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July 29, 2026

कक्षा 10 हिंदी (अक्षरा/क्षितिज/कृतिका एवं व्याकरण) के अंतर्गत आने वाले "हिंदी साहित्य के इतिहास"

 

विशेष प्रस्तुति: MP Board कक्षा 10वीं हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए बोर्ड परीक्षा पैटर्न पर आधारित संपूर्ण स्टडी मैटेरियल।

परीक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण

यह नोट्स MP Board कक्षा 10 हिंदी (अक्षरा/क्षितिज/कृतिका एवं व्याकरण) के अंतर्गत आने वाले "हिंदी साहित्य के इतिहास" के प्रश्न-पत्र के अनुसार तैयार किए गए हैं। इसमें पिछले 10 वर्षों के प्रश्नों का समावेश है।

अध्याय 1: हिंदी साहित्य का परिचय एवं काल-विभाजन

1.1 हिंदी साहित्य का परिचय

·         साहित्य का अर्थ: 'साहित्य' शब्द 'सहित' भाव से बना है, जिसका अर्थ है - "जिसमें सबका हित निहित हो"। मानव समाज के विचारों, भावनाओं और अनुभवों का संग्रहित ज्ञान-कोष ही साहित्य है।

·         हिंदी साहित्य: हिंदी भाषा में रचित पद, गद्य, काव्य एवं अन्य विधाओं का कालक्रमानुसार अध्ययन 'हिंदी साहित्य का इतिहास' कहलाता है।

·         आचार्य रामचंद्र शुक्ल का कथन: "प्रत्येक देश का साहित्य वहाँ की जनता की चित्तवृत्ति का संचित प्रतिबिंब होता है।"

1.2 काल-विभाजन एवं नामांकरण

हिंदी साहित्य के इतिहास को अध्ययन की सुविधा के लिए आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा 4 प्रमुख कालों में विभाजित किया गया है:


क्र.

काल का नाम

अन्य नाम

समय-सीमा (विक्रमी संवत)

समय-सीमा (ईस्वी सन)

1

आदिकाल

वीरगाथा काल

सं. 1050 से 1375 तक

सन 993 ई. से 1318 ई.

2

भक्तिकाल

पूर्व मध्यकाल (स्वर्ण युग)

सं. 1375 से 1700 तक

सन 1318 ई. से 1643 ई.

3

रीतिकाल

उत्तर मध्यकाल / श्रृंगार काल

सं. 1700 से 1900 तक

सन 1643 ई. से 1843 ई.

4

आधुनिक काल

गद्य काल

सं. 1900 से अब तक

सन 1843 ई. से अब तक


Text Format Mind Map (काल विकास क्रम)


[हिंदी साहित्य का इतिहास]
   │
   ├── 1.
आदिकाल (वीरगाथा काल) [सं. 1050 - 1375]
   │
   ├── 2.
भक्तिकाल (पूर्व मध्यकाल) [सं. 1375 - 1700]
   │      ├──
निर्गुण काव्यधारा (ज्ञानाश्रयी & प्रेमाश्रयी)
   │      └──
सगुण काव्यधारा (रामाश्रयी & कृष्णाम्रयी)
   │
   ├── 3.
रीतिकाल (उत्तर मध्यकाल) [सं. 1700 - 1900]
   │      ├──
रीतिबद्ध
   │      ├──
रीतिसिद्ध
   │      └──
रीतिमुक्त
   │
   └── 4.
आधुनिक काल (गद्य काल) [सं. 1900 - अब तक]
          ├──
भारतेंदु युग (1850 - 1900)
          ├──
द्विवेदी युग (1900 - 1920)
          ├──
छायावाद (1920 - 1936)
          ├──
प्रगतिवाद (1936 - 1943)
          ├──
प्रयोगवाद (1943 - 1953)
          └──
नई कविता (1953 से अब तक)



याद रखें

संस्कृत/विक्रमी संवत से ईस्वी सन निकालने का सूत्र: विक्रमी संवत - 57 = ईस्वी सन

(उदाहरण: 1050 - 57 = 993 ईस्वी)।

अध्याय 2: आदिकाल (वीरगाथा काल)

2.1 समय-सीमा एवं पृष्ठभूमि

समय-सीमा: संवत1050 - 1375 (सन 993 ई. - 1318 ई.)

नामांकन: आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इस काल में वीरगाथात्मक रासो ग्रंथों की प्रधानता के कारण इसे 'वीरगाथा काल' नाम दिया। डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी ने इसे 'आदिकाल' कहा।

2.2 आदिकाल की प्रमुख विशेषताएँ / प्रवृत्तियाँ

1.    आश्रयदाताओं की प्रशंसा: कवि अपने राजाओं/आश्रयदाताओं की अतिशयोक्तिपूर्ण प्रशंसा करते थे।

2.    युद्धों का सजीव वर्णन: कवि केवल कलम के ही नहीं, बल्कि तलवार के भी धनी थे। वे युद्ध क्षेत्र में स्वयं जाकर युद्ध लड़ते एवं वर्णन करते थे।

3.    ऐतिहासिकता का अभाव: घटनाओं और तिथियों के वर्णन में ऐतिहासिक प्रामाणिकता की कमी पाई जाती है।

4.    रासो ग्रंथों की प्रधानता: इस काल में 'रासो' शैली में काव्य लिखे गए।

5.    डिंगल और पिंगल भाषा का प्रयोग: अपभ्रंश + राजस्थानी के मिश्रण को डिंगल तथा अपभ्रंश + ब्रजभाषा के मिश्रण को पिंगल कहा जाता है।

6.    वीर एवं श्रृंगार रस की प्रधानता: युद्ध वर्णन में वीर रस तथा नायिका वर्णन में श्रृंगार रस मुख्य रूप से विद्यमान है।

2.3 आदिकाल के प्रमुख कवि एवं उनकी रचनाएँ


कवि का नाम

प्रमुख रचना

रचना का प्रकार / विशेष तथ्य

चंदबरदाई

पृथ्वीराज रासो

हिंदी का प्रथम महाकाव्य (पृथ्वीराज चौहान के जीवन पर आधारित)

जगनिक

परमाल रासो (आल्हाखंड)

लोकप्रिय वीरगीत, वर्षा ऋतु में गाया जाने वाला आल्हा

दलपति विजय

खुमाण रासो

चित्तौड़ के राजा खुमाण के युद्धों का वर्णन

नरपति नाल्ह

बीसलदेव रासो

गेय काव्य (श्रृंगार रस प्रधान)

विद्यापति

पदावली, कीर्तिलता, कीर्तिपताका

इन्हें 'मैथिल कोकिल' कहा जाता है।

अमीर खुसरो

पहेलियाँ, मुकरियाँ, दो सुखने

खड़ी बोली हिंदी के प्रथम कवि।


 

⭐ महत्वपूर्ण कठिन शब्दार्थ

·         अतिशयोक्ति: किसी बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहना।

·         आश्रयदाता: राजा या जमींदार जो कवियों को अपने दरबार में संरक्षण देते थे।

·         डिंगल: प्राचीन राजस्थानी मिश्रित अपभ्रंश भाषा।

अध्याय 3: भक्तिकाल (हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग)

3.1 समय-सीमा एवं वर्गीकरण

·        

समय-सीमा: संवत 1375 – 1700  (सन 1318 ई.–1643ई.)।

स्वर्ण युग: जॉर्ज ग्रियर्सन एवं श्यामसुंदर दास ने भक्तिकाल को 'हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग' कहा है।

भक्तिकाल का वर्गीकरण Flowchart (Text Format)


               [भक्तिकाल]
                   │
         ┌─────────────────┴─────────────────┐
  [1.
निर्गुण काव्यधारा]                       [2. सगुण काव्यधारा]
          │                                   │
   ┌──────┴──────┐                     ┌──────┴──────┐
ज्ञानाश्रयी     प्रेमाश्रयी                    रामाश्रयी     कृष्णाश्रयी
(
संत काव्य)   (सूफी काव्य)                    (राम काव्य)   (कृष्ण काव्य)
   │             │                          │             │
कबीरदास        मलिक मो. जायसी          तुलसीदास       सूरदास


3.2 भक्तिकाल की सामान्य विशेषताएँ

1.    ईश्वर भक्ति की प्रधानता: नाम स्मरण, गुरु की महिमा तथा अहंकार का त्याग।

2.    सद्गुरु का महत्व: ईश्वर प्राप्ति के लिए गुरु को सर्वोपरि माना गया।

3.    जाति-पांति एवं बाह्याडंबरों का विरोध: समाज में व्याप्त कुरीतियों और छुआछूत का खंडन।

4.    लोक कल्याण की भावना: काव्य का मुख्य उद्देश्य जन-सामान्य का हित करना था।

5.    बहुभाषा का प्रयोग: अवधि, ब्रज, और सधुक्कड़ी (पंचमेल खिचड़ी) भाषा का प्रयोग।

3.3 भक्तिकाल की शाखाएँ एवं प्रमुख कवि

(A) निर्गुण काव्यधारा

1. ज्ञानाश्रयी (संत) शाखा: निराकार ईश्वर की साधना, ज्ञान को महत्व।

o    प्रमुख कवि: कबीरदास (बीजक - साखी, शब्द, रमैनी), गुरु नानक, रैदास।

o    भाषा: सधुक्कड़ी / पंचमेल खिचड़ी।

2. प्रेमाश्रयी (सूफी) शाखा: प्रेम के माध्यम से ईश्वर प्राप्ति।

o    प्रमुख कवि: मलिक मोहम्मद जायसी (पद्मावत - महाकाव्य), मंझन (मधुमालती), कुतुबन (मृगावती)।

o    भाषा: ठेठ अवधी।

(B) सगुण काव्यधारा

1. रामाश्रयी (रामभक्ति) शाखा: भगवान श्री राम के मर्यादित रूप की पूजा।

प्रमुख कवि: गोस्वामी तुलसीदास (श्रीरामचरितमानस, विनयपत्रिका, कवितावली), स्वामी अग्रदास।

भाषा: अवधी एवं ब्रजभाषा।

2. कृष्णाश्रयी (कृष्णभक्ति) शाखा: भगवान श्री कृष्ण के बाल्य व मधुर रूप की पूजा।

प्रमुख कवि: सूरदास (सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरी), मीराबाई, रसखान, नन्ददास।

भाषा: ब्रजभाषा।

3.4 प्रमुख कवियों की तालिका व रचनाएँ


कवि का नाम

शाखा

प्रमुख रचनाएँ

विशेषता / भाषा

कबीरदास

ज्ञानाश्रयी

बीजक (साखी, शब्द, रमैनी)

सधुक्कड़ी भाषा, समाज सुधारक कवि

मलिक मो.  जायसी

प्रेमाश्रयी

पद्मावत, अखरावट, आखिरी कलाम

ठेठ अवधी, सूफी प्रेम गाथा

गोस्वामी तुलसीदास

रामाश्रयी

श्रीरामचरितमानस, विनयपत्रिका, दोहावली

अवधी व ब्रज, लोकनायक कवि

सूरदास

कृष्णाश्रयी

सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरी

ब्रजभाषा, वात्सल्य रस के सम्राट


अध्याय 4: रीतिकाल

4.1 समय-सीमा एवं अर्थ

समय-सीमा: संवत 1700-1900 (सन 1643 ई. - 1843 ई.)।

'रीति' शब्द का अर्थ: 'रीति' का अर्थ है - मार्ग, पद्धति या शैली। जिस काव्य में काव्य-शास्त्र के नियमों (अलंकार, रस, छंद, नायक-नायिका भेद) के अनुसार रचनाएँ की गईं, उसे 'रीतिकाल' कहा गया। इसे विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने 'श्रृंगार काल' भी कहा है।

4.2 रीतिकाल की प्रमुख विशेषताएँ

1.    रीति ग्रंथों का निर्माण: लक्षण ग्रंथों एवं काव्य सिद्धांतों का प्रतिपादन।

2.    श्रृंगार रस की प्रधानता: संयोग एवं वियोग श्रृंगार रस का अतिशयोक्तिपूर्ण चित्रण।

3.    आश्रयदाताओं की प्रशंसा: राजाओं को प्रसन्न करने के लिए काव्य रचना।

4.    ब्रजभाषा का स्वर्ण काल: रीतिकाल में केवल ब्रजभाषा का व्यापक प्रयोग हुआ।

5.    कला पक्ष की प्रधानता: भाव पक्ष की अपेक्षा भाषा, अलंकार और शिल्प पर अधिक ध्यान दिया गया।

4.3 रीतिकाल का वर्गीकरण एवं प्रमुख कवि


वर्ग (धारा)

परिभाषा

प्रमुख कवि एवं रचनाएँ

रीतिबद्ध कवि

जिन्होंने शास्त्र की परिपाटी और नियमों में बंधकर रीति-ग्रंथों की रचना की।

केशवदास (रामचंद्रिका - 'छंदों का अजायाबघर'), मतिराम (ललित ललाम), चिंतामणि।

रीतिसिद्ध कवि

जिन्होंने रीति-ग्रंथ नहीं लिखे, परंतु रीति का ज्ञान उनकी रचनाओं में स्वतः सिद्ध था।

बिहारीलाल (बिहारी सतसई - 713 दोहे)। "गागर में सागर भरना"।

रीतिमुक्त कवि

जिन्होंने रीतिशास्त्र के बंधनों से पूरी तरह मुक्त होकर स्वच्छंद काव्य लिखा।

घनानंद (सुजान सागर), बोधा (विरह वारिश), ठाकुर, आलम।


💡 याद रखें

केशवदास: इन्हें 'कठिन काव्य का प्रेत' कहा जाता है।

कवि भूषण: रीतिकाल के प्रमुख वीर रस के कवि (रचनाएँ: छत्रसाल दशक, शिव बावनी)।


अध्याय 5: आधुनिक काल एवं गद्य का विकास

5.1 समय-सीमा एवं पृष्ठभूमि

·         समय-सीमा: संवत 1900 से अब तक (सन 1843 ई. से अब तक)।

·         विशेषता: इसे आचार्य शुक्ल ने 'गद्य काल' कहा क्योंकि इस काल में गद्य (कहानी, नाटक, निबंध, उपन्यास) का अभूतपूर्व विकास हुआ।

5.2 आधुनिक काव्य काल का विकास-क्रम (Timeline)


युग / धारा

समय-सीमा

मुख्य प्रवृत्तियाँ / विशेषताएँ

प्रमुख कवि व रचनाएँ

1. भारतेंदु युग

1850 - 1900

राष्ट्रीयता की भावना, सामाजिक चेतना, हास्य-व्यंग्य, समस्यापूर्ति।

भारतेंदु हरिश्चंद्र (प्रेम मालिका), प्रताप नारायण मिश्र, बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन'।

2. द्विवेदी युग

1900 - 1920

इतिवृत्तात्मकता (वर्णनात्मकता), खड़ी बोली का प्रयोग,  देशप्रेम, अनुशासन।

महावीर प्रसाद द्विवेदी, मैथिलीशरण गुप्त (साकेत), अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' (प्रियप्रवास - खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य)।

3. छायावाद

1920 - 1936

व्यक्तिवादिता, प्रकृति का मानवीकरण, सौंदर्य एवं प्रेम भावना, रहस्यवाद।

जयशंकर प्रसाद (कामायनी), सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (अनामिका), सुमित्रानंदन पंत (पल्लव), महादेवी वर्मा (यामा)।

4. प्रगतिवाद

1936 - 1943

शोषितों के प्रति सहानुभूति, शोषक वर्ग के प्रति आक्रोश, साम्यवादी विचारधारा, यथार्थवाद।

नागार्जुन (युगधारा), केदारनाथ अग्रवाल, शिवमंगल सिंह 'सुमन', दिनकर (कुरुक्षेत्र)।

5. प्रयोगवाद

1943 - 1953

नवीन बिंब व प्रतीक, घोर अहमवादिता, बौद्धिकता की प्रधानता, तारसप्तक का प्रकाशन।

अज्ञेय (आंगन के पार द्वार), गजानन माधव 'मुक्ति                                                                बोध', धर्मवीर भारती (अंधा युग)।

6. नई कविता

1953 से अब तक

क्षणवाद, जीवन के प्रति आस्था, शिल्पगत नवीनता, यथार्थ का सहज अंकन।

दुष्यंत कुमार (साये में धूप), कुंवर नारायण, भवानी प्रसाद मिश्र।


 

📌 छायावाद के चार स्तंभ (याद रखने की ट्रिक)

प्रसाद, निराला, पंत, वर्मा!

1. जयशंकर प्रसाद (छायावाद के जनक)

2. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

3. सुमित्रानंदन पंत (प्रकृति के सुकुमार कवि)

4. महादेवी वर्मा (आधुनिक युग की मीरा)

अध्याय 6: क्विक रिवीजन नोट्स एवं सम्पूर्ण सारांश

6.1 Quick Summary Table



काल

उपनाम

मुख्य रस

मुख्य भाषा

प्रतिनिधि कवि

प्रसिद्ध ग्रंथ

आदिकाल

वीरगाथा काल

वीर एवं श्रृंगार

डिंगल- पिंगल

चंदबरदाई

पृथ्वीराज रासो

भक्तिकाल

स्वर्ण युग

शांत व भक्ति रस

अवधी व ब्रज

तुलसीदास/सूरदास

श्रीरामचरितमानस/ सूरसागर

रीतिकाल

श्रृंगार काल

संयोग/वियोग श्रृंगार

शुद्ध ब्रजभाषा

बिहारीलाल / केशवदास

बिहारी सतसई

आधुनिक काल

गद्य काल

करुण, वीर, शांत आदि

मानक खड़ी बोली

जयशंकर प्रसाद

कामायनी



अध्याय 7: परीक्षा उपयोगी प्रश्न बैंक

7.1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)

1.    हिंदी साहित्य के आदिकाल को 'वीरगाथा काल' नाम किसने दिया?
(
अ) डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी

(ब) आचार्य रामचंद्र शुक्ल

(स) डॉ. नगेंद्र                    (द) राहुल सांकृत्यायन

2.    हिंदी का प्रथम महाकाव्य किसे माना जाता है?
(
अ) पद्मावत                      (ब) श्रीरामचरितमानस (स) पृथ्वीराज रासो       (द) साकेत

3.    'कठिन काव्य का प्रेत' किस कवि को कहा जाता है?
(
अ) भूषण                                     (ब) घनानंद

(स) केशवदास                   (द) बिहारी

4.    छायावाद के जनक माने जाते हैं -
(
अ) सुमित्रानंदन पंत         (ब) जयशंकर प्रसाद

(स) महादेवी वर्मा (द) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

5.    'तारसप्तक' का संपादन किसने किया?
(
अ) मुक्तिबोध                  (ब) अज्ञेय

(स) धर्मवीर भारती            (द) गिरजाकुमार माथुर

1. (ब) आचार्य रामचंद्र शुक्ल     2. (स) पृथ्वीराज रासो

3. (स) केशवदास                       4. (ब) जयशंकर प्रसाद

5. (ब) अज्ञेय (सन 1943)

7.2 रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1.    भक्तिकाल को हिंदी साहित्य का ______________ कहा जाता है।

2.    'आल्हाखंड' के रचयिता ______________ हैं।

3.    सूरदास मुख्य रूप से ______________ रस के सम्राट माने जाते हैं।

4.    मैथिलीशरण गुप्त ______________ युग के प्रसिद्ध कवि हैं।

5.    'कामायनी' एक प्रसिद्ध ______________ है।

1. स्वर्ण युग           2. जगनिक       3. वात्सल्य

4. द्विवेदी युग       5. महाकाव्य

7.3 सत्य / असत्य लिखिए

1.    कबीरदास सगुण काव्यधारा के कवि थे। - वे निर्गुण धारा के थे)

2.    बिहारी सतसई में मुख्य रूप से श्रृंगार रस के दोहे हैं।

3.    'प्रियप्रवास' खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य है।

4.    आदिकाल में युद्धों का सजीव वर्णन नहीं हुआ है।

5.    सुमित्रानंदन पंत को प्रकृति का सुकुमार कवि कहा जाता है।

1. असत्य    2. सत्य                         3. सत्य                        

4. असत्य    5. सत्य

7.4 एक शब्द / एक वाक्य में उत्तर दीजिए

1.    'गागर में सागर भरना' किस रीतिकाल के कवि के लिए प्रसिद्ध है?

2.    खड़ी बोली हिंदी के प्रथम कवि कौन माने जाते हैं?

3.    ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि का नाम लिखिए।

4.    छायावाद की समय-सीमा क्या मानी गई है?

1. कवि बिहारीलाल 2. अमीर खुसरो। 

3. कबीरदास।          4. सन 1920 से 1936 ई. तक।

7.5 लघु उत्तरीय प्रश्न (2 से 3 अंक)

1.    आदिकाल की कोई दो मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
1.
आश्रयदाता राजाओं की अतिशयोक्तिपूर्ण प्रशंसा।

2. युद्धों का सजीव एवं प्रत्यक्ष वर्णन।

2.    भक्तिकाल को 'स्वर्ण युग' क्यों कहा जाता है?
भक्तिकाल में कबीर, तुलसी, सूर और जायसी जैसे महान कवियों ने अपनी कालजयी रचनाओं के माध्यम से समाज में भक्ति, सद्भाव, समरसता और लोक कल्याण का संदेश दिया। इस काल की उत्कृष्ट काव्य-रचनाओं के कारण इसे स्वर्ण युग कहा जाता है।

3.    रीतिबद्ध और रीतिमुक्त काव्यधारा में दो अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: रीतिबद्ध कवियों ने लक्षण ग्रंथों व शास्त्र के नियमों में बंधकर रचना की (जैसे- केशवदास), जबकि रीतिमुक्त कवियों ने शास्त्र के बंधनों से स्वतंत्र होकर स्वच्छंद काव्य रचा (जैसे- घनानंद)।

4.    प्रगतिवादी काव्य की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
1.
शोषितों (गरीबों/किसानों) के प्रति सहानुभूति का वर्णन। 2. शोषक (पूंजीपति) वर्ग के प्रति तीव्र आक्रोश।

7.6 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

1.    छायावाद की प्रमुख विशेषताएँ बताते हुए इसके चार प्रमुख स्तंभ कवियों और उनकी एक-एक रचना का नाम लिखिए।
विशेषताएँ: (i) प्रकृति का मानवीकरण,

(ii) व्यक्तिवादी चेतना व सौंदर्य अनुभूति,

(iii) अज्ञात सत्ता के प्रति प्रेम (रहस्यवाद),

(iv) भाषा में लाक्षणिकता व प्रतीकात्मकता।
चार स्तंभ एवं रचनाएँ:
1.
जयशंकर प्रसाद                         - कामायनी
2.
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'            - अनामिका / परिमल
3.
सुमित्रानंदन पंत            - पल्लव / चिदंबरा
4.
महादेवी वर्मा     - यामा / दीपशिखा

2.    सगुण और निर्गुण भक्तिधारा में तुलनात्मक अंतर स्पष्ट कीजिए।

निर्गुण धारा -  ईश्वर को निराकार, निर्गुण और सर्वव्यापी मानती है। इसमें मूर्तिपूजा और बाहरी आडंबरों का विरोध होता है (उदा. कबीर, जायसी)।
सगुण धारा: ईश्वर के साकार रूप (राम, कृष्ण) की रूप-लीला, अवतार और मूर्तिपूजा में विश्वास रखती है (उदा. तुलसीदास, सूरदास)।

अध्याय 8: पिछले वर्षों के प्रश्न

1.     भक्तिकाल की दो शाखाओं के नाम और उनके एक-एक कवि का नाम लिखिए। MP Board 2018

2.     रीतिकाल को 'श्रृंगार काल' क्यों कहा जाता है? रीतिकाल के दो कवियों के नाम लिखिए। MP Board 2019

3.     छायावाद की दो विशेषताएँ एवं दो कवियों के नाम तथा उनकी रचनाएँ लिखिए। MP Board 2020

4.     आदिकाल को 'वीरगाथा काल' क्यों कहा जाता है? इसके दो प्रमुख कवियों के नाम लिखिए। MP Board 2022

5.     प्रयोगवाद की दो प्रमुख प्रवृत्तियाँ लिखिए। MP 2023

6.     कबीरदास अथवा गोस्वामी तुलसीदास की काव्यगत विशेषताएँ (दो रचनाएँ, भावपक्ष, कलापक्ष, साहित्य में स्थान) लिखिए। MP Board 2024

   

प्रश्न - गद्य क्या है?

उत्तर - एक ऐसी रचना जो छंद, ताल, लय एवं तुकबंदी से मुक्त तथा विचारपूर्ण हो, उसे गद्य कहते हैं।

प्रश्न - आधुनिक हिन्दी गद्य को कितने चरणों में विभक्त किया गया है? नाम लिखिए।

अथवा

हिन्दी साहित्य में गद्य के विकास का काल-विभाजन लिखिए।)

उत्तर - आधुनिक हिन्दी गद्य को निम्न चरणों में विभक्त किया गया है:

1.    भारतेन्दु युग: सन् 1850 से 1900 ई. तक

2.    द्विवेदी युग: सन् 1900 से 1920 ई. तक

3.    शुक्ल युग: सन् 1920 से 1938 ई. तक

4.    शुक्लोत्तर युग: सन् 1938 से 1950 ई. तक

5.    समसामयिक युग: सन् 1950 से आज तक

प्रश्न - हिन्दी गद्य की प्रमुख एवं गौण विधाओं के नाम बताइये। (गद्य की कोई चार विधाओं के नाम लिखिए।)

प्रमुख विधाएँ:

1. निबन्ध,        2. नाटक,          3. कहानी,

4. एकांकी,         5. उपन्यास,      6. आलोचना।

गौण विधाएँ:

1. रेखाचित्र,       2. संस्मरण,       3. आत्मकथा,

4. जीवनी,         5. रिपोर्ताज,      6. साक्षात्कार।

प्रश्न - निबंध किसे कहते हैं ? किन्हीं दो निबंधकारों के नाम उनकी एक-एक रचना सहित लिखिये।

अथवा

बाबू गुलाबराय के अनुसार निबंध की परिभाषा लिखिए।

उत्तर - निबन्ध शब्द नि + बंध  से  बना है, जिसका अर्थ अच्छी तरह से बँधी हुई परिमार्जित रचना से है। दूसरे शब्दों में, किसी विषय का भलीभाँति प्रतिपादन करना या परीक्षण करना निबंध कहलाता है।

बाबू गुलाबराय के अनुसार: "निबन्ध उस गद्य रचना को कहते हैं जिसमें एक सीमित आकार के भीतर किसी विषय का वर्णन या प्रतिपादन एक विशेष निजीपन, स्वच्छन्दता, सौष्ठव और सजीवता तथा आवश्यक संगति और सम्बद्धता के साथ किया गया हो।"

निबंधकार एवं रचना:

(i) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र   - 'ईश्वर बड़ा विलक्षण'

(ii) बाल कृष्ण भट्ट       - 'चढ़ती उमर'

प्रश्न - कहानी की परिभाषा लिखिए।

उत्तर - प्रेमचन्द के अनुसार, "कहानी एक ऐसी रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंग या मनोभाव को प्रदर्शित करना ही कहानीकार का उद्देश्य होता है।"

प्रश्न - कहानी के तत्वों के नाम लिखिये।

उत्तर - कहानी के तत्व –

1. कथावस्तु      2. पात्र               3. देशकाल और वातावरण 4. कथोपकथन           5. भाषा-शैली     6. उद्देश्य।

प्रश्न - हिन्दी के चार प्रमुख कहानीकार एवं उनकी एक-एक कहानी का नाम लिखिए।

उत्तर -

क्र.

कहानीकार

कहानी

1

रामचन्द्र शुक्ल

ग्यारह वर्ष का समय

2

चन्द्रधर शर्मा गुलेरी

उसने कहा था

3

जयशंकर प्रसाद

पुरस्कार

4

विश्वम्भर नाथ शर्मा 'कौशिक'

ताई

प्रश्न - उपन्यास किसे कहते हैं ? किन्हीं दो उपन्यासकारों के नाम लिखिए।

उत्तर - युग की गतिशील पृष्ठभूमि पर सहज शैली में स्वाभाविक जीवन की पूर्ण झाँकी प्रस्तुत करने वाले गद्य को उपन्यास कहते हैं।

दो उपन्यासकार: 1. प्रेमचन्द, 2. अमृतलाल नागर।

प्रश्न - किन्हीं चार उपन्यासकारों के नाम बताइये तथा प्रत्येक के एक-एक उपन्यास का नाम लिखिए।

उत्तर -

क्र.

उपन्यासकार/लेखक

उपन्यास

1

वृन्दावन लाल वर्मा

मृगनयनी

2

रागेय राघव

मुर्दों का टीला

3

आचार्य चतुर सेन शास्त्री

वैशाली की नगर वधु

4

देवकी नंदन खत्री

चन्द्रकान्ता सन्तति

प्रश्न - कहानी एवं उपन्यास में कोई दो/चार अन्तर लिखिए।

उत्तर -


क्र.

कहानी

उपन्यास

1

यह जीवन की किसी एक घटना पर लिखी जाती है।

यह सम्पूर्ण जीवन को लक्ष्य बनाकर लिखा जाता है।

2

इसका आकार छोटा होता है।

इसका आकार बड़ा होता है।

3

इसमें जिज्ञासा अधिक होती है।

इसमें जिज्ञासा अपेक्षाकृत कम होती है।

4

इसमें पात्रों की संख्या कम होती है।

इसमें पात्रों की संख्या अधिक होती है।


प्रश्न - एकांकी किसे कहते हैं ? हिन्दी के चार एकांकीकारों के नाम एवं उनकी एक-एक रचना लिखिए।

उत्तर - एकांकी एक अंक का नाटक होता है, जिसमें एक ही घटना नाटकीय कौशल से कौतूहल का संचार करते हुए चरम सीमा तक पहुँचती है।

एकांकीकार एवं उनकी रचना:

1.    रामकुमार वर्मा                   - दीपदान

2.    जगदीश चन्द्र माथुर          - रीढ़ की हड्डी

3.    विष्णु प्रभाकर                    - वापसी

4.    उदयशंकर भट्ट                    - तारा

प्रश्न - एकांकी के तत्वों को लिखिए।

उत्तर - एकांकी के सात तत्व होते हैं –

1. कथा-वस्तु,    2. पात्र,              3. संवाद,

4. वातावरण,     5. भाषा-शैली,    6. उद्देश्य, 7. रंगमंचीयता।

प्रश्न - एकांकी विधा की चार विशेषताएँ लिखिए।

1.    एकांकी में एक ही कथा और कुछ ही पात्र होते हैं।

2.    यह रंगमंच पर अभिनीत किया जा सकता है।

3.    एकांकी उद्देश्यपूर्ण होता है।

4.    इसमें कोई गौण प्रसंग नहीं होता।

प्रश्न - नाटक किसे कहते हैं ?

उत्तर - नाटक एक अभिनय परक एवं दृश्य काव्य विधा है जिसमें संपूर्ण मानव जीवन का रोचक एवं कौतूहलपूर्ण वर्णन होता है।

प्रश्न - नाटक एवं एकांकी में कोई दो/चार अन्तर लिखिए।

उत्तर -


क्र.

नाटक

एकांकी

1

इसकी कथावस्तु लम्बी होती है। इसमें आधिकारिक और प्रासंगिक कथा-वस्तु साथ-साथ चलती है।

एकांकी में एक ही कथावस्तु होती है जो संक्षिप्त होती है।

2

नाटक में अनेक अंक होते हैं तथा अनेक पात्र होते हैं।

एकांकी में एक ही अंक होता है तथा पात्रों की संख्या सीमित होती है।

3

नाटक में चरित्र का क्रमशः विकास दिखाया जाता है।

एकांकी में चरित्र तत्काल प्रकट हो जाता है।

4

नाटक के कथानक की विकास प्रक्रिया धीमी रहती है।

एकांकी में कथानक आरंभ से ही चरम लक्ष्य की ओर द्रुत गति से बढ़ता है।


रचना एवं रचनाकार:

नाटक: भारतेन्दु                       - 'भारत दुर्दशा'

एकांकी: भुवनेश्वर प्रसाद          - 'कारवाँ'

प्रश्न - जीवनी को परिभाषित करते हुए दो जीवनी लेखकों एवं उनकी एक-एक जीवनी का नाम लिखिए।

उत्तर - श्री रामनाथ सुमन के अनुसार, "जीवन की घटनाओं के विवरण का नाम जीवनी है।"

लेखक एवं जीवनी:

(i) अमृतराय                 - कलम का सिपाही

(ii) सुशीला नायर          - बाबू के कारावास की कहानी

प्रश्न - आत्मकथा से क्या आशय है ?

उत्तर - आत्मकथा से आशय एक ऐसी साहित्यिक विधा से है जिसमें लेखक अपने जीवन की घटनाओं, अनुभवों, संघर्षों, सफलताओं और स्मृतियों को स्वयं ईमानदारी से लिपिबद्ध करता है। यह व्यक्ति की अपनी ही जुबानी लिखित कहानी है जो पूर्णतः सत्य, आत्मपरक और आत्म अनुभवों पर आधारित होती है।

प्रश्न - आत्मकथा और जीवनी में कोई दो अंतर लिखते हुए एक-एक रचना एवं रचनाकारों के नाम लिखिए।

उत्तर -

क्र.

आत्मकथा

जीवनी

1

आत्मकथा लेखक के द्वारा स्वयं ही लिखी जाती है।

जीवनी किसी अन्य लेखक द्वारा लिखी जाती है।

2

आत्मकथा में लेखक के स्वयं के बारे में व्यक्तिगत अनुभव रहते हैं।

जीवनी में किसी और का चरित्र-चित्रण किया जाता है।

3

रचना एवं रचनाकार: बाबू गुलाबराय - 'मेरी असफलतायें'

रचना एवं रचनाकार: अमृतराय - 'कलम का सिपाही'

प्रश्न - रिपोर्ताज क्या है ? गद्य साहित्य में इसका क्या स्थान है ? (अथवा: दो रिपोर्ताज लेखकों के नाम उनकी रचना सहित लिखिए।)

उत्तर - रिपोर्ताज एक नवीन विधा है। 'रिपोर्ताज' मूल रूप से फ्रेंच भाषा का शब्द है। रिपोर्ताज शब्द का अभिप्राय है - रोचक और भावात्मक चित्रण। अतः हाल ही में घटी घटना तथा लेखक के द्वारा प्रत्यक्ष देखी गई घटनाओं का अंतरंग अनुभव के साथ किया गया वर्णन रिपोर्ताज है। गद्य साहित्य में रिपोर्ताज का विशिष्ट स्थान है।

रिपोर्ताज लेखक एवं उनकी रचना:

(I) धर्मवीर भारती            - युद्ध यात्रा,

(ii) निर्मल वर्मा                                 - चीड़ों पर चाँदनी।

प्रश्न - संस्मरण किसे कहते हैं ? दो संस्मरण लेखकों के नाम उनकी रचना सहित लिखिए।

उत्तर - जीवन की मार्मिक अनुभूतियों को स्मृति के आधार पर प्रभावशाली भाषा में चित्रित करना ही संस्मरण है।

संस्मरण लेखक एवं उनकी रचना:

(i) शिवरानी जी की      - 'प्रेमचंद घर में',

(ii) उपेन्द्रनाथ अश्क      - 'ज्यादा अपनी कम पराई'।

प्रश्न - पत्र-साहित्य किसे कहते हैं ? किन्हीं दो पत्र-साहित्यकार एवं उनकी एक-एक कृति लिखिए।

उत्तर - किसी भी व्यक्ति/साहित्यकार द्वारा लिखे गए साहित्यिक दृष्टि से मूल्यवान पत्रों को पत्र-साहित्य कहा जाता है।

पत्र-साहित्यकार एवं उनकी कृति:

·         पं. नेहरू                 - पिता के पत्र पुत्री के नाम

·         बालमुकुन्द गुप्त    - शिव शम्भु के चिट्ठे

प्रश्न - रेखाचित्र किसे कहते हैं ? इसकी दो विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर - किसी व्यक्ति, वस्तु या दृश्य का इस प्रकार किया गया वर्णन कि आँखों के आगे उस व्यक्ति, वस्तु या दृश्य का चित्र खिंचता चला जाए, तो इसे रेखाचित्र कहते हैं।

विशेषताएँ:

1.    इसमें किसी व्यक्ति, वस्तु या दृश्य का वर्णन होता है।

2.    इसमें लेखक रागोत्प्रेरक शब्दावली का प्रयोग करता है।

प्रश्न - हिन्दी के दो प्रमुख रेखाचित्र लेखकों के नाम एवं उनकी एक-एक रचना लिखिए।

उत्तर - रेखाचित्र लेखक एवं उनकी रचना:

(i) बनारसी दास चतुर्वेदी - औरंगजेब,

(ii) महादेवी वर्मा           - अतीत के चल चित्र।

प्रश्न - संस्मरण एवं रेखाचित्र में अंतर लिखिए।

उत्तर -

क्र.

संस्मरण

रेखाचित्र

1

संस्मरण अमिधामूलक होता है।

रेखाचित्र सांकेतिक और व्यंजक होता है।

2

संस्मरण विवरण प्रधान होते हैं।

रेखाचित्र सजीव होते हैं।

2. हिन्दी काव्य की प्रमुख प्रवृत्तियाँ

प्रश्न - पद्य साहित्य से आप क्या समझते हैं?

उत्तर - पद्य साहित्य से आशय काव्य साहित्य की उस विधा से होता है, जिसमें काव्य, कविताएँ, गीत, गजल, छंद, दोहे आदि की रचना की जाती है। हिन्दी साहित्य के इतिहास में इसका प्रारम्भ 1400 ई.पू. माना जाता है।

प्रश्न - हिन्दी कविता के इतिहास के काल विभाजन को बताइये।

उत्तर - आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी कविता साहित्य के इतिहास को निम्नलिखित चार कालों में विभाजित किया है –

1. आदिकाल                 (वीरगाथा काल)

2. पूर्व मध्य काल         (भक्ति काल)

3. उत्तर मध्य काल     (रीति काल)

4. आधुनिक काल।

प्रश्न - रीतिकाल की समय सीमा बताइए।

उत्तर - रीतिकाल का समय सं. 1700 से 1900 तक है।

प्रश्न - रीतिकाल को श्रृंगार काल क्यों कहा जाता है? रीतिकाल के कवियों के नाम एवं उनकी एक-एक रचना लिखिए।

उत्तर - रीतिकाल में श्रृंगार सम्बन्धी रचनाओं की अधिकता रही, इस कारण इसे श्रृंगार काल कहा जाता है।

प्रमुख कवि एवं रचनाएँ:

1.    बिहारी        - बिहारी सतसई

2.    पद्माकर      - गंगालहरी

3.    सेनापति     - कवित्त रत्नाकर

4.      केशवदास   - रामचन्द्रिका

प्रश्न - रीतिकालीन काव्य को कितनी धाराओं में विभक्त किया गया है ?

उत्तर - रीतिकालीन काव्य को तीन धाराओं में विभक्त किया गया है - 1. रीतिबद्ध काव्य, 2. रीतिमुक्त काव्य, 3. रीतिसिद्ध काव्य।

प्रश्न - रीतिकाल की कोई दो विशेषताएँ (प्रवृत्तियाँ) लिखिए।

उत्तर - विशेषताएँ (प्रवृत्तियाँ):

1.    राज्याश्रित कवि: रीतिकाल के अधिकांश कवि राज दरबारों में रहते थे। अपनी रचनाओं से आश्रयदाताओं का मनोरंजन करना ही इनका काम था।

2.    श्रृंगार रस की प्रधानता: इस काल के कवि आश्रयदाताओं से आदर पाने के लिए श्रृंगारमयी काव्य रचनाओं में लीन थे। संयोग-वियोग दोनों पक्षों का विस्तार से वर्णन किया है।

प्रश्न - आधुनिक काल की कविता के इतिहास को कितने कालों में विभाजित किया गया है ? प्रत्येक काल के एक-एक कवि का नाम लिखिए।

उत्तर - आधुनिक काल की कविता के इतिहास को निम्न कालों में बाँटा गया है:

·         भारतेन्दु युग          - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

·         द्विवेदी युग           - महावीर प्रसाद द्विवेदी

·         छायावाद                - जयशंकर प्रसाद

·         प्रगतिवाद               - शिवमंगल सिंह 'सुमन'

·         प्रयोगवाद               - गजानन माधव मुक्तिबोध

·         नई कविता                         - धर्मवीर भारती

प्रश्न - आधुनिक काल की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर - आधुनिक काल की विशेषताएँ:

1.    गद्य विधा का विकास तथा साहित्य रचना में खड़ी बोली का प्रयोग।

2.    आदर्शवादी एवं यथार्थवादी रचना।

प्रश्न - आधुनिक काल को गद्यकाल क्यों कहा जाता है ?

उत्तर - आधुनिक काल में गद्य की विविध विधाओं पर साहित्य लिखा गया है। इन विधाओं में नाटक, उपन्यास, कहानी, एकांकी, निबन्ध, आलोचना, संस्मरण आदि प्रमुख हैं, इसलिए इसे गद्यकाल कहा जाता है।

प्रश्न - प्रगतिवाद की विशेषताएँ बताते हुए प्रमुख कवियों के नाम तथा उनकी एक-एक रचना लिखिए।

उत्तर - प्रगतिवाद की विशेषताएँ:

1.    इस काव्य में जीवन के प्रति यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाया गया है।

2.    इस काव्य में शोषक वर्ग के प्रति आक्रोश व्यक्त किया गया है।

3.    इस काव्य में शोषित वर्ग के प्रति सहानुभूति प्रकट की गई है।

4.    इस काव्य में कविता में बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया गया है।

क्र.

कवि

रचना

1

सुमित्रानन्दन पन्त

युगवाणी

2

सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'

कुकुरमुत्ता

3

डॉ. शिवमंगल सिंह 'सुमन'

जीवन के गान

प्रश्न - प्रयोगवादी काव्य किसे कहते हैं ? प्रयोगवाद की चार विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर - वह कविता जिसमें प्रयोग के नाम पर भाव, विचार, प्रक्रिया, अलंकार आदि सबमें परिवर्तन किया जाता है, उसे प्रयोगवादी काव्य कहते हैं। इस काव्य में छंद और प्रस्तुत योजना नूतन रहती है।

प्रयोगवादी काव्य की विशेषताएँ:

1.    प्रयोगवादी कवियों ने पुराने एवं प्रचलित उपमानों के स्थान पर नवीन उपमानों का प्रयोग किया है। वे मानते हैं कि काव्य के पुराने उपमान अब बासी पड़ गए हैं।

2.    जीवन के वास्तविक रूप का यथार्थ चित्रण।

3.    भाव, विचार, प्रतीक, छन्द, अलंकार में नवीन प्रयोग।

4.    नई-नई भाषाओं का मिश्रित रूप।

प्रश्न - चार प्रयोगवादी कवि एवं उनकी रचना का नाम लिखिये।

उत्तर -

क्र.

कवि

रचना

1

गजानन माधव 'मुक्तिबोध'

चाँद का मुँह टेढ़ा है

2

अज्ञेय

हरी घास पर क्षण भर

3

नरेश मेहता

संशय की एक रात

4

धर्मवीर भारती

अंधायुग

प्रश्न - नई कविता से क्या आशय है ? इसकी प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर - आशय: नई कविता स्वतंत्रता के बाद लिखी गई वह कविता है जिसमें नवीन भाव बोध, नए मूल्य तथा नया शिल्प विधान है।

विशेषताएँ:

1.    नूतन शिल्प विधान या भाव बोध एवं नयी प्रभाव सामर्थ्य का इस काव्य में प्राधान्य है।

2.    यह कविता साधारण मानव की एक क्षण की अनुभूतियों को सशक्त करने की अभिव्यक्ति देती है।

3.    नई कविता जीवन के प्रत्येक क्षण को सत्य मानती है।

4.    नये बिम्ब, नये प्रतीक विधान, नए छंद विधान एवं नवीन सौन्दर्य बोध का इस काव्य में आविर्भाव हुआ।

प्रश्न - नई कविता के प्रमुख चार कवियों के नाम उनकी रचनाओं सहित लिखिए।

उत्तर –

 

 

क्र.

कवि

रचना

1

भवानी प्रसाद मिश्र

गीत फरोश

2

जगदीश गुप्त

नाव के पाँव

3

दुष्यन्त कुमार

सूर्य का स्वागत

4

श्रीकान्त वर्मा

भटका मेघ

 1. रिक्त स्थानों विकल्प का चयन कर कीजिए:

1.    लय, ताल, छन्द आदि से मुक्त रचना गद्य कहलाती है।

2.    प्रेमचंद कथाकार हैं।

3.    एकांकी में एक अंक होता है।

4.    जीवनी गद्य की एक गौण विधा है।

5.    रिपोर्ताज मूल रूप से फ्रेंच भाषा का शब्द है।

6.    आचार्य शुक्ल के अनुसार रीतिकाल की समय सीमा सं. 1700-1900 मानी गई है।

7.    कवि सेनापति रीतिकाल के कवि माने गये हैं।

8.    बिहारी सतसई की रचना रीतिकाल में हुई।

9.    लक्षण ग्रन्थों की रचना सर्वाधिक रीतिकाल में हुई है।

10.  रीति सिद्ध कवि बिहारी हैं।

11.  रीतिकालीन रचनाओं का प्रधान विषय श्रृंगार वर्णन है।

12.  आधुनिक हिन्दी कविता का प्रारंभ संवत् 1900 से माना जाता है।

13.  इनमें से महादेवी प्रगतिवादी कवि नहीं हैं।

14.  रामधारी सिंह 'दिनकर' प्रयोगवादी कवि नहीं हैं।

15.  जीवनी महापुरुष की लिखी जाती है।

16.  आत्मकथा में लेखक अपने ही जीवन वृत्त को प्रस्तुत करता है।

3.      प्रश्नों के उत्तर एक शब्द अथवा एक वाक्य में दीजिए:

·         गद्य की तीन गौण विधाएँ लिखिए।
उत्तर - रेखाचित्र, जीवनी, आत्मकथा।

·         प्रेमचन्द की किन्हीं दो कहानियों के नाम लिखिए।
उत्तर - (i) पंच परमेश्वर, (ii) पूस की रात।

·         हिन्दी गद्य की सर्वाधिक लोकप्रिय विधा कौन सी है ?
उत्तर - कहानी।

·         किन्हीं दो कहानीकारों के नाम लिखकर उनकी एक-एक कहानी का नाम लिखिए।
(i) जयशंकर प्रसाद               - पुरस्कार,

(ii) चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी'       - उसने कहा था।

·         हिन्दी का प्रथम एकांकी होने का गौरव किस एकांकी को प्राप्त है? उसका नाम लेखक के नाम सहित लिखिए।
उत्तर - 'एक घूँट' - जयशंकर प्रसाद।

·         दो नाटककारों के नाम तथा उनकी एक-एक रचना का नाम लिखिए।
उत्तर - (i) प्रताप नारायण मिश्र - 'भारत दुर्दशा', (ii) जगदीश चन्द्र माथुर - 'कोणार्क'।

·         अंधेर नगरी नाटक के लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र।

·         दो आंचलिक उपन्यासकारों के नाम लिखिए।
उत्तर - (i) फणीश्वरनाथ रेणु, (ii) अमृतलाल नागर।

·         हिन्दी में उपन्यास-सम्राट किसे कहते हैं ? उनके किसी एक प्रमुख उपन्यास का नाम लिखिए।
उत्तर - प्रेमचन्द जी, गोदान।

·         जीवनी किसकी लिखी जाती है ?
उत्तर - किसी महापुरुष या विख्यात व्यक्ति की।

·         आधुनिक काल के दो कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर - वीरेन्द्र मिश्र, सोम ठाकुर।

·         किसी एक प्रगतिवादी आलोचक का नाम लिखिए।
उत्तर - डॉ. रामविलास शर्मा।

·         प्रयोगवाद के जनक किसे कहा जाता है?
उत्तर - अज्ञेय को।

·         कामायनी किसकी रचना है?
उत्तर - जयशंकर प्रसाद।

4. कथनों के लिए सत्य/असत्य का चयन कीजिए:

1.    नाटक गद्य की विधा नहीं है। - असत्य

2.    उपन्यास में कई कथाओं का समावेश होता है। - सत्य

3.    यदि गद्य कवियों की कसौटी है तो निबंध गद्य की कसौटी है। - सत्य

4.    नाटक में एक अंक होता है। - असत्य

5.    रेखाचित्र को शब्दचित्र भी कहते हैं। - सत्य

6.    केशवदास रीतिकालीन कवि हैं। - सत्य

7.    हिन्दी का प्रथम उपन्यास 'परीक्षा-गुरु' को माना गया है। - सत्य

8.    कहानी के छः तत्व होते हैं। - सत्य

9.    संस्मरण में कल्पना तत्व की प्रधानता होती है। - असत्य

10.  गद्य की सबसे लोकप्रिय विधा एकांकी है। - असत्य

5. सही विकल्प चुनिए:

1.     गद्य का प्रारम्भिक रूप था -            (ब) बोलचाल का रूप

2.     गद्य की विधा नहीं है -                 (अ) महाकाव्य

3.     उपन्यास सम्राट हैं -                       (ब) प्रेमचन्द

4.     'यदि गद्य कवियों की कसौटी है तो निबंध गद्य की कसौटी है' कथन है - (द) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का

5.     'आधुनिक काल में गद्य का अविर्भाव सबसे प्रधान सहित्यिक घटना है' उक्त कथन है - (अ) रामचंद्र शुक्ल का

6.     फणीश्वरनाथ रेणु कृत मैला आँचल है - (ब) उपन्यास

7.     हिन्दी कथा साहित्य में सर्वाधिक प्रसिद्ध कहानीकार हैं - (ब) प्रेमचन्द

8.     प्रेमचन्द का सबसे प्रसिद्ध और अन्तिम उपन्यास है - (ब) गोदान

9.     रीतिकाल को काव्य की दृष्टि से बाँटा गया है - (ब) तीन भागों में

10.  आधुनिक काल का आरम्भ होता है - (अ) संवत् 1900 से

11.  प्रगतिवादी कवि हैं - (ब) सुमित्रानंदन 'पंत'

12.  प्रयोगवाद का आंरभ माना जाता है - (अ) सन् 1943 से

13.  प्रयोगवाद के जनक माने जाते हैं - (स) अज्ञेय

14.  छायावाद के आधार स्तंभ कवि नहीं हैं - (द) सूरदास

15.  भक्तिकाल की समय सीमा है - (ब) संवत् 1375 से संवत् 1700 तक

16.  बिहारी किस काव्यधारा के कवि हैं ? - (अ) रीतिसिद्ध काव्यधारा