्न थीं।

वह बचपन से ही असाधारण थे और संगीत, जिमनास्टिक और पढ़ाई में उत्कृष्ट थे। पढ़ाई में स्वामी विवेकानंद सुरुआत से भी बहुत होशियार थे। वे हमेशा अपनी पढ़ाई को प्रैक्टिकल के तौर पर समझते थे।

उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ पहले मेट्रोपॉलिटन संस्थान और बाद में कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। जब उन्होंने कॉलेज से स्नातक किया, तब तक उन्होंने विभिन्न विषयों का एक विशाल ज्ञान प्राप्त कर लिया था।

उन्होंने एक ओर भगवद गीता और उपनिषदों जैसे हिंदू धर्मग्रंथों का अध्ययन किया, वहीं दूसरी ओर उन्होंने डेविड ह्यूम, जोहान गोटलिब फिच्ते और हर्बर्ट स्पायर द्वारा पश्चिमी दर्शन, इतिहास और आध्यात्मिकता का भी अध्ययन किया।

स्वामी विवेकानंद की आध्यात्मिक जागृति

1884 में, नरेंद्रनाथ ने अपने पिता की मृत्यु के कारण काफी आर्थिक तंगी का सामना किया। क्योंकि उन्हें अपनी माँ और छोटे भाई-बहनों का आर्थिक रूप से समर्थन करना था। उन्होंने रामकृष्ण से अपने परिवार के आर्थिक कल्याण के लिए देवी से प्रार्थना करने के लिए कहा।

रामकृष्ण के सुझाव पर वह खुद मंदिर में प्रार्थना करने गए। लेकिन एक बार जब उन्होंने देवी का सामना किया। तो वह धन माँगने में सक्षम नहीं थे, इसके बजाय उन्होंने ‘विवेक’ (विवेक) और ‘बैराग्य’ (समावेश) का आशीर्वाद मांगा। उस दिन नरेंद्रनाथ के पूर्ण आध्यात्मिक जागरण को चिह्नित किया गया और वह आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर हुए।

विश्व धर्म संसद में व्याख्यान

अपने दौरे के दौरान, उन्हें 1893 में शिकागो, अमेरिका में आयोजित होने वाले विश्व धर्म संसद के बारे में पता चला। वह भारत, हिंदू धर्म और उनके गुरु श्री रामकृष्ण के दर्शन का प्रतिनिधित्व करने के लिए बैठक में भाग लेने के लिए उत्सुक थे। शिकागो जाने के रास्ते में उन्हें बहुत कठिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लेकिन उनकी आत्माएं हमेशा की तरह अदम्य रहीं।

11 सितंबर 1893 को, जब समय आया, उन्होंने मंच लिया और अपनी प्रारंभिक पंक्ति “मेरे भाइयों और अमेरिका की बहनों” के साथ सभी को चौंका दिया।

उन्होंने शुरुआती वाक्यांश के लिए दर्शकों से एक स्थायी ओवेशन प्राप्त किया। उन्होंने हिंदू धर्म को विश्व धर्मों के मानचित्र पर रखकर वेदांत के सिद्धांतों और उनके आध्यात्मिक महत्व का वर्णन किया।

उन्होंने अमेरिका में अगले ढाई साल बिताए और 1894 में न्यूयॉर्क के वेदांत सोसाइटी की स्थापना की। उन्होंने पश्चिमी दुनिया को वेदांत और हिंदू अध्यात्मवाद के सिद्धांतों का प्रचार करने के लिए यूनाइटेड किंगडम की यात्रा भी की।

शिक्षण और रामकृष्ण मिशन

विवेकानंद 1897 में भारत लौट आए। देश भर में व्याख्यान देने के बाद वे कलकत्ता पहुँचे और 1 मई, 1897 को कलकत्ता के पास बेलूर मठ में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। रामकृष्ण मिशन के लक्ष्य कर्म योग के आदर्शों पर आधारित थे और इसका प्राथमिक उद्देश्य देश की गरीब और संकटग्रस्त आबादी की सेवा करना था।

रामकृष्ण मिशन ने स्कूल, कोलाज और अस्पतालों की स्थापना और संचालन, सम्मेलन, सेमिनार और कार्यशालाओं के माध्यम से वेदांत के व्यावहारिक सिद्धांतों का प्रचार, देश भर में राहत और पुनर्वास कार्य शुरू करने जैसे विभिन्न सामाजिक कार्य किए।

स्वामी विवेकानंद की मृत्यु

स्वामी विवेकानंद ने भविष्यवाणी की थी कि वे चालीस साल की उम्र तक नहीं रहेंगे। 4 जुलाई, 1902 को, उन्होंने बेलूर मठ में अपने दिनों के काम के बारे में जाना, विद्यार्थियों को संस्कृत व्याकरण पढ़ाया।

वह शाम को अपने कमरे में सेवानिवृत्त हो गया और लगभग 9 बजे ध्यान के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। कहा जाता है कि उसे ‘महासमाधि’ प्राप्त हुई और महान संत का गंगा नदी के तट पर अंतिम संस्कार किया गया।

December 16, 2020

National Day Math राष्ट्रीय गणित दिवस

*** National Day Math*** 

***राष्ट्रीय गणित दिवस 2020 ***

प्रत्येक वर्ष की भांति सन 2020 में भी राष्ट्रीय गणित दिवस के दिन गणित की  प्रतियोगिता का आयोजन  online ऑनलाइन लायक सर द्वारा किया जा रहा है। 

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राष्ट्रीय गणित दिवस 2020 पूरे देश में 22 दिसंबर, मंगलवार को मनाया जायेगा।

नियम ओ शर्ते निम्न है

# पेपर paper  मिडिल माध्यमिक  स्तर एवं high स्कूल स्तर दो स्तर का होगा 

# पेपर दोनों भाषाओं हिंदी hindi इंग्लिश english में होगा

# पेपर में प्रश्नों की संख्या 20 बहुविकल्पी प्रकार के होंगे

#परीक्षा का 22 दिसम्बर 2020 समय 10 बजे सुबह से 11 बजे तक एक घण्टे तक लिंक ओपन open रहेगी

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December 01, 2020

रावण

रावण...
     रावण को भाई के रूप में वही पसन्द कर सकती है जिसका चरित्र सूर्पनखा जैसा हो। जो वन-वन घूम कर दूसरी स्त्रियों का पति चुराती हो। या जो किसी सुन्दर स्त्री को देखे तो अपने भाई को उसका हरण करने के लिए प्रेरित करे। ऐसी स्त्रियाँ कभी आदर्श नहीं हो सकतीं।
     रावण को भाई के रूप में वही पुरुष पसन्द करता है जिसका चरित्र कुंभकर्ण जैसा हो। जो सज्जन होने के बावजूद भाई के कुकर्मों के समय आंख बंद कर ले। ऐसे लोग कभी अनुकरणीय नहीं हो सकते।
     रावण को पति के रूप में वही स्त्री पसन्द कर सकती है, जो अपने पति को हजार टुकड़ों में बंटते देख सकती हो। जो देख सकती हो कि उसका पति यक्ष, गन्धर्व, नाग, असुर, राक्षस, यवन सभी जाति की स्त्रियों का हरण करे और बलपूर्वक अपनी पत्नी बना कर रखे। जो सहन कर सकती हो कि उसका पति उसकी किसी भी बात को न माने... वह गिड़गिड़ाती रहे, पर उसका पति उसकी बात अनसुनी कर के पाप करता रहे। 
     रावण को मित्र के रूप में वही पसन्द कर सकते हैं जिनका चरित्र बाली के जैसा हो। जो अपने छोटे भाई की स्त्री को बलपूर्वक छीनने में लज्जा का अनुभव नहीं करता हो। जो तारा जैसी विदुषी पत्नी की भी कोई बात नहीं मानता हो। ऐसे लोग भी सम्मान के योग्य नहीं होते।
      रावण को अपना नायक वही मान सकते हैं जिन्हें न धर्म का ज्ञान है, न वेद का। रावण उन राक्षसों का नायक था जो ऋषियों के हवन कुंड में हड्डियां डालते थे, जो ऋषियों को मार कर खा जाते थे, जो मनुष्यों को जीने नहीं देते थे। रावण ऐसे ही अमानुषों का नायक हो सकता है।
       रावण को एक आदर्श पुत्र मानने वाले मूर्ख ही हैं, क्योंकि रावण के कुकर्मों के कारण स्वयं उसके पिता ने उसका त्याग कर दिया था। जिस व्यक्ति के कारण उसका लज्जित पिता नगर छोड़ दे, वह और कुछ भी हो आदर्श पुत्र नहीं हो सकता।
      रावण ब्राह्मणों का नायक न था, न है, न होगा... ब्राह्मणों के आदर्श हैं वे गुरु वशिष्ठ जिन्होंने राजकुमार राम को मर्यादा पुरुषोत्तम राम बनाया। ब्राह्मणों के नायक हैं वे दधीचि, जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अपनी हड्डियां दान कर दी। आधुनिक काल मे भी ब्राह्मणों के नायक चाणक्य, वर्षकार, पतंजलि, शंकराचार्य, या करपात्री जी महाराज हैं, कोई रावण नहीं है। रावण उन ब्राह्मण वंशियो को ही प्रिय हो सकता है जिन्होंने धर्म का त्याग कर वामपंथ स्वीकार किया हो, वे इतने महत्वपूर्ण नहीं कि वे ब्राह्मणों को दिशा दें। मैं तो उन्हें ब्राह्मण ही नहीं मानता।
      भारतीय लोक रावण को हर विजया के दिन बुराई के प्रतीक के रूप में जलाता रहा है, और जलाता रहेगा। आज भी, और हजार वर्ष बाद भी... लोक किताबी विचारकों की बात नहीं सुनता, उसकी गोद में रोज हजारों चार्वाक, मार्क्स, कन्फ्यूशियस जन्म लेते हैं और मर जाते हैं। लोक अपने ही गति से मुस्कुराता हुआ चलता रहता है। यही भारत है...

सर्वेश तिवारी श्रीमुख
गोपालगंज, बिहार।

आखिर क्या है यह पूरा खालिस्तान मसला

आखिर क्या है यह पूरा खालिस्तान मसला

            खालिस्तान को समझने के लिए यह जानना जरूरी है: 15 अगस्त, 1947 को हमारा देश आजाद हुआ था और दो हिस्सों में बांटा गया था। इसी के साथ बंटा था पंजाब सूबा। जिसका बड़ा भाग पाकिस्तान के पास चला गया और कुछ हिस्सा हमारे पास बचा। बंटवारे के दौरान हिंदुओ और मुस्लिमों को जान-माल का बहुत नुकसान हुआ। लेकिन सबसे ज्यादाN नुकसान सिखों को हुआ। भारत के सिखों को और नए-नए बने पाकिस्तान के सिखों को। लाहौर, जो कभी सिख साम्राज्य की राजधानी था वो एक मुस्लिम राष्ट्र में चला गया। इससे आहत होकर फुसफुसाहट में ही सही सिखों की भी अलग राष्ट्र की मांग जोर पकड़ने लगी।
            पंजाबी भाषी लोगों के लिए एक अलग राज्य की मांग की शुरुआत पंजाबी सूबा आंदोलन से हुई थी। यह पहला मौका था जब पंजाब को भाषा के आधार पर अलग दिखाने की कोशिश हुई थी। अकाली दल का जन्म हुआ और कुछ ही वक्त में इस पार्टी ने बेशुमार लोकप्रियता हासिल कर ली। अलग पंजाब के लिए जबरदस्त प्रदर्शन शुरू हुए और अंत में 1966 में ये मांग मान ली गई। भाषा के आधार पर पंजाब, हरियाणा और केंद्र शाषित प्रदेश चंडीगढ़ की स्थापना हुई।
आनंदपुर साहिब रेसोल्यूशन के नाम पर उठाई गई मांगें
हरियाणा में पंजाबी भाषी या सिख बाहुल्य जिलों को पंजाब को देना
चंडीगढ़ पूरी तरह पंजाब को देना
पंजाब में भूमि सुधार और औद्योगिकरण
पूरे देश में गुरुद्वारा समिति का निर्माण
फौज में सिखों की भर्ती अधिक से अधिक हालांकि इस मांग को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह ‘देशद्रोही’ मांगें हैं। उन्होंने कहा था कि ये कोई ऑटोनोमी की मांग नहीं है, बल्कि उसकी आड़ में अलग देश की संरचना बनाने की योजना है।
'खालिस्तान' के तौर पर स्वायत्त राज्य की मांग ने 1980 के दशक में जोर पकड़ा। धीरे-धीरे ये मांग बढ़ने लगी और इसे खालिस्तान आंदोलन का नाम दिया गया। 
परंतु 'दमदमी टकसाल' के जरनैल सिंह भिंडरावाला की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही ये आंदोलन हिंसक होता चला गया।
जरनैल सिंह भिंडरावाला के बारे में कहा जाता है कि वो सिख धर्म में कट्टरता का समर्थक था। सिखों के शराब पीने, बाल कटाने जैसी चीजों के वो सख्त खिलाफ था।
डीआईजी हत्या से बिगड़ा मामला साल 1980-1984 के बीच पंजाब में आतंकी हिंसाओं ने जबरदस्त उछाल आया। 1983 में पंजाब के डीआईजी अटवाल की स्वर्ण मंदिर परिसर में ही हत्या कर दी गई। इसी साल से भिंडरावाला ने स्वर्ण मंदिर को अपना ठिकाना बना लिया था। सैकड़ों हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों से वो हमेशा घिरा रहता था, साथ ही हथियारों का जखीरा भी वहां जुटाया जाने लगा था। कह सकते हैं कि मंदिर को किले में तब्दील करने की तैयारी शुरू हो गई थी।
*( मजे की बात ये की दशम गुरुओं के दैविक कर्मो के द्वारा सनातन की रक्षा के लिए तैयार हुए सिक्ख पंथ की बुनियादी बातों के विरुद्ध कार्य करने वाले और पवित्र स्वर्ण मंदिर की मर्यादा भंग करने वालों पर सिक्ख कुछ नहीं कहते। इसके उलट जिन इस्लामिक आततायियों के दुष्कृत्यों के विरुद्ध सनातन में से सिक्ख पंथ खड़ा हुआ था और जिन पाकिस्तानियों ने पंजाब का अधिकांश हिस्सा हड़पा जिसके विरुद्ध खालिस्तान के विचार का उदय हुआ, उन्हीं सनातन विरोधी इस्लामिक जिहादियों के साथ आज खालिस्तानी खड़े हैं  )*
            तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लिए सिरदर्द बने इस मुद्दे के कई विकल्प शुरुआत में तलाशे गए। भिंडरवाला को स्वर्ण मंदिर से निकालने की तैयारी की जाने लगी। 'ऑपरेशन सनडाउन' बनाया गया, 200 कमांडोज को इसके लिए ट्रेनिंग दी गई। लेकिन बाद में आम नागरिकों को ज्यादा नुकसान की आशंका के चलते इस ऑपरेशन को नकार दिया गया।
सिख संत से खालसा आतंकी बनने की कहानी
रणप्रिय सिखों में सेना के प्रति झुकाव कई बार उनके नाम से पता चल जाता है। जैसे- जरनैल सिंह, करनैल सिंह और मेजर सिंह आदि। जरनैल शब्द की उत्पत्ति सेना के पद जनरल से हुई है, उसी तरह करनैल शब्द कर्नल से आया है।
एक समय पंजाब को ब्रितानी-भारतीय सेना में भर्ती के लिए सबसे उपजाऊ जमीन माना जाता था। ये एक अजीब इत्तेफाक है कि जिस व्यक्ति को 1980 के दशक में सिख चरमपंथ का जन्मदाता माना जाता है, उनके माता-पिता ने उनका नाम जरनैल सिंह रखा था।

जरनैल सिंह के नाम के साथ भिंडरांवाले तब जुड़ा जब वो अपेक्षाकृत कम उम्र में सिख धर्म और ग्रंथों के बारे में शिक्षा देने वाली संस्था-दमदमी टकसाल का अध्यक्ष चुना गया था। कहा जाता है कि अकाली दल की राजनीति को कमजोर करने के लिए इंदिरा गांधी ने खुद ही भिंडरावाला को आगे बढ़ाया ।
भगत सिंह और संत भिंडरांवाले भिंडरांवाले का रहस्यपूर्ण, लेकिन असाधारण तरीके से प्रमुखता में आना पंजाब में 'मुक्ति' की सबसे भीषण लड़ाई के बारे में काफी कुछ बताता है और इस लड़ाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिख सुमदाय से जोड़कर भी देखा जाता है।
दमदमी टकसाल के अध्यक्ष का पद
उस समय कोई इस बात की कल्पना नहीं कर सकता था कि 30 वर्ष की आयु में जिस भिंडरांवाले ने दमदमी टकसाल के अध्यक्ष का पद ग्रहण किया था। अगले कुछ महीनों में ऐसी नई परिकल्पना को हवा देगा कि इस सीमांत प्रांत में अप्रत्याशित उथल-पुथल पैदा हो जाएगी। फिर ये उथल-पुथल एक दशक से अधिक तक चली और इस दौरान निर्दोष लोगों समेत हजारों की जान चली गई।
            वर्ष 1977 में उसे दमदमी टकसाल का प्रमुख नियुक्त किए जाने के साक्षी, उस समय के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और सिखों की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष गुरचरण सिंह तोहड़ा थे, जो अपनी शुभकामनाएं देने के लिए वहीं मौजूद थे।
क्या है दमदमी टकसाल
दमदमी टकसाल एक सिख शैक्षिकN संगठन है। जिसका मुख्यालय अमृतसर से 25 मील दूर चौक मेहता शहर में स्थित है।
भिंडरांवाले की नियुक्ति के तुरंत बाद उस इलाके में राजनीतिक विमर्श बदलने लगा। जिस समय भिंडरांवाले ने दमदमी टकसाल के अध्यक्ष का पद ग्रहण किया था, उस समय दमदमी टकसाल का सीधा टकराव निरंकारियों से हो चुका था।
प्रदर्शनकारी दमदमी टकसाल और अखंड कीर्तनी जत्थे से संबंधित थे। वर्ष 1978 की खूनी वैशाखी की घटना के बाद पंजाब जैसे हमेशा के लिए बदल गया, दोबारा पहले जैसा कभी नहीं हो पाया।
ऑपरेशन ब्लू स्टारआखिर में इंडियन आर्मी ने 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' को अंजाम दिया गया। 1 से 3 जून 1984 के बीच पंजाब की रेल, रोड और एयर ट्रांसपोर्ट सर्विस को रोक दिया गया। स्वर्ण मंदिर में पानी और बिजली की सप्लाई काट दी गई। स्वर्ण मंदिर के अंदर 6 जून 1984 को व्यापक अभियान चलाया गया, भारी गोलीबारी के बाद जरनैल सिंह भिंडरवाला का शव बरामद कर लिया गया। 7 जून 1984 को स्वर्ण मंदिर पर भारतीय सेना का नियंत्रण हो गया।
           इस ऑपरेशन के बाद सिख समुदाय के लोग इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ जबरदस्त गुस्से में थे, कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत कई सिख नेताओं ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। खुशवंत सिंह समेत कई लेखकों ने अपने अवॉर्ड वापस कर दिए थे।
            महज 4 महीने बाद ही 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके ही 2 सिख सुरक्षाकर्मियों ने कर दी थी।
खालिस्तान आंदोलन यहीं खत्म नहीं हुआ, इसके बाद से कई छोटे-बड़े संगठन बने। 23 जून 1985 को एक सिख राष्ट्रवादी ने एयर इंडिया के कैनेडा फ्लाईट विमान में विस्फोट किया, 329 लोगों की मौत हुई थी। दोषी ने इसे भिंडरवाला की मौत का बदला बताया।

            10 अगस्त 1986 को पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल एएस वैद्य की दो बाइक सवार बदमाशों ने हत्या कर दी थी। वैद्य ने ऑपरेशन ब्लूस्टार को लीड किया था। इस वारदात की जिम्मेदारी खालिस्तान कमांडो फोर्स नाम के एक संगठन ने ली थी। 31 अगस्त 1995 को पंजाब सिविल सचिवालय के पास हुए बम विस्फोट में पंजाब के तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की हत्या कर दी गई थी। ब्लास्ट में 15 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।
 यद्यपि भारत मे ये आंदोलन मृतप्रायः है परंतु पाकिस्तान के द्वारा इसे खुला समर्थन दिया जाता है । कैनेडा जहां हिन्दूओं में से भी विशेषकर सिक्ख पंथी सम्पन्न और राजनीतिक रूप से बहुत सक्रिय हैं द्वारा इसे आर्थिक और राजनीतिक समर्थन दिया जाता है । साथ ही इसे भारत में देशविरोधी तत्वों द्वारा अंदरूनी सहायता दी जाती है ।
            आज जो किसान आंदोलन के नाम से देश विरोधी प्रपंच चलाया जा रहा है उसे अंदरखाने खालिस्तान आंदोलन से जुड़े संगठन ही *"ऑपरेट"* कर रहे हैं, उसी तरह जिस तरह *शाहीन बाग* प्रपंच को अंदरखाने *पी एफ आई* नामक राजनीतिक की आड़ में एक उग्र मुस्लिम जिहादी संगठन चला रहा था।मजे की बात ये है कि ये तथाकथित खालिस्तानी नेता उस आंदोलन को समर्थन दे रहे थे, अब *पी एफ आई*  इस तथाकथित किसान आंदोलन को समर्थन दे रहा है।
            देश के लिए चिन्ता की बात ये है कि देश की संप्रभुता,अखंडता और एकता के विरोधी तत्व यथा: कम्युनिस्ट, नक्सली और अर्बन नक्सली,चर्च की देश विरोधी-सनातन विरोधी शक्तियां,सनातन विरोधी इस्लामिक जिहादी शक्तियां और इनके समर्थक और वर्षों से इन्हें पालने वाले राजनीतिक दल अब एक साथ होकर राष्ट्र विरोधी कार्य ही नहीं कर रहे हर राष्ट्र विरोधी कार्यों का समर्थन और सहयोग कर रहे हैं। ये देश के लिए अत्यंत घातक है। 

November 22, 2020

वीर रानी लक्ष्मी बाई Rani laxmi jivani

भारत माता की जय हो
🚩जय भवानी🚩

❗रानी लक्ष्मीबाई❗
(जन्म-19 नवंबर, 1835; मृत्यु-17 जून,1858) मराठा शासित झाँसी राज्य की रानी और 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना थीं। बलिदानों की धरती भारत में ऐसे-ऐसे वीरों ने जन्म लिया है, जिन्होंने अपने रक्त से देश प्रेम की अमिट गाथाएं लिखीं। यहाँ की ललनाएं भी इस कार्य में कभी किसी से पीछे नहीं रहीं, उन्हीं में से एक का नाम है- झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई। उन्होंने न केवल भारत की बल्कि विश्व की महिलाओं को गौरवान्वित किया। उनका जीवन स्वयं में वीरोचित गुणों से भरपूर, अमर देशभक्ति और बलिदान की एक अनुपम गाथा है।
❗रानी लक्ष्मीबाई मराठा शासित झांसी की रानी और भारत की स्वतंत्रता संग्राम की प्रथम वनिता थीं। भारत को दासता से मुक्त करने के लिए सन् 1857 में बहुत बड़ा प्रयास हुआ। यह प्रयास इतिहास में भारत का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम या सिपाही स्वतंत्रता संग्रामकहलाता है।
❗अंग्रेज़ों के विरुद्ध रणयज्ञ में अपने प्राणों की आहुति देने वाले योद्धाओं में वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई का नाम सर्वोपरी माना जाता है। 1857 में उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम का सूत्रपात किया था। अपने शौर्य से उन्होंने अंग्रेज़ों के दाँत खट्टे कर दिए थे।
❗अंग्रेज़ों की शक्ति का सामना करने के लिए उन्होंने नये सिरे से सेना का संगठन किया और सुदृढ़ मोर्चाबंदी करके अपने सैन्य कौशल का परिचय दिया था।

❗जीवन परिचय❗
रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर, 1835 को काशी के पुण्य व पवित्र क्षेत्र असीघाट,वाराणसी में हुआ था। इनके पिता का नाम 'मोरोपंत तांबे' और माता का नाम 'भागीरथी बाई' था। इनका बचपन का नाम 'मणिकर्णिका' रखा गया परन्तु प्यार से मणिकर्णिका को 'मनु' पुकारा जाता था। मनु की अवस्था अभी चार-पाँच वर्ष ही थी कि उसकी माँ का देहान्त हो गया। पिता मोरोपंत तांबे एक साधारण ब्राह्मण और अंतिम पेशवा बाजीराव द्वितीय के सेवक थे। माता भागीरथी बाई सुशील, चतुर और रूपवती महिला थीं। अपनी माँ की मृत्यु हो जाने पर वह पिता के साथ बिठूर आ गई थीं। यहीं पर उन्होंने मल्लविद्या, घुड़सवारी और शस्त्रविद्याएँ सीखीं। चूँकि घर में मनु की देखभाल के लिए कोई नहीं था इसलिए उनके पिता मोरोपंत मनु को अपने साथ बाजीराव के दरबार में ले जाते थे जहाँ चंचल एवं सुन्दर मनु ने सबका मन मोह लिया था। बाजीराव मनु को प्यार से 'छबीली' बुलाते थे।

❗शिक्षा❗
पेशवा बाजीराव के बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक आते थे। मनु भी उन्हीं बच्चों के साथ पढ़ने लगी। सात साल की उम्र में ही लक्ष्मीबाई ने घुड़सवारी सीखी। साथ ही तलवार चलाने में, धनुर्विद्या में निष्णात हुई। बालकों से भी अधिक सामर्थ्य दिखाया। बचपन में लक्ष्मीबाई ने अपने पिता से कुछ पौराणिक वीर गाथाएँ सुनीं। वीरों के लक्षणों व उदात्त गुणों को उसने अपने हृदय में संजोया। इस प्रकार मनु अल्पवय में ही अस्त्र-शस्त्र चलाने में पारंगत हो गई। अस्त्र-शस्त्र चलाना एवं घुड़सवारी करना मनु के प्रिय खेल थे।

❗विवाह❗
मनु विवाह योग्य हो गयी। इनका विवाह सन् 1842 में झाँसी के राजा गंगाधर राव निवालकर के साथ बड़े ही धूम-धाम से सम्पन्न हुआ। विवाह के बाद इनका नाम लक्ष्मीबाई रखा गया। इस प्रकार काशी की कन्या मनु झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई बन गई। रानी बनकर लक्ष्मीबाई को पर्दे में रहना पड़ता था। स्वच्छन्द विचारों वाली रानी को यह रास नहीं आया। उन्होंने क़िले के अन्दर ही एक व्यायाम शाला बनवाई और शस्त्रादि चलाने तथा घुड़सवारी हेतु आवश्यक प्रबन्ध किए। उन्होंने स्त्रियों की एक सेना भी तैयार की। राजा गंगाधर राव अपनी पत्नी की योग्यता से बहुत प्रसन्न थे। 1851 में रानी लक्ष्मीबाई ने एक पुत्र को जन्म दिया। सम्पूर्ण झाँसी आनन्दित हो उठा एवं उत्सव मनाया गया किन्तु यह आनन्द अल्प कालिक ही था। कुछ ही महीने बाद बालक गम्भीर रूप से बीमार हुआ और चार महीने की आयु में ही उसकी मृत्यु हो गयी। झाँसी शोक के सागर में डूब गई। सन् 1853 में राजा गंगाधर राव का स्वास्थ्य बहुत बिगड़ने पर दरबारियों ने उन्हें पुत्र गोद लेने की सलाह दी। अपने ही परिवार के पांच वर्ष के एक बालक को उन्हों ने गोद लिया और उसे अपना दत्तक पुत्र बनाया। इस बालक का नाम दामोदर राव रखा गया। पुत्र गोद लेने के बाद राजा गंगाधर राव की दूसरे ही दिन 21 नवंबर 1853 में मृत्यु हो गयी। दयालु स्वभाव रानी अत्यन्त दयालु भी थीं। एक दिन जब कुलदेवी महालक्ष्मी की पूजा करके लौट रही थीं, कुछ निर्धन लोगों ने उन्हें घेर लिया। उन्हें देखकर महारानी का हृदय द्रवित हो उठा। उन्होंने नगर में घोषणा करवा दी कि एक निश्चित दिन ग़रीबों में वस्त्रादि का वितरण कराया जाए।

❗झाँसी का युद्ध❗
उस समय भारत के बड़े भू-भाग पर अंग्रेज़ों का शासन था। वे झाँसी को अपने अधीन करना चाहते थे। उन्हें यह एक उपयुक्त अवसर लगा। उन्हें लगा रानी लक्ष्मीबाई स्त्री है और हमारा प्रतिरोध नहीं करेगी। उन्होंने रानी के दत्तक-पुत्र को राज्य का उत्तराधिकारी मानने से इंकार कर दिया और रानी को पत्र लिख भेजा कि चूँकि राजा का कोई पुत्र नहीं है, इसीलिए झाँसी पर अब अंग्रेज़ों का अधिकार होगा। रानी यह सुनकर क्रोध से भर उठीं एवं घोषणा की कि मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी। अंग्रेज़ तिलमिला उठे। परिणाम स्वरूप अंग्रेज़ों ने झाँसी पर आक्रमण कर दिया। रानी ने भी युद्ध की पूरी तैयारी की। क़िले की प्राचीर पर तोपें रखवायीं। रानी ने अपने महल के सोने एवं चाँदी के सामान तोप के गोले बनाने के लिए दे दिया। रानी के क़िले की प्राचीर पर जो तोपें थीं उनमें कड़क बिजली, भवानी शंकर, घनगर्जन एवं नालदार तोपें प्रमुख थीं। रानी के कुशल एवं विश्वसनीय तोपची थे गौस खाँ तथा ख़ुदा बक्श। रानी ने क़िले की मज़बूत क़िलाबन्दी की। रानी के कौशल को देखकर अंग्रेज़ सेनापति सर ह्यूरोज भी चकित रह गया। अंग्रेज़ों ने क़िले को घेर कर चारों ओर से आक्रमण किया। अंग्रेज़ आठ दिनों तक क़िले पर गोले बरसाते रहे परन्तु क़िला न जीत सके। रानी एवं उनकी प्रजा ने प्रतिज्ञा कर ली थी कि अन्तिम सांस तक क़िले की रक्षा करेंगे। अंग्रेज़ सेनापति ह्यूराज ने अनुभव किया कि सैन्य-बल से क़िला जीतना सम्भव नहीं है। अत: उसने कूटनीति का प्रयोग किया और झाँसी के ही एक विश्वासघाती सरदार दूल्हा सिंह को मिला लिया जिसने क़िले का दक्षिणी द्वार खोल दिया। फिरंगी सेना क़िले में घुस गई और लूटपाट तथा हिंसा का पैशाचिक दृश्य उपस्थित कर दिया। घोड़े पर सवार, दाहिने हाथ में नंगी तलवार लिए, पीठ पर पुत्र को बाँधे हुए रानी ने रणचण्डी का रूप धारण कर लिया और शत्रु दल संहार करने लगीं। झाँसी के वीर सैनिक भी शत्रुओं पर टूट पड़े। जय भवानी और हर-हर महादेव के उद्घोष से रणभूमि गूँज उठी। किन्तु झाँसी की सेना अंग्रेज़ों की तुलना में छोटी थी। रानी अंग्रेज़ों से घिर गयीं। कुछ विश्वासपात्रों की सलाह पर रानी कालपी की ओर बढ़ चलीं। दुर्भाग्य से एक गोली रानी के पैर में लगी और उनकी गति कुछ धीमी हुई। अंग्रेज़ सैनिक उनके समीप आ गए।

❗मृत्यु❗
रानी को असहनीय वेदना हो रही थी परन्तु मुख मण्डल दिव्य कान्त से चमक रहा था। उन्होंने एक बार अपने पुत्र को देखा और फिर वे तेजस्वी नेत्र सदा के लिए बन्द होगए। वह 17 जून,1858 का दिन था, जब क्रान्ति की यह ज्योति अमर हो गयी। उसी कुटिया में उनकी चिता लगायी गई जिसे उनके पुत्र दामोदर राव ने मुखाग्नि दी। रानी का पार्थिव शरीर पंच महाभूतों में विलीन हो गया और वे सदा के लिए अमर हो गयीं। इनकी मृत्यु ग्वालियर में हुई थी। विद्रोही सिपाहियों के सैनिक नेताओं में रानी सबसे श्रेष्ठ और बहादुर थी और उसकी मृत्यु से मध्य भारत में विद्रोह की रीढ़ टूट गई।

❗सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी।
❗बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी।
❗गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी।
❗दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।
❗चमक उठी सन सत्तावन में वह तलवार पुरानीथी।
❗बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी रानी थी।

❗सभी को रानी लक्ष्मी बाई कि जन्म जयंति कि हार्दिक शुभ कामना❗
❗🙏❗🙏❗🙏❗🙏❗
🚩

November 06, 2020

class 10 (High School) math Chapter 4 Quadratic equation handwritten notes

 Class 10 (High School) 

Subject        -     Math 

Chapter        -     4  Quadratic equation 

Data type    -     .pdf format 

writing arts    -     handwritten notes handwritten

Medium         -     hindi 


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                handwritten notes in hindi by topper student

कक्षा १० मैथ से रिलेटेड मैथ नोट्स के लिए हमे  व्हाट्सअप्पस no  9754956951 करे 




November 03, 2020

jeet khud se

 

हार गया लेकिन खुद से जीत गया

hindi motivational story

दोस्तों नमस्कार आप सभी का स्वागत है
आज मैं आपको एक ऐसी motivational stories बता रहा हु जिसे पढ़ने के बाद 
आपकी ऊर्जा पहले जैसी नही रहेगी तो चलिए
बिना आपका समय गवाये motivational story को शुरू करते है
 
हरीश नाम का एक लड़का था उसको दौड़ने का बहुत शौक था 
वह कई मैराथन में हिस्सा ले चुका था
परंतु वह किसी भी race को पूरा नही करता था
एक दिन उसने ठान लिया कि चाहे कुछ भी हो जाये वह race पूरी जरूर करेगा
अब रेस शुरू हुई 

हरीश ने भी दौड़ना शुरू किया धीरे 2
सारे धावक आगे निकल रहे थे
मगर अब हरीश थक गया था
वह रुक गया
फिर उसने खुद से बोला अगर मैं दौड़ नही सकता तो 
कम से कम चल तो सकता हु
उसने ऐसा ही किया वह धीरे 2
चलने लगा मगर वह आगे जरूर बढ़ रहा था
अब वह बहुत ज्यादा थक  गया था
और नीचे गिर पड़ा

उसने खुद को बोला
की वह कैसे भी करके आज दौड़ को पूरी जरूर करेगा
वह जिद करके वापस उठा
लड़खड़ाते हुए आगे बढ़ने लगा और अंततः वह रेस पूरी कर गया
माना कि वह रेस हार चुका था
लेकिन आज उसका विश्वास चरम पर था क्योंकि आज से पहले
 race को कभी पूरा ही नही कर पाया था
वह जमीन पर पड़ा हुआ था
क्योंकि उसके पैरों की मांसपेशियों में बहुत खिंचाव हो चुका था
लेकिन आज वह बहुत खुश था
क्योंकि
आज वह हार कर भी जीता था
दोस्तों हम भी तो इस तरह की गलती करते है हमारी life में
कभी भी अगर कोई परेशानी होती है तो उस काम को नही करते और छोड़ देते है
अगर आप एक student हो और रोज 10 hr की study करते हो
और किसी दिन कोई परेशानी की वजह से आप पढ़ाई नही करते मगर आपको
भले ही 5 hr मिले पढ़ना जरूर चाहिए
हरीश की कहानी से हमे यही सीखने को मिलता है कि अगर हम
लगातार आगे बढ़ते रहे तो एक दिन हम हारकर भी जीत
जाएंगे

छोटे छोटे कदम बढ़ाते जाओ और आगे बढ़ते जाओ
यही सफलता का नियम है
अगर आपको भी ये motivational story अच्छी लगी हो तो
 comment के माध्यम से हमे जरूर बताएं
अगर आप और भी motivational story को पढ़ना चाहते हो तो
 आप बिलकुल सही जगह हो यहां  पर आपको
काफी सारी motivational stories का संग्रह मिलेगा
जो आपको जीवन मेआगे बढ़ने की प्रेरणा देगा 

class 9th test paper ch 1,2,3,4 in hindi pdf

For Class 9th Students 

Subject     -     Math test paper 

Medium    -    hindi medium 

Chapter     -    1, 2,3 & 4

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   Math test in hindi in pdf format   Click Here to Open


for more data of math comment in box

July 16, 2020

ft tgt re yug d

June 27, 2020

ताऊ

*ताऊ* 

*एक बहुत बड़ा विशाल पेड़ था। उस पर बीसीयों हंस रहते थे। उनमें एक बहुत सयाना हंस था, बुद्धिमान और बहुत दूरदर्शी। सब उसका आदर करते ‘ताऊ’ कहकर बुलाते थे। एक दिन उसने एक नन्ही-सी बेल को पेड़ के तने पर बहुत नीचे लिपटते पाया। ताऊ ने दूसरे हंसों को बुलाकर कहा, देखो, इस बेल को नष्ट कर दो। एक दिन यह बेल हम सबको मौत के मुंह में ले जाएगी। एक युवा हंस हंसते हुए बोला, ताऊ, यह छोटी-सी बेल हमें कैसे मौत के मुंह में ले जाएगी? सयाने हंस ने समझाया, आज यह तुम्हें छोटी-सी लग रही है। धीरे-धीरे यह पेड़ के सारे तने को लपेटा मारकर ऊपर तक आएगी। फिर बेल का तना मोटा होने लगेगा और पेड़ से चिपक जाएगा, तब नीचे से ऊपर तक पेड़ पर चढ़ने के लिए सीढ़ी बन जाएगी। कोई भी शिकारी सीढ़ी के सहारे चढ़कर हम तक पहुंच जाएगा और हम मारे जाएंगे। दूसरे हंस को यकीन न आया, एक छोटी-सी बेल कैसे सीढ़ी बनेगी? तीसरा हंस बोला, ताऊ, तू तो एक छोटी-सी बेल को खींचकर ज्यादा ही लंबा कर रहा है। एक हंस बड़बड़ाया, यह ताऊ अपनी अक्ल का रौब डालने के लिए अंट-शंट कहानी बना रहा है। इस प्रकार किसी दूसरे हंस ने ताऊ की बात को गंभीरता से नहीं लिया। इतनी दूर तक देख पाने की उनमें अक्ल कहां थी? समय बीतता रहा। बेल लिपटते-लिपटते ऊपर शाखाओं तक पहुंच गई। बेल का तना मोटा होना शुरू हुआ और सचमुच ही पेड़ के तने पर सीढ़ी बन गई। जिस पर आसानी से चढ़ा जा सकता था। सबको ताऊ की बात की सच्चाई सामने नजर आने लगी। पर अब कुछ नहीं किया जा सकता था क्योंकि बेल इतनी मजबूत हो गई थी कि उसे नष्ट करना हंसों के बस की बात नहीं थी। एक दिन जब सब हंस दाना चुगने बाहर गए हुए थे तब एक बहेलिया उधर आ निकला। पेड़ पर बनी सीढ़ी को देखते ही उसने पेड़ पर चढ़कर जाल बिछाया और चला गया। सांझ को सारे हंस लौट आए और जब पेड़ से उतरे तो बहेलिए के जाल में बुरी तरह फंस गए। जब वे जाल में फंस गए और फड़फड़ाने लगे, तब उन्हें ताऊ की बुद्धिमानी और दूरदर्शिता का पता लगा। सब ताऊ की बात न मानने के लिए लज्जित थे और अपने आपको कोस रहे थे। ताऊ सबसे रुष्ट था और चुप बैठा था। एक हंस ने हिम्मत करके कहा, ताऊ, हम मूर्ख हैं, लेकिन अब हमसे मुंह मत फेरो। दूसरा हंस बोला, इस संकट से निकालने की तरकीब तू ही हमें बता सकता हैं। आगे हम तेरी कोई बात नहीं टालेंगे। सभी हंसों ने हामी भरी तब ताऊ ने उन्हें बताया, मेरी बात ध्यान से सुनो। सुबह जब बहेलिया आएगा, तब मुर्दा होने का नाटक करना। बहेलिया तुम्हें मुर्दा समझकर जाल से निकालकर जमीन पर रखता जाएगा। वहां भी मरे समान पड़े रहना। जैसे ही वह अन्तिम हंस को नीचे रखेगा, मैं सीटी बजाऊंगा। मेरी सीटी सुनते ही सब उड़ जाना। सुबह बहेलिया आया। हंसों ने वैसा ही किया, जैसा ताऊ ने समझाया था। सचमुच बहेलिया हंसों को मुर्दा समझकर जमीन पर पटकता गया। सीटी की आवाज के साथ ही सारे हंस उड़ गए। बहेलिया अवाक होकर देखता रह गया।*
 *वरिष्ठजन घर की धरोहर हैं ।वे हमारे संरक्षक एवं मार्गदर्शक है। जिस तरह आंगन में पीपल का वृक्ष फल नहीं देता, परंतु छाया अवश्य देता है।उसी तरह हमारे घर के बुजुर्ग हमे भले ही आर्थिक रूप से सहयोग नहीं कर पाते है, परंतु उनसे हमे संस्कार एवं उनके अनुभव से कई बाते सीखने को मिलती है,*
 *बड़े-बुजुर्ग परिवार की शान है वो कोई कूड़ा-करकट नहीं हैं, जिसे कि परिवार से बाहर निकाल फेंका जाए। अपने प्यार से रिश्तों को सींचने वाले इन बुजुगों को भी बच्चों से प्यार व सम्मान चाहिए अपमान व तिरस्कार नहीं। अपने बच्चों की खातिर अपना जीवन दाँव पर लगा चुके इन बुजुर्गों को अब अपनों के प्यार की जरूरत है। यदि हम इन्हें सम्मान व अपने परिवार में स्थान देंगे तो लाभान्वित ही होंगे । ऐसा न करने पर हम अपने हाथों अपने बच्चों को उस प्यार, संस्कार, आशीर्वाद व स्पर्श से वंचित कर रहे हैं, जो उनकी जिंदगी को सँवार सकता है। याद रखिए किराए से भले ही प्यार मिल सकता है परंतु संस्कार, आशीर्वाद व दुआएँ नहीं। यह सब तो हमें अपने बुजुर्गो से ही मिलती  है।*

🙏🏻🙏🏻

पितृदिवश है यानी पिताजी का दिन* *(FATHER'S DAY)*

****

आज मेने अपने *पिताजी* को एक उपहार दिया और उनके पैर छुए .....
पिताजी बोले: पैर छूना तो तेरा नित्यकर्म है पर आज ये *उपहार* क्यों ?
मैंने बड़े विनम्रतापूर्वक, खुश होकर कहा :- क्योंकि पिताजी आज *पितृदिवश है यानी पिताजी का दिन* *(FATHER'S DAY)*

  फिर क्या था

पिताजी ने जूता उतारा और बे मौसम वारिश कर दी 
दे दना दन........
*कितने जूते मुझमे मारे याद नही*
और बोले :- अभी में जिंदा हूँ, और तू मेरा श्राद निकाल रहा है! अरे मूर्ख हमारे यहाँ जिस दिन पिताजी की मृत्यु होती है उसे हर साल *पिताजी का दिन* कहा जाता है !

जब उनका गुस्सा ठंडा हुआ तब मैंने पूछा कि हुआ क्या ?
मेरे पिताजी बोले :- ये उन लोगो के लिए है जो पूरे बर्ष अपने माता पिता की कोई परवाह नही करते,न उनकी देखभाल करते, वो किस हाल में है ? यह जानने के लिए भी उनके पास समय नही है !
365 दिन में से 1 दिन पिता को और 1 दिन माँ को याद किया और इतिश्री कर ली ! वाकी 363 दिन उनका क्या हाल है ?
इससे कोई मतलब नही ।

हमारे हिंदुस्तान में 365 दिन ही *माता पिता* के होते है ! हमारी संस्कृति में माँ बाप के आशीर्वाद से ही दिन की शुरुआत होती है !!

और आखिर में बोले :- *ये गलत शुरुआत तो तूने शुरू कर दी है इसका परिणाम तेरे बेटा बेटी या उनके बच्चे भोगेंगे ।* जब माँ बाप को सिर्फ 1 दिन ही याद किया जाएगा और इसे गलत भी नही माना जायेगा ! *क्योकि तब तक ये परम्परा या रीति रिवाज का रूप ले चुका होगा !*

*उनकी ये बात मेरी समझ मे तो आ गयी और आपकी....?*

पुण्यों का मोल

*पुण्यों का मोल*

एक व्यापारी जितना अमीर था उतना ही दान-पुण्य करने वाला, वह सदैव यज्ञ-पूजा आदि कराता रह'ता था।

एक यज्ञ में उसने अपना सबकुछ दान कर दिया। अब उसके पास परिवार चलाने लायक भी पैसे नहीं बचे थे।

व्यापारी की पत्नी ने सुझाव दिया कि पड़ोस के नगर में एक बड़े सेठ रहते हैं। वह दूसरों के पुण्य खरीदते हैं।

आप उनके पास जाइए और अपने कुछ पुण्य बेचकर थोड़े पैसे ले आइए, जिससे फिर से काम-धंधा शुरू हो सके।

पुण्य बेचने की व्यापारी की बिलकुल इच्छा नहीं थी, लेकिन पत्नी के दबाव और बच्चों की चिंता में वह पुण्य बेचने को तैयार हुआ। पत्नी ने रास्ते में खाने के लिए चार रोटियां बनाकर दे दीं।

व्यापारी चलता-चलता उस नगर के पास पहुंचा जहां पुण्य के खरीदार सेठ रहते थे। उसे भूख लगी थी।

नगर में प्रवेश करने से पहले उसने सोचा भोजन कर लिया जाए। उसने जैसे ही रोटियां निकालीं एक कुतिया तुरंत के जन्मे अपने तीन बच्चों के साथ आ खड़ी हुई।

कुतिया ने बच्चे जंगल में जन्म दिए थे। बारिश के दिन थे और बच्चे छोटे थे, इसलिए वह उन्हें छोड़कर नगर में नहीं जा सकती थी। 
व्यापारी को दया आ गई। उसने एक रोटी कुतिया को खाने के लिए दे दिया।
कुतिया पलक झपकते रोटी चट कर गई लेकिन वह अब भी भूख से हांफ रही थी।

व्यापारी ने दूसरी रोटी, फिर तीसरी और फिर चारो रोटियां कुतिया को खिला दीं। खुद केवल पानी पीकर सेठ के पास पहुंचा।

व्यापारी ने सेठ से कहा कि वह अपना पुण्य बेचने आया है। सेठ व्यस्त था। उसने कहा कि शाम को आओ।

दोपहर में सेठ भोजन के लिए घर गया और उसने अपनी पत्नी को बताया कि एक व्यापारी अपने पुण्य बेचने आया है। उसका कौन सा पुण्य खरीदूं।

सेठ की पत्नी बहुत पतिव्रता और सिद्ध थी। उसने ध्यान लगाकर देख लिया कि आज व्यापारी ने कुतिया को रोटी खिलाई है।

उसने अपने पति से कहा कि उसका आज का पुण्य खरीदना जो उसने एक जानवर को रोटी खिलाकर कमाया है। वह उसका अब तक का सर्वश्रेष्ठ पुण्य है।

व्यापारी शाम को फिर अपना पुण्य बेचने आया। सेठ ने कहा- आज आपने जो यज्ञ किया है मैं उसका पुण्य लेना चाहता हूं।
व्यापारी हंसने लगा। उसने कहा कि अगर मेरे पास यज्ञ के लिए पैसे होते तो क्या मैं आपके पास पुण्य बेचने आता!

सेठ ने कहा कि आज आपने किसी भूखे जानवर को भोजन कराकर उसके और उसके बच्चों के प्राणों की रक्षा की है। मुझे वही पुण्य चाहिए।
व्यापारी वह पुण्य बेचने को तैयार हुआ। सेठ ने कहा कि उस पुण्य के बदले वह व्यापारी को चार रोटियों के वजन के बराबर हीरे-मोती देगा।

चार रोटियां बनाई गईं और उसे तराजू के एक पलड़े में रखा गया। दूसरे पलड़े में सेठ ने एक पोटली में भरकर हीरे-जवाहरात रखे।
पलड़ा हिला तक नहीं। दूसरी पोटली मंगाई गई। फिर भी पलड़ा नहीं हिला।

कई पोटलियों के रखने पर भी जब पलड़ा नहीं हिला तो व्यापारी ने कहा- सेठजी, मैंने विचार बदल दिया है. मैं अब पुण्य नहीं बेचना चाहता।

व्यापारी खाली हाथ अपने घर की ओर चल पड़ा। उसे डर हुआ कि कहीं घर में घुसते ही पत्नी के साथ कलह न शुरू हो जाए।

जहां उसने कुतिया को रोटियां डाली थी, वहां से कुछ कंकड़-पत्थर उठाए और साथ में रखकर गांठ बांध दी।

घर पहुंचने पर पत्नी ने पूछा कि पुण्य बेचकर कितने पैसे मिले तो उसने थैली दिखाई और कहा इसे भोजन के बाद रात को ही खोलेंगे। इसके बाद गांव में कुछ उधार मांगने चला गया।

इधर उसकी पत्नी ने जबसे थैली देखी थी उसे सब्र नहीं हो रहा था। पति के जाते ही उसने थैली खोली।
उसकी आंखे फटी रह गईं। थैली हीरे-जवाहरातों से भरी थी।

व्यापारी घर लौटा तो उसकी पत्नी ने पूछा कि पुण्यों का इतना अच्छा मोल किसने दिया ? इतने हीरे-जवाहरात कहां से आए ??
व्यापारी को अंदेशा हुआ कि पत्नी सारा भेद जानकर ताने तो नहीं मार रही लेकिन, उसके चेहरे की चमक से ऐसा लग नहीं रहा था।

व्यापारी ने कहा- दिखाओ कहां हैं हीरे-जवाहरात। पत्नी ने लाकर पोटली उसके सामने उलट दी। उसमें से बेशकीमती रत्न गिरे। व्यापारी हैरान रह गया।
फिर उसने पत्नी को सारी बात बता दी। पत्नी को पछतावा हुआ कि उसने अपने पति को विपत्ति में पुण्य बेचने को विवश किया।

दोनों ने तय किया कि वह इसमें से कुछ अंश निकालकर व्यापार शुरू करेंगे। व्यापार से प्राप्त धन को इसमें मिलाकर जनकल्याण में लगा देंगे।

ईश्वर आपकी परीक्षा लेता है। परीक्षा में वह सबसे ज्यादा आपके उसी गुण को परखता है जिस पर आपको गर्व हो।
अगर आप परीक्षा में खरे उतर जाते हैं तो ईश्वर वह गुण आपमें हमेशा के लिए वरदान स्वरूप दे देते हैं।

अगर परीक्षा में उतीर्ण न हुए तो ईश्वर उस गुण के लिए योग्य किसी अन्य व्यक्ति की तलाश में लग जाते हैं।

इसलिए विपत्तिकाल में भी भगवान पर भरोसा रखकर सही राह चलनी चाहिए। आपके कंकड़-पत्थर भी अनमोल रत्न हो सकते हैं।

   *न डर रे मन दुनिया से*
   *यहाँ किसी के चाहने से नहीं*
   *किसी का बुरा होता है,*
   *मिलता है वही, जो हमने बोया होता है,*
   *कर पुकार उस प्रभु के आगे.. क्योकि सब कुछ उसी के बस में होता है।।*
        🚩🚩🚩🙏🏻🙏🏻🙏🏻

भगवान को भेंट

*भगवान को भेंट-*

पुरानी बात है एक सेठ के पास एक व्यक्ति काम करता था। सेठ उस व्यक्ति पर बहुत विश्वास करता था। जो भी जरुरी काम हो सेठ हमेशा उसी व्यक्ति से कहता था। वो व्यक्ति भगवान का बहुत बड़ा भक्त था l वह सदा भगवान के चिंतन भजन कीर्तन स्मरण सत्संग आदि का लाभ लेता रहता था।

एक दिन उस ने सेठ से श्री जगन्नाथ धाम यात्रा करने के लिए कुछ दिन की छुट्टी मांगी सेठ ने उसे छुट्टी देते हुए कहा- *"भाई ! मैं तो हूं संसारी आदमी हमेशा व्यापार के काम में व्यस्त रहता हूं जिसके कारण कभी तीर्थ गमन का लाभ नहीं ले पाता। तुम जा ही रहे हो तो यह लो 100 रुपए मेरी ओर से श्री जगन्नाथ प्रभु के चरणों में समर्पित कर देना।"* 

भक्त सेठ से सौ रुपए लेकर श्री जगन्नाथ धाम यात्रा पर निकल गया।

कई दिन की पैदल यात्रा करने के बाद वह श्री जगन्नाथ पुरी पहुंचा। मंदिर की ओर प्रस्थान करते समय उसने रास्ते में देखा कि बहुत सारे संत, भक्त जन, वैष्णव जन, हरि नाम संकीर्तन बड़ी मस्ती में कर रहे हैं। सभी की आंखों से अश्रु धारा बह रही है। जोर-जोर से हरि बोल, हरि बोल गूंज रहा है। संकीर्तन में बहुत आनंद आ रहा था। भक्त भी वहीं रुक कर हरिनाम संकीर्तन का आनंद लेने लगा। 

फिर उसने देखा कि संकीर्तन करने वाले भक्तजन इतनी देर से संकीर्तन करने के कारण उनके होंठ सूखे हुए हैं वह दिखने में कुछ भूखे भी प्रतीत हो रहे हैं। उसने सोचा क्यों ना सेठ के सौ रुपए से इन भक्तों को भोजन करा दूँ। 

उसने उन सभी को उन सौ रुपए में से भोजन की व्यवस्था कर दी। सबको भोजन कराने में उसे कुल 98 रुपए खर्च करने पड़े। उसके पास दो रुपए बच गए उसने सोचा चलो अच्छा हुआ दो रुपए जगन्नाथ जी के चरणों में सेठ के नाम से चढ़ा दूंगा l

जब सेठ पूछेगा तो मैं कहूंगा पैसे चढ़ा दिए। सेठ यह तो नहीं कहेगा 100 रुपए चढ़ाए। सेठ पूछेगा पैसे चढ़ा दिए मैं बोल दूंगा कि, पैसे चढ़ा दिए। झूठ भी नहीं होगा और काम भी हो जाएगा।

भक्त ने श्री जगन्नाथ जी के दर्शनों के लिए मंदिर में प्रवेश किया श्री जगन्नाथ जी की छवि को निहारते हुए अपने हृदय में उनको विराजमान कराया। अंत में उसने सेठ के दो रुपए श्री जगन्नाथ जी के चरणो में चढ़ा दिए। और बोला यह दो रुपए सेठ ने भेजे हैं।

उसी रात सेठ के पास स्वप्न में श्री जगन्नाथ जी आए आशीर्वाद दिया और बोले सेठ तुम्हारे 98 रुपए मुझे मिल गए हैं यह कहकर श्री जगन्नाथ जी अंतर्ध्यान हो गए। सेठ जाग गया सोचने लगा मेरा नौकर तौ बड़ा ईमानदार है, पर अचानक उसे क्या जरुरत पड़ गई थी उसने दो रुपए भगवान को कम चढ़ाए ? उसने दो रुपए का क्या खा लिया ? उसे ऐसी क्या जरूरत पड़ी ? ऐसा विचार सेठ करता रहा।

काफी दिन बीतने के बाद भक्त वापस आया और सेठ के पास पहुंचा। सेठ ने कहा कि मेरे पैसे जगन्नाथ जी को चढ़ा दिए थे  ? भक्त बोला हां मैंने पैसे चढ़ा दिए। सेठ ने कहा पर तुमने 98 रुपए क्यों चढ़ाए दो रुपए किस काम में प्रयोग किए। 

तब भक्त ने सारी बात बताई की उसने 98 रुपए से संतो को भोजन करा दिया था। और ठाकुरजी को सिर्फ दो रुपए चढ़ाये थे। सेठ सारी बात समझ गया व बड़ा खुश हुआ तथा भक्त के चरणों में गिर पड़ा और बोला- *"आप धन्य हो आपकी वजह से मुझे श्री जगन्नाथ जी के दर्शन यहीं बैठे-बैठे हो गए 

सन्तमत विचार-  *भगवान को आपके धन की कोई आवश्यकता नहीं है। भगवान को वह 98 रुपए स्वीकार है जो जीव मात्र की सेवा में खर्च किए गए और उस दो रुपए का कोई महत्व नहीं जो उनके चरणों में नगद चढ़ाए गए...सच्चे मन से किसी जरूरतमंद की जरूरत को पूरा कर देना भगवान को भेंट चढ़ाने से भी कहीं ज्यादा अच्छा होता है।*

*सुप्रभात। आज का दिन आपके लिए शुभ एवं मंगलमय हो।*

कटी प्याज के नुकसान"' विज्ञानं"

*🙏🌹Very Very Important Msg Please Read 🌹🙏* 


        *कटी प्याज के नुकसान*
                जरूर पढ़ें

  मानो या ना मानो यह पूर्णतया सत्य है.
देर से कटी प्याज का कभी उपयोग ना करें.
    प्याज हमेशा तुरंत काट कर खाएं.
कटी रखी प्याज दस मिनिट में 
अपने आस पास के सारे कीटाणु 
     अवशोसित कर लेती है.

यह वेज्ञानिक तौर पर सिद्ध हो चुका है.

जब भी किसी मौसमी बीमारी का प्रकोप फैले 
       घर में सुबह शाम हर कमरें में 
            प्याज काट कर रख दें.
            बाद में उसे फैंक दें. 
             सुरक्षित बने रहेंगें.

*प्याज के संबध में महत्वपूर्ण जानकारी.*

सन 1919 में फ्लू से चार करोड़ लोग 
मारे जा चुके थे, तब एक डॉक्टर 
कई किसानों से उनके घर इस प्रत्याशा में 
मिला कि वो कैसे इन किसानों को 
इस महामारी से लड़ने में 
सहायता कर सकता है.
बहुत सारे किसान इस फ्लू से ग्रसित थे 
और उनमें से बहुत से मारे जा चुके थे.

डॉक्टर जब इनमें से एक किसान के 
संपर्क में आया तो उसे ये जान कर 
बहुत आश्चर्य हुआ, कि सारे गाँव के 
फ्लू से ग्रसित होने के बावजूद 
ये किसान परिवार बिलकुल स्वस्थ्य था.
तब डॉक्टर को ये जानने की इच्छा जागी कि 
ऐसा इस किसान के परिवार ने 
सारे गाँव से हटकर क्या किया कि 
वो *इस भंयकर महामारी में भी*
         *स्वस्थ्य थे.*
 तब किसान की पत्नी ने उन्हें बताया कि 
उसने अपने मकान के दोनों कमरों में 
एक प्लेट में  छिली हुई प्याज रख दी थी 
तब डॉक्टर ने प्लेट में रखी इन प्याज को 
माइक्रोस्कोप से देखा तो उसे इस प्याज में 
उस घातक फ्लू के बैक्टेरिया मिले जो 
संभवतया इन प्याज द्वारा अवशोषित 
   कर लिए गए थे और शायद 
        यही कारण था कि 
इतनी बड़ी महामारी में ये परिवार 
   बिलकुल स्वस्थ्य था, क्योंकि 
*फ्लू के वायरस इन प्याज द्वारा*
     *सोख लिए गए थे.*

जब मैंने अपने एक मित्र जो 
अमेरिका में रहते थे और मुझे हमेशा 
स्वास्थ्य संबधी मुद्दों पर  
बेहद ज्ञानवर्धक जानकारी भेजते रहते हैं,
तब उन्होंने प्याज के संबध में बेहद महत्वपूर्ण 
जानकारी/अनुभव मुझे भेजा. उनकी इस 
बेहद रोचक कहानी के लिए धन्यवाद.

*जब मैं न्यूमोनिया से ग्रसित था और कहने की आवश्यकता नहीं थी कि मैं बहुत कमज़ोर महसूस कर रहा था तब मैंने एक लेख पढ़ा था जिसमें ये बताया गया था कि प्याज को बीच से काटकर रात में  न्यूमोनिया से ग्रस्त मरीज़ के कमरे में एक जार में रख दिया गया था और सुबह यह देख कर बेहद आश्चर्य हुआ कि प्याज सुबह कीटाणुओं की वज़ह से  बिलकुल काली हो गई थी*
*तब मैंने भी अपने कमरे में वैसे ही किया और देखा अगले दिन प्याज बिलकुल काली होकर खराब हो चुकी थी और मैं काफी स्वस्थ्य महसूस कर रहा था.*

कई बार हम पेट की बीमारी से दो चार होते है तब हम इस बात से अनजान रहते है कि इस बीमारी के लिए किसे दोषी ठहराया जाए. तब नि :संदेह प्याज को इस बीमारी के लिए दोषी ठहराया जा सकता है.

*प्याज बैक्टेरिया को अवशोषित कर लेती है यही कारण है कि अपने इस गुण के कारण प्याज हमें ठण्ड और फ्लू से बचाती है.*

*अत: वे प्याज बिलकुल नहीं खाना चाहिए जो बहुत देर पहले काटी गई हो और प्लेट में रखी गई हों. ये जान लें कि ...*
 *काट कर रखी गई प्याज बहुत विषाक्त होती हैं.*

जब कभी भी फ़ूड पॉइसनिंग के केस अस्पताल में आते हैं तो सबसे पहले इस बात की जानकारी ली जाती कि मरीज़ ने अंतिम बार प्याज कब खाई थी. और वे प्याज कहाँ से आई थीं , 
(खासकर सलाद में )

   *प्याज बैक्टेरिया के लिए*
*चुंबक की तरह काम करती हैं*
    *खासकर कच्ची प्याज*

*आप कभी भी थोड़ी सी भी कटी हुई प्याज को देर तक रखने की गलती न करे ये बेहद खतरनाक हैं.*

    *यहाँ तक कि किसी बंद थैली में*
*इसे रेफ्रिजरेटर में रखना भी सुरक्षित नहीं है.*

प्याज ज़रा सी काट देने पर ये बैक्टेरिया से ग्रसित हो सकती है और आपके लिए खतरनाक हो सकती है. यदि आप कटी हुई प्याज को सब्ज़ी बनाने के लिए उपयोग कर रहें हो, तब तो ये ठीक है, लेकिन यदि आप कटी हुई प्याज अपनी ब्रेड पर रख कर खा रहें है तो ये बेहद खतरनाक है. ऐसी स्थिति में आप मुसीबत को न्योता दे रहें हैं. याद रखे कटी हुई प्याज और कटे हुए आलू की नमी बैक्टेरिया को तेज़ी से  पनपने में बेहद सहायक होता है.
कुत्तों को कभी भी प्याज नहीं खिलाना चाहिए, क्योंकि प्याज को उनका पेट का मेटाबोलिज़ कभी भी नहीं पचाता.

*कृपया ध्यान रखे कि ...*
प्याज को काट कर अगले दिन सब्ज़ी बनाने के लिए नहीं रखना चाहिए क्योंकि ये बहुत खतरनाक है यहाँ तक कि कटी हुई प्याज एक रात में बहुत विषाक्त हो जाती है क्योंकि ये टॉक्सिक बैक्टेरिया बनाती है जो पेट खराब करने के लिए पर्याप्त रहता है।

प्याज परमाणविक रेडिएशन को भी सोख लेता है,पोखरन में भी इसका इस्तेमाल हुआ था।

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अधिकांश लोग लाभ ले सकें.

*Be safe n take care*

🙏🌹👳👳🌟✨🍛⚖️✅🙏

*ना करें सहारे तलाश*

*ना करें सहारे तलाश* 

ईरान का एक बादशाह सर्दियों की शाम जब अपने महल में दाखिल हो रहा था तो एक बूढ़े दरबान को देखा जो महल के सदर दरवाज़े पर पुरानी और बारीक वर्दी में पहरा दे रहा था। 
बादशाह ने उसके करीब अपनी सवारी को रुकवाया और उस बुज़ुर्ग दरबान से पूछा,
"क्या तुम्हें सर्दी नही लग रही है ?"
दरबान ने जवाब दिया " बहुत लग रही है हुज़ूर ! मगर क्या करूँ, गर्म वर्दी है नहीं मेरे पास, इसलिए बर्दाश्त करना पड़ता है।"
"मैं अभी महल के अंदर जाकर अपना ही कोई गर्म जोड़ा भेजता हूँ तुम्हें।"
दरबान ने ख़ुश होकर बादशाह को फर्शी सलाम किया और आजिज़ी का इज़हार किया। 
लेकिन बादशाह जैसे ही महल में दाखिल हुआ, दरबान के साथ किया हुआ वादा भूल गया। 
सुबह दरवाज़े पर उस बूढ़े दरबान की अकड़ी हुई लाश मिली और करीब ही मिट्टी पर उसकी उंगलियों से लिखी गई ये तहरीर भी -
"बादशाह सलामत ! मैं कई सालों से सर्दियों में इसी नाज़ुक वर्दी में दरबानी कर रहा था, मगर कल रात आप के गर्म लिबास के वादे ने मेरी जान निकाल दी।"

सहारे इंसान को खोखला कर देते हैं, उसी तरह उम्मीदें भी कमज़ोर कर देती हैं। अपने बलबूते पर जीना शुरू कीजिए, असल सहारा उस मालिक का है जो ज़िन्दगी में भी हमारे साथ है और मरने के बाद भी जिसकी रहमत हमको तन्हा नही छोड़ती है !

June 16, 2020

class math chapter 4 quadratic equation in english medium

class 10th chapter 4 quadratic equation in eng.

June 11, 2020

मेरा मेरी और मै

  *!! मेरे नाम का गुब्बारा !!*

एक बार पचास लोगों का ग्रुप किसी सेमीनार में हिस्सा ले रहा था। सेमीनार शुरू हुए अभी कुछ ही मिनट बीते थे कि स्पीकर अचानक ही रुका और सभी पार्टिसिपेंट्स को गुब्बारे देते हुए बोला, ”आप सभी को गुब्बारे पर इस मार्कर से अपना नाम लिखना है। सभी ने ऐसा ही किया। अब गुब्बारों को एक दुसरे कमरे में रख दिया गया। स्पीकर ने अब सभी को एक साथ कमरे में जाकर पांच मिनट के अंदर अपना नाम वाला गुब्बारा ढूंढने के लिए कहा।

सारे पार्टिसिपेंट्स तेजी से रूम में घुसे और पागलों की तरह अपना नाम वाला गुब्बारा ढूंढने लगे। पर इस अफरा-तफरी में किसी को भी अपने नाम वाला गुब्बारा नहीं मिल पा रहा था…पांच मिनट बाद सभी को बाहर बुला लिया गया। स्पीकर बोला, ” अरे! क्या हुआ, आप सभी खाली हाथ क्यों हैं ? क्या किसी को अपने नाम वाला गुब्बारा नहीं मिला ?” ” नहीं ! हमने बहुत ढूंढा पर हमेशा किसी और के नाम का ही गुब्बारा हाथ आया…”, एक पार्टिसिपेंट कुछ मायूस होते हुए बोला।

“कोई बात नहीं, आप लोग एक बार फिर कमरे में जाइये, पर इस बार जिसे जो भी गुब्बारा मिले उसे अपने हाथ में ले और उस व्यक्ति का नाम पुकारे जिसका नाम उसपर लिखा हुआ है, स्पीकर ने निर्दश दिया। एक बार फिर सभी पार्टिसिपेंट्स कमरे में गए, पर इस बार सब शांत थे, और कमरे में किसी तरह की अफरा-तफरी नहीं मची हुई थी। सभी ने एक दुसरे को उनके नाम के गुब्बारे दिए और तीन मिनट में ही बाहर निकले आये।

स्पीकर ने गम्भीर होते हुए कहा , ”बिलकुल यही चीज हमारे जीवन में भी हो रही है। हर कोई  अपने लिए ही जी रहा है, उसे इससे कोई मतलब नहीं कि वह किस तरह औरों की मदद कर सकता है, वह तो  बस  पागलों की तरह अपनी ही खुशियां ढूंढ रहा है, पर बहुत ढूंढने के बाद भी उसे कुछ नहीं मिलता।

*शिक्षा*:- 
दोस्तों ! हमारी ख़ुशी दूसरों की ख़ुशी में छिपी हुई है। जब तुम औरों को उनकी खुशियां देना सीख जाओगे तो अपने आप ही तुम्हे तुम्हारी खुशियां मिल जाएँगी। और यही मानव-जीवन का उद्देश्य है।”

समर्पण


        एक बार किसी देश का राजा अपनी प्रजा का हाल-चाल पूछने के लिए गाँवो में घूम रहा था। घूमते-घूमते उसके कुर्ते का बटन टूट गया, उसने अपने मंत्री को कहा कि, पता करो की इस गाँव में कौन सा दर्जी हैं,जो मेरे बटन को सिल सके, मंत्री ने पता किया, उस गाँव में सिर्फ एक ही दर्जी था, जो कपडे सिलने का काम करता था।
उसको राजा के सामने ले जाया गया, राजा ने कहा, क्या तुम मेरे कुर्ते का बटन सी सकते हो, दर्जी ने कहा,यह कोई मुश्किल काम थोड़े ही है, उसने मंत्री से बटन ले लिया, धागे से उसने राजा के कुर्ते का बटन फोरन सी दिया, क्योंकि बटन भी राजा के पास था, सिर्फ उसको अपना धागे का प्रयोग करना था।
        राजा ने दर्जी से पूछा कि, कितने पैसे दू, उसने कहा, महाराज रहने दो, छोटा सा काम था, उसने मन में सोचा कि, बटन भी राजा के पास था, उसने तो सिर्फ धागा ही लगाया हैं, राजा ने फिर से दर्जी को कहा, कि, नहीं नहीं बोलो कितनीे माया दू, दर्जी ने सोचा कि, 2 रूपये मांग लेता हूँ, फिर मन में सोचा कि; कहीं राजा यह ने सोचलें,कि, बटन टाँगने के मुझ से 2 रुपये ले रहा हैं, तो गाँव वालों से कितना लेता होगा, क्योंकि उस जमाने में २ रुपये की कीमत बहुत होती थी।
        दर्जी ने राजा से कहा, कि, महाराज जो भी आपको उचित लगे, वह दे दो, अब था तो राजा ही, उसने अपने हिसाब से देना था, कहीं देने में उसकी पोजीशन ख़राब न हो जाये।
उसने अपने मंत्री से कहा कि, इस दर्जी को २ गाँव दे दों, यह हमारा हुकम है।
कहाँ वो दर्जी सिर्फ २ रुपये की मांग कर रहा था, और कहाँ राजा ने उसको २ गाँव दे दिए ,, जब हम प्रभु पर सब कुछ छोड़ देते हैं, तो वह अपने हिसाब से देता हैं, सिर्फ हम मांगने में कमी कर जाते है, देने वाला तो पता नही क्या देना चाहता हैं, इसलिए संत-महात्मा कहते है, प्रभु के चरणों पर अपने आपको -अर्पण कर दों,, फिर देखो उनकी लीला।

June 07, 2020

मनोवैज्ञानिक तथ्य भाग 1

शुभ प्रभात
चलो दिन की शुरुवात कुछ मनोवैज्ञानिक तथ्यों से करते है

फोन खो जाने पर होने वाली चिंता उस चिंता के समान होती हैं, जब व्यक्ति अपनी मौत के करीब होता हैं.

 यदि आप किसी को अपने गोल बता देते हो तो आपके सफ़ल होने की संभावना कम हो जाती हैं.. ऐसा इसलिए, क्यों कि आप motivation lose कर देते हैं.

 हम जितना ज्यादा दूसरों पर खर्च करते हैं उतने ज्यादा खुश रहते हैं.

 90% लोग मैसेज़ में वो चीज़े लिखते हैं जिन्हें वो कह नही सकते.

आपका पसंदीदा गाना आपको इसलिए पसंद हैं क्यों कि वह आपकी ज़िंदगी की असल घटना के साथ जुड़ा हुआ होता हैं.

18 से 33 साल की उम्र तक आदमी सबसे ज्यादा तनाव में रहता हैं.

किसी भी आदमी को प्यार में पड़ने के लिए सिर्फ़ 4 मिनट ही काफी होते हैं.

Comedian और मजाकिया लोग दूसरो के मुकाबले ज्यादा उदास रहते हैं.

आधे से ज्यादा समय आपका दिमाग केवल यादें दोहराता रहता हैं.

 आप किसी से जितना भावनाओं को छिपाओगें.. उस व्यक्ति के लिए उतना ही मुश्किल होगा आपको समझना.


 जब कोई हमें ignore करता हैं तो वही chemical रिलिज़ होता हैं जो चोट लगने पर होता हैं.

 Smarter लोग खुद को कम मानते हैं लेकिन अनज़ान लोग उन्हें brilliant समझते हैं.

 यदि आप पुराने समय को याद करते हैं तो उससे ज्यादा ये याद आता हैं कि इसे आखिरीं बार कब याद किया था.

 जितनी चिंता आजकल के बच्चे दिखाते हैं 1950 में उतनी चिंता तो दिमागी मरीज़ दिखाते थे.

 जब किसी से प्यार होता हैं तो हमारा दिमाग इसमें कुछ नही करता करता बस एक chemical रिलिज़ होता हैं.

. जब कोई कहता हैं कि आपसे एक प्रश्न पूछना हैं तो हाल ही में किए गए सारे बुरे काम एक मिनट के अंदर याद आ जाते हैं.

 जो लोग ज्यादा हँसते हैं वो ज्यादा दर्द सहन कर सकते हैं.

 हम जो सोचते हैं उसका 90% हिस्सा सीधा हमारे मूड पर असर करता हैं एक गलत विचार पूरे मूड को खराब कर सकता हैं.

 लोग आपके बारे में अच्छा सुनने पर शक करते हैं लेकिन बुरा सुनने पर तुरंत यकीन कर लेते हैं.

. किसी के साथ ज्यादा समय बिताने से आप उसकी आदतें अपनानें लगते हैं इसलिए सोच-समझकर दोस्त बनाएं.

. इंसान के लिए सबसे मुश्किल कामों में से एक हैं.. खुद को ये समझाना कि अब मुझे किसी की परवाह नही हैं.

 90% लोगो का दिमाग ये सोचता हैं कि काश कुछ पल के लिए समय पीछे चला जाएं.

अगर कोई नाख़ून चबाता हैं तो इसका मतलब वह बहुत परेशान हैं.


यदि कोई ज्यादा तकियें लेकर सोता हैं तो इसका मतलब वह खुद को अकेला महसूस करता हैं.

June 06, 2020

दर्जी की सीख

!! *दर्जी की सीख* !!
---------------------------

एक दिन स्कूल में छुट्टी की घोषणा होने के कारण, एक दर्जी का बेटा, अपने पापा की दुकान पर चला गया। वहाँ जाकर वह बड़े ध्यान से अपने पापा को काम करते हुए देखने लगा। उसने देखा कि उसके पापा कैंची से कपड़े को काटते हैं और कैंची को पैर के पास टांग से दबा कर रख देते हैं। फिर सुई से उसको सीते हैं और सीने के बाद सु ई को अपनी टोपी पर लगा लेते हैं ।

जब उसने इसी क्रिया को चार-पाँच बार देखा तो उससे रहा नहीं गया, तो उसने अपने पापा से कहा कि वह एक बात उनसे पूछना चाहता है ?  पापा ने कहा- बेटा बोलो क्या पूछना चाहते हो ? बेटा बोला- पापा मैं बड़ी देर से आपको देख रहा हूं , आप जब भी कपड़ा काटते हैं, उसके बाद कैंची को पैर के नीचे दबा देते हैं, और सुई से कपड़ा सीने के बाद, उसे टोपी पर लगा लेते हैं, ऐसा क्यों ? 

इसका जो उत्तर पापा ने दिया- उन दो पंक्तियाँ में मानों उसने ज़िन्दगी का सार समझा दिया। उत्तर था- ” बेटा, कैंची काटने का काम करती है, और सुई जोड़ने का काम करती है, और काटने वाले की जगह हमेशा नीची होती है परन्तु जोड़ने वाले की जगह हमेशा ऊपर होती है । यही कारण है कि मैं सुई को टोपी पर लगाता हूं और कैंची को पैर के नीचे रखता हूं ।”

*शिक्षा* :-
उपर्युक्त कहानी से हमें भी यही सीख मिलती हैं कि जो समाज में एक-दूसरे को जोड़ने का काम करते हैं उसकी जगह हमेशा ऊपर, था जो काटने अलग करने का काम करता हैं, उसकी जगह हमेशा नीचे ही रहती हैं।

महत्वपूर्ण वैज्ञानिक नाम

📒महत्वपूर्ण जानकारी📒

• मनुष्य का वैज्ञानिक नाम क्या है?- होमो सैपियंस
• मेढक का वैज्ञानिक नाम क्या है?- राना टिग्रिना
• बिल्ली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- फेलिस डोमेस्टिका
• चूहा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- Rattus
छिपकली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- Lacertilia
• कुत्ता का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैनिस फैमिलियर्स
• गाय का वैज्ञानिक नाम क्या है?- बॉस इंडिकस
• भैँस का वैज्ञानिक नाम क्या है?- बुबालस बुबालिस
• बैल का वैज्ञानिक नाम क्या है?- बॉस प्रिमिजिनियस टारस
• बकरी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- केप्टा हिटमस
• भेँड़ का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ओवीज अराइज
• सुअर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- सुसस्फ्रोका डोमेस्टिका
• शेर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पैँथरा लियो
• बाघ का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पैँथरा टाइग्रिस
• चीता का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पैँथरा पार्डुस
• भालू का वैज्ञानिक नाम क्या है?- उर्सुस मैटिटिमस कार्नीवेरा
• खरगोश का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ऑरिक्टोलेगस कुनिकुलस
• हिरण का वैज्ञानिक नाम क्या है?- सर्वस एलाफस
• ऊँट का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैमेलस डोमेडेरियस
• लोमडी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैनीडे
• लंगूर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- होमिनोडिया
• बारहसिंगा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- रुसर्वस डुवाउसेली
• मक्खी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- मस्का डोमेस्टिका
• मोर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पैवो क्रिस्टेटस
• हाथी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एफिलास इंडिका
• डॉल्फिन का वैज्ञानिक नाम क्या है?- प्लैटिनिस्ट गैंगेटिका
• घोड़ा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ईक्वस कैबेलस
• गधा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- इक्विस असिनस
• आम का वैज्ञानिक नाम क्या है?- मैग्नीफेरा इंडिका
• अंगुर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- विटियस
• संतरा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- साइट्रस सीनेन्सिस
• नारियल का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कोको न्यूसीफेरा
• सेब का वैज्ञानिक नाम क्या है?- मेलस प्यूमिया/डोमेस्टिका
• अनानास का वैज्ञानिक नाम क्या है?- आननास कॉमोजस
• पपीता का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैरीका पपीता
• नाशपाती का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पाइरस क्यूमिनिस
• केला का वैज्ञानिक नाम क्या है?- म्यूजा पेराडिसिएका
• लीची का वैज्ञानिक नाम क्या है?- लीची चिन्नीसिस
• इमली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- तामार इंडस इंडिका
• खीरा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कुसुमिस सैटिवस
• बेर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ज़िज़ीफस मौरीतियाना
• चुकंदर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- बीटा वाल्गारिस
• जामुन का वैज्ञानिक नाम क्या है?- शायजियम क्यूमिनी
• गन्ना का वैज्ञानिक नाम क्या है?- सुगरेन्स औफिसीनेरम
• मक्का का वैज्ञानिक नाम क्या है?- जिया मेज
• बाजरा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पेनिसिटम अमेरीकोनम
• धान का वैज्ञानिक नाम क्या है?- औरिजया सैटिवाट
• गेहूँ का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ट्रिक्टिकम एस्टिवियम
• कपास का वैज्ञानिक नाम क्या है?- गैसीपीयम
• सरसोँ का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ब्रेसिका कम्पेस्टरीज
• कॉफी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कॉफिया अरेबिका
• चाय का वैज्ञानिक नाम क्या है?- थिया साइनेनिसस
• तुलसी का वैज्ञानिक नाम क्या हैं?- ऑक्सीमेन्ट टेन्यूफ़्लोरम
• एलोविरा का वैज्ञानिक नाम क्या हैं?- एलोविरा
• अफीम का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पपवर सोम्निफेरुम
• काजू का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एनाकार्डियम अरोमैटिकम
• बादाम का वैज्ञानिक नाम क्या है?- प्रुनस अरमेनिका
• मुंगफली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एरैकिस हाइजोपिया
• लालमिर्च का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैप्सियम एनुअम
• कालीमिर्च का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पाइपर नाइग्रम
• केसर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- क्रोकस सैटिवियस
• सौफ (Fennel) का वैज्ञानिक नाम क्या है?- फ़ीनिकुलम वल्गेरे
• जीरा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- क्यूमीनियम सिमिनियम
• हल्दी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कुरकुमा लोँगा
• नीबू का वैज्ञानिक नाम क्या है?- साइट्रस लिंबोन
• आंवला(gooseberry) का वैज्ञानिक नाम क्या है?- फ़िलेन्थस इम्ब्लिका
• धनिया का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कोरियेंडम सटिवुम
• टमाटर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- लाइकोप्रेसिकन एस्कुलेँटम
• पालक का वैज्ञानिक नाम क्या है?- स्पिनिया ओलेरसाइए
• बैगन का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एकोनिटियम हेटरोफिलम
• फूलगोभी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ब्रासिका औलिरेशिया
• अदरक का वैज्ञानिक नाम क्या है?- जिँजिबर ऑफिसिनेल
• लहसून का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एलियम सेराइवन
• गाजर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- डाकस कैरोटा
• मूली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- रेफेनस सैटाइविस

हमें अवसर नही मिला प्रेरक प्रसंग

*प्रेरक प्रसंग*

            !! *अवसर की पहचान* !!
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एक बार एक ग्राहक चित्रों की दुकान पर गया। उसने वहाँ पर अजीब से चित्र देखे। पहले चित्र में चेहरा पूरी तरह बालों से ढँका हुआ था और पैरों में पंख थे। एक दूसरे चित्र में सिर पीछे से गंजा था। ग्राहक ने पूछा- यह चित्र किसका है? दुकानदार ने कहा- अवसर का। ग्राहक ने पूछा- इसका चेहरा बालों से ढका क्यों है? दुकानदार ने कहा - क्योंकि अक्सर जब अवसर आता है तो मनुष्य उसे पहचानता नहीं है। 

ग्राहक ने पूछा- और इसके पैरों में पंख क्यों है? दुकानदार ने कहा – वह इसलिये कि यह तुरंत वापस भाग जाता है, यदि इसका उपयोग न हो तो यह तुरंत उड़ जाता है। ग्राहक ने पूछा- और यह दूसरे चित्र में पीछे से गंजा सिर किसका है? दुकानदार ने कहा- यह भी अवसर का है। 

यदि अवसर को सामने से ही बालों से पकड़ लेंगे तो वह आपका है। अगर आपने उसे थोड़ी देरी से पकड़ने की कोशिश की तो पीछे का गंजा सिर हाथ आयेगा और वो फिसलकर निकल जायेगा। वह ग्राहक इन चित्रों का रहस्य जानकर हैरान था, पर अब वह बात समझ चुका था।


*शिक्षा*:-
दोस्तों, आपने कई बार दूसरों को ये कहते हुए सुना होगा या खुद भी कहा होगा कि ‘हमें अवसर ही नहीं मिला’ लेकिन ये अपनी जिम्मेदारी से भागने और अपनी गलती को छुपाने का बस एक बहाना है। Real में भगवान ने हमें ढ़ेरों अवसरों के बीच जन्म दिया है। अवसर हमेशा हमारे सामने से आते-जाते रहते हैं, पर हम उसे पहचान नहीं पाते या पहचानने में देर कर देते हैं। और कई बार हम सिर्फ इसलिये चूक जाते हैं क्योंकि हम बड़े अवसर की ताक में रहते हैं। पर अवसर बड़ा या छोटा नहीं होता है। हमें हर अवसर का भरपूर उपयोग करना चाहिये।

शरीर से जुड़े रोचक तथ्य भाग 3

शुभ प्रभात,,,,,
चलो दिन की शुरुवात कुछ रोचक तथ्यों से करते है

मानव आँख 576 मेगा पिक्सेल की होती है,जो की आजकल के मोबाइल कैमरा से कई गुना ज्यादा है


 यदि आप अपने पुरे जीवनकाल में अपने बाल नहीं कटवाएँगे तो आपके बालों की लंबाई 725 किलोमीटर हो सकती हैं

 एक हवाई जहाज की उड़ान के दौरान एक व्यक्ति के बाल डबल गति सेबढ़ते हैं।

 60 वर्ष की आयु तक के अधिकांश लोग अपने आधे स्वाद खो देते हैं।


. आंख के अंदर रेटिनस लगभग 650 वर्ग मीटर के होते है और इसमें 137 मिलियन प्रकाश संवेदनशील कोशिकाएं होती है. 130 मिलियन काले और दृष्टी के लिए होते है और 7 मिलियन आप को रंग देखने में मदद करते हैं।

. हमारी आंखें उसी आकार में रहती है जैसे वे जन्म में थी लेकिन हमारे कान और नाक बढ़ने से कभी नहीं रुकते हैं।

 आंखे खोल कर  छींकना असंभव ह

 मनुष्य केवल एकमात्र प्राणी है जो सीधे रेखाएं खींच सकते हैं।


आपका दायां फेफड़ा आपके बाएं फेफड़े से अधिक हवा ले सकता हैं।

 मानव मुंह में करीब 40,000 बैक्टीरिया होते है और करीब 2,000 स्वाद कब्ज हैं।

72. एक वयस्क व्यक्ति लगभग 23,000 सांस लेता है और छोड़ देता है।

मानव शरीर में सबसे छोटी कोशिकाएं शुक्राणु कोशिका होती हैं।

 मानव ह्रदय रक्त इतनी तेज पंप करता है जिससे वह इमारत के चौथे मंजिल तक खून उठाने में सक्षम होता हैं।

बच्चे वसंत में तेजी से बढ़ते हैं.

76 की उम्र तक मनुष्य लगभग 12,000 गैलन पानी का उपभोग कर लेता है.

शरीर 0.0015 सेकंड में स्वाद का अनुभव कर लेता है जो की हमारी पलकें झपकने से ज्यादा तेज है.

 मनुष्य का मुंह और स्त्रियों की जननांग, एक ही प्रकार की त्वचा कोशिका से बनी होती है.

मनुष्य की छींक की गति लगभग 100 Mph या उससे भी ज्यादा होती है.

मनुष्य जिस हाथ से लिखता है, उस हाथ के नाख़ून तेजी से बढ़ते है. ये पैर के अंगूठे और लम्बी उंगली के नाख़ून से भी तेज बढ़ते हैं.

June 05, 2020

महत्व पूर्ण अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ important international borders

⛩ अंतराष्ट्रीय सीमाएं
 

1. रेखा का नाम – डूरंड रेखा
(Durand Line)
- देशों के मध्य – पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान
- 1886 में सर मार्टिमर डूरंड द्वारा निर्धारित।

 
2. रेखा का नाम – मैकमाहोन रेखा
(Macmahon Line)
- देशों के मध्य – भारत तथा चीन
- 1120 किमी. लंबी यह रेखा सर हेनरी मैकमोहन द्वारा निर्धारित की गई थी।

 
3. रेखा का नाम – रेडक्लिफ रेखा
(Radcliffe Line)
- देशों के मध्य – भारत तथा पाकिस्तान
- 1947 में भारत-पाकिस्तान सीमा आयोग के अध्यक्ष सर सायरिल रेडक्लिफ द्वारा निर्धारित।

 
4. रेखा का नाम – 17 वीं समानांतर रेखा
(17th Parallel)
- देशों के मध्य – उत्तरी वियतनाम तथा द. वियतनाम
- वियतनाम के एकीकरण के पहले यह देश को दो भागों में बांटती थी।

 
5. रेखा का नाम – 24 वीं समानांतर रेखा
(24th Parallel)
- देशों के मध्य – भारत तथा पाकिस्तान
- पाकिस्तान के अनुसार कच्छ क्षेत्र का यह रेखा सही निर्धारण करती है लेकिन भारत इस रेखा को स्वीकार नहीं करता है।

 
6. रेखा का नाम – 38 वीं समानांतर रेखा
(38th Parallel)
- देशों के मध्य – उत्तर कोरिया तथा दक्षिण कोरिया
- कोरिया को दो भागों में बांटती है।

 
7. रेखा का नाम – 49 वीं समानांतर रेखा
(49th Parallel)
- देशों के मध्य – अमेरिका तथा कनाडा
- अमेरिका तथा कनाडा को दो भागों में बांटती है।

 
8. रेखा का नाम – हिंडनबर्ग रेखा
(Hindenburg Line)
- देशों के मध्य – जर्मनी तथा पोलैंड
- प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी की सेना यहीं से वापस लौटी थी।

 
9. रेखा का नाम – ओडरनास रेखा
(Order-Neisse Line)
- देशों के मध्य – जर्मनी तथा पोलैंड
- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद निर्धारित की गई।

 
10. रेखा का नाम – मैगिनाट रेखा
(Maginot Line)
- देशों के मध्य – जर्मनी तथा फ्रांस
- जर्मनी के आक्रमण से बचाव के लिए फ्रांस ने यह रेखा बनाई थी।

 

11. रेखा का नाम – सीजफ्राइड रेखा
(Seigfrid Line)
- देशों के मध्य – जर्मनी तथा फ्रांस
-जर्मनी ने यह रेखा बनाई थी

Important fact about to body

कुछ रोचक बाते मानव सरीर के बारे में


 1 जिस मानव का वजन 70 किलो होता है उसमें 0.2 मिलीग्राम तक सोना होता है।

2. मनुष्य के थूक का उबाल दर्जा पानी से तीन गुना होता है। 

3. दुनिया के सबसे कम उम्र के मां-बाप 8 और 9 साल के थे और 1910 में चीन में रहते थे।

4. आप के महिदे (Stomatch) में जो तेजाब होता है वह बलेड़ को भी पचा सकता है।यह तेजाब Hydrochloric तेजाब होता है।

5. दुनिया में हर 40 सैकेंड में एक आत्महत्या होती है।

6. मनुष्य के बाल न तो सर्दी द्वारा, न जलवायु द्वारा, न पानी द्वारा और न ही अन्य कुदरती बलों द्वारा नष्ट होते है और यह कई प्रकार के तेजाबों के प्रतीरोधक भी है।

7. एक औसतन मनुष्य के 1,00,000 बाल होते हैं।जिन के बाल काले होते है उनके औसतन 1,10,000 , जिनके भुरे होते है उनके 1,00,000 और जिनके लाल होते है उनके औसतन 86,000 बाल होते है।

8. आप की कुहनी से नचले भाग से कलाई तक के भाग जितने ही आपके पैर होते है।ऐसे ही आपके अंगुठे की लंम्बाई आपकी नाक की लंम्बाई जितनी होती है और होठों की लंम्बाई आपकी पहली ऊगली जितनी होती है

Important fact for human body

good mornIng
शुभ प्रभात
चलो दिन की शुरुवात करते है कुछ रोचक बातो से

1. आप के फेफड़े की सतह का क्षेत्रफल एक Tennis Court के जितना होता है।

. मनुष्य का बायां फेफडा, दाएँ फेफडे से छोटा होता है क्योकि उसने दिल को जगा देनी होती है।

. जिन लोगो कि शरीर पर तिलों की संख्या ज्यादा होती है वह औसतन कम तिल वाले लोगो से ज्यादा जीते हैं।

 काले रंग के लोगो को गोरे रंग के लोगो से कम दिल का दौरा पड़ता है।

हम शाम के मुकाबले सवेर को 1 Cm लंम्बे होते हैं।

अगर एक औसतन मनुष्य की खुन की वाहिकायों को जोड़ दिया जाए तो 96,000 किलोमीटर लंम्बी लड़ी बन सकती है जिससे धरती का ढाई बार चक्कर लगाया जा सकता है।

बहुत ज्यादा खा लेने के बाद आपकी सुनने की समता थोड़ी कम हो जाती है।

 अपने जीवन काल के दौरान आप दो स्वीमिंग पुल जितनी लार बना लेते है।लार भोजन को पचाने और उसे सवादिस्ट बनाने के लिए महत्वपुर्ण भूमिका निभाती है।

. मानव एकलौते ऐसे प्राणी हैं जो भावुक होकर रोते हैं।

 साठ साल की उम्र के बाद 60% बुजुर्ग और 40% बुजुर्ग महिलाएँ सोते समय खराटे मारने लगते हैं।

. एक मिनट में दुनिया में सात लोग धुम्रपान की वजह से मारे जाते है।

. आपके शरीर में 1 सैकेंड में 1 करोड़ लाल रकताणु बनते और मरते हैं।

एक मिनट में 1 करोड़ सिगरेट पी ली जाती है।

आपके सिर में 22 हड्डिया होती है।

. शारीरक तौर पर एक ही समय पर पेशाब करना और रक्त देना असंभ्व है।

बुद्धीमान लोगों के बालों में जिंक और ताबें की मात्रा ज्यादा होती है।

 हमारी आँखे जन्म से लेकर सदा एकसार रहती है जबकि हमारे कान और नाक कभी बढ़ना नही रूकते।

 टैलीविजन देखते समय आप सोने से ज्यादा कैलोरी खप्त करते है।

 अपने Muscles के बारे में सोचना आपको ताकतवर बनाता है।

 सोमवार एक ऐसा दिन होता है जब Heart Attack (दिल के दौरे) होने के ज्यादा Chance होते है।Scotland में हुए एक अध्ययन के अनुसार 20% लोग अन्य किसी दिन के बजाए सोमवार को दिल के दौरे से मरे