June 27, 2020

ताऊ

*ताऊ* 

*एक बहुत बड़ा विशाल पेड़ था। उस पर बीसीयों हंस रहते थे। उनमें एक बहुत सयाना हंस था, बुद्धिमान और बहुत दूरदर्शी। सब उसका आदर करते ‘ताऊ’ कहकर बुलाते थे। एक दिन उसने एक नन्ही-सी बेल को पेड़ के तने पर बहुत नीचे लिपटते पाया। ताऊ ने दूसरे हंसों को बुलाकर कहा, देखो, इस बेल को नष्ट कर दो। एक दिन यह बेल हम सबको मौत के मुंह में ले जाएगी। एक युवा हंस हंसते हुए बोला, ताऊ, यह छोटी-सी बेल हमें कैसे मौत के मुंह में ले जाएगी? सयाने हंस ने समझाया, आज यह तुम्हें छोटी-सी लग रही है। धीरे-धीरे यह पेड़ के सारे तने को लपेटा मारकर ऊपर तक आएगी। फिर बेल का तना मोटा होने लगेगा और पेड़ से चिपक जाएगा, तब नीचे से ऊपर तक पेड़ पर चढ़ने के लिए सीढ़ी बन जाएगी। कोई भी शिकारी सीढ़ी के सहारे चढ़कर हम तक पहुंच जाएगा और हम मारे जाएंगे। दूसरे हंस को यकीन न आया, एक छोटी-सी बेल कैसे सीढ़ी बनेगी? तीसरा हंस बोला, ताऊ, तू तो एक छोटी-सी बेल को खींचकर ज्यादा ही लंबा कर रहा है। एक हंस बड़बड़ाया, यह ताऊ अपनी अक्ल का रौब डालने के लिए अंट-शंट कहानी बना रहा है। इस प्रकार किसी दूसरे हंस ने ताऊ की बात को गंभीरता से नहीं लिया। इतनी दूर तक देख पाने की उनमें अक्ल कहां थी? समय बीतता रहा। बेल लिपटते-लिपटते ऊपर शाखाओं तक पहुंच गई। बेल का तना मोटा होना शुरू हुआ और सचमुच ही पेड़ के तने पर सीढ़ी बन गई। जिस पर आसानी से चढ़ा जा सकता था। सबको ताऊ की बात की सच्चाई सामने नजर आने लगी। पर अब कुछ नहीं किया जा सकता था क्योंकि बेल इतनी मजबूत हो गई थी कि उसे नष्ट करना हंसों के बस की बात नहीं थी। एक दिन जब सब हंस दाना चुगने बाहर गए हुए थे तब एक बहेलिया उधर आ निकला। पेड़ पर बनी सीढ़ी को देखते ही उसने पेड़ पर चढ़कर जाल बिछाया और चला गया। सांझ को सारे हंस लौट आए और जब पेड़ से उतरे तो बहेलिए के जाल में बुरी तरह फंस गए। जब वे जाल में फंस गए और फड़फड़ाने लगे, तब उन्हें ताऊ की बुद्धिमानी और दूरदर्शिता का पता लगा। सब ताऊ की बात न मानने के लिए लज्जित थे और अपने आपको कोस रहे थे। ताऊ सबसे रुष्ट था और चुप बैठा था। एक हंस ने हिम्मत करके कहा, ताऊ, हम मूर्ख हैं, लेकिन अब हमसे मुंह मत फेरो। दूसरा हंस बोला, इस संकट से निकालने की तरकीब तू ही हमें बता सकता हैं। आगे हम तेरी कोई बात नहीं टालेंगे। सभी हंसों ने हामी भरी तब ताऊ ने उन्हें बताया, मेरी बात ध्यान से सुनो। सुबह जब बहेलिया आएगा, तब मुर्दा होने का नाटक करना। बहेलिया तुम्हें मुर्दा समझकर जाल से निकालकर जमीन पर रखता जाएगा। वहां भी मरे समान पड़े रहना। जैसे ही वह अन्तिम हंस को नीचे रखेगा, मैं सीटी बजाऊंगा। मेरी सीटी सुनते ही सब उड़ जाना। सुबह बहेलिया आया। हंसों ने वैसा ही किया, जैसा ताऊ ने समझाया था। सचमुच बहेलिया हंसों को मुर्दा समझकर जमीन पर पटकता गया। सीटी की आवाज के साथ ही सारे हंस उड़ गए। बहेलिया अवाक होकर देखता रह गया।*
 *वरिष्ठजन घर की धरोहर हैं ।वे हमारे संरक्षक एवं मार्गदर्शक है। जिस तरह आंगन में पीपल का वृक्ष फल नहीं देता, परंतु छाया अवश्य देता है।उसी तरह हमारे घर के बुजुर्ग हमे भले ही आर्थिक रूप से सहयोग नहीं कर पाते है, परंतु उनसे हमे संस्कार एवं उनके अनुभव से कई बाते सीखने को मिलती है,*
 *बड़े-बुजुर्ग परिवार की शान है वो कोई कूड़ा-करकट नहीं हैं, जिसे कि परिवार से बाहर निकाल फेंका जाए। अपने प्यार से रिश्तों को सींचने वाले इन बुजुगों को भी बच्चों से प्यार व सम्मान चाहिए अपमान व तिरस्कार नहीं। अपने बच्चों की खातिर अपना जीवन दाँव पर लगा चुके इन बुजुर्गों को अब अपनों के प्यार की जरूरत है। यदि हम इन्हें सम्मान व अपने परिवार में स्थान देंगे तो लाभान्वित ही होंगे । ऐसा न करने पर हम अपने हाथों अपने बच्चों को उस प्यार, संस्कार, आशीर्वाद व स्पर्श से वंचित कर रहे हैं, जो उनकी जिंदगी को सँवार सकता है। याद रखिए किराए से भले ही प्यार मिल सकता है परंतु संस्कार, आशीर्वाद व दुआएँ नहीं। यह सब तो हमें अपने बुजुर्गो से ही मिलती  है।*

🙏🏻🙏🏻

पितृदिवश है यानी पिताजी का दिन* *(FATHER'S DAY)*

****

आज मेने अपने *पिताजी* को एक उपहार दिया और उनके पैर छुए .....
पिताजी बोले: पैर छूना तो तेरा नित्यकर्म है पर आज ये *उपहार* क्यों ?
मैंने बड़े विनम्रतापूर्वक, खुश होकर कहा :- क्योंकि पिताजी आज *पितृदिवश है यानी पिताजी का दिन* *(FATHER'S DAY)*

  फिर क्या था

पिताजी ने जूता उतारा और बे मौसम वारिश कर दी 
दे दना दन........
*कितने जूते मुझमे मारे याद नही*
और बोले :- अभी में जिंदा हूँ, और तू मेरा श्राद निकाल रहा है! अरे मूर्ख हमारे यहाँ जिस दिन पिताजी की मृत्यु होती है उसे हर साल *पिताजी का दिन* कहा जाता है !

जब उनका गुस्सा ठंडा हुआ तब मैंने पूछा कि हुआ क्या ?
मेरे पिताजी बोले :- ये उन लोगो के लिए है जो पूरे बर्ष अपने माता पिता की कोई परवाह नही करते,न उनकी देखभाल करते, वो किस हाल में है ? यह जानने के लिए भी उनके पास समय नही है !
365 दिन में से 1 दिन पिता को और 1 दिन माँ को याद किया और इतिश्री कर ली ! वाकी 363 दिन उनका क्या हाल है ?
इससे कोई मतलब नही ।

हमारे हिंदुस्तान में 365 दिन ही *माता पिता* के होते है ! हमारी संस्कृति में माँ बाप के आशीर्वाद से ही दिन की शुरुआत होती है !!

और आखिर में बोले :- *ये गलत शुरुआत तो तूने शुरू कर दी है इसका परिणाम तेरे बेटा बेटी या उनके बच्चे भोगेंगे ।* जब माँ बाप को सिर्फ 1 दिन ही याद किया जाएगा और इसे गलत भी नही माना जायेगा ! *क्योकि तब तक ये परम्परा या रीति रिवाज का रूप ले चुका होगा !*

*उनकी ये बात मेरी समझ मे तो आ गयी और आपकी....?*

पुण्यों का मोल

*पुण्यों का मोल*

एक व्यापारी जितना अमीर था उतना ही दान-पुण्य करने वाला, वह सदैव यज्ञ-पूजा आदि कराता रह'ता था।

एक यज्ञ में उसने अपना सबकुछ दान कर दिया। अब उसके पास परिवार चलाने लायक भी पैसे नहीं बचे थे।

व्यापारी की पत्नी ने सुझाव दिया कि पड़ोस के नगर में एक बड़े सेठ रहते हैं। वह दूसरों के पुण्य खरीदते हैं।

आप उनके पास जाइए और अपने कुछ पुण्य बेचकर थोड़े पैसे ले आइए, जिससे फिर से काम-धंधा शुरू हो सके।

पुण्य बेचने की व्यापारी की बिलकुल इच्छा नहीं थी, लेकिन पत्नी के दबाव और बच्चों की चिंता में वह पुण्य बेचने को तैयार हुआ। पत्नी ने रास्ते में खाने के लिए चार रोटियां बनाकर दे दीं।

व्यापारी चलता-चलता उस नगर के पास पहुंचा जहां पुण्य के खरीदार सेठ रहते थे। उसे भूख लगी थी।

नगर में प्रवेश करने से पहले उसने सोचा भोजन कर लिया जाए। उसने जैसे ही रोटियां निकालीं एक कुतिया तुरंत के जन्मे अपने तीन बच्चों के साथ आ खड़ी हुई।

कुतिया ने बच्चे जंगल में जन्म दिए थे। बारिश के दिन थे और बच्चे छोटे थे, इसलिए वह उन्हें छोड़कर नगर में नहीं जा सकती थी। 
व्यापारी को दया आ गई। उसने एक रोटी कुतिया को खाने के लिए दे दिया।
कुतिया पलक झपकते रोटी चट कर गई लेकिन वह अब भी भूख से हांफ रही थी।

व्यापारी ने दूसरी रोटी, फिर तीसरी और फिर चारो रोटियां कुतिया को खिला दीं। खुद केवल पानी पीकर सेठ के पास पहुंचा।

व्यापारी ने सेठ से कहा कि वह अपना पुण्य बेचने आया है। सेठ व्यस्त था। उसने कहा कि शाम को आओ।

दोपहर में सेठ भोजन के लिए घर गया और उसने अपनी पत्नी को बताया कि एक व्यापारी अपने पुण्य बेचने आया है। उसका कौन सा पुण्य खरीदूं।

सेठ की पत्नी बहुत पतिव्रता और सिद्ध थी। उसने ध्यान लगाकर देख लिया कि आज व्यापारी ने कुतिया को रोटी खिलाई है।

उसने अपने पति से कहा कि उसका आज का पुण्य खरीदना जो उसने एक जानवर को रोटी खिलाकर कमाया है। वह उसका अब तक का सर्वश्रेष्ठ पुण्य है।

व्यापारी शाम को फिर अपना पुण्य बेचने आया। सेठ ने कहा- आज आपने जो यज्ञ किया है मैं उसका पुण्य लेना चाहता हूं।
व्यापारी हंसने लगा। उसने कहा कि अगर मेरे पास यज्ञ के लिए पैसे होते तो क्या मैं आपके पास पुण्य बेचने आता!

सेठ ने कहा कि आज आपने किसी भूखे जानवर को भोजन कराकर उसके और उसके बच्चों के प्राणों की रक्षा की है। मुझे वही पुण्य चाहिए।
व्यापारी वह पुण्य बेचने को तैयार हुआ। सेठ ने कहा कि उस पुण्य के बदले वह व्यापारी को चार रोटियों के वजन के बराबर हीरे-मोती देगा।

चार रोटियां बनाई गईं और उसे तराजू के एक पलड़े में रखा गया। दूसरे पलड़े में सेठ ने एक पोटली में भरकर हीरे-जवाहरात रखे।
पलड़ा हिला तक नहीं। दूसरी पोटली मंगाई गई। फिर भी पलड़ा नहीं हिला।

कई पोटलियों के रखने पर भी जब पलड़ा नहीं हिला तो व्यापारी ने कहा- सेठजी, मैंने विचार बदल दिया है. मैं अब पुण्य नहीं बेचना चाहता।

व्यापारी खाली हाथ अपने घर की ओर चल पड़ा। उसे डर हुआ कि कहीं घर में घुसते ही पत्नी के साथ कलह न शुरू हो जाए।

जहां उसने कुतिया को रोटियां डाली थी, वहां से कुछ कंकड़-पत्थर उठाए और साथ में रखकर गांठ बांध दी।

घर पहुंचने पर पत्नी ने पूछा कि पुण्य बेचकर कितने पैसे मिले तो उसने थैली दिखाई और कहा इसे भोजन के बाद रात को ही खोलेंगे। इसके बाद गांव में कुछ उधार मांगने चला गया।

इधर उसकी पत्नी ने जबसे थैली देखी थी उसे सब्र नहीं हो रहा था। पति के जाते ही उसने थैली खोली।
उसकी आंखे फटी रह गईं। थैली हीरे-जवाहरातों से भरी थी।

व्यापारी घर लौटा तो उसकी पत्नी ने पूछा कि पुण्यों का इतना अच्छा मोल किसने दिया ? इतने हीरे-जवाहरात कहां से आए ??
व्यापारी को अंदेशा हुआ कि पत्नी सारा भेद जानकर ताने तो नहीं मार रही लेकिन, उसके चेहरे की चमक से ऐसा लग नहीं रहा था।

व्यापारी ने कहा- दिखाओ कहां हैं हीरे-जवाहरात। पत्नी ने लाकर पोटली उसके सामने उलट दी। उसमें से बेशकीमती रत्न गिरे। व्यापारी हैरान रह गया।
फिर उसने पत्नी को सारी बात बता दी। पत्नी को पछतावा हुआ कि उसने अपने पति को विपत्ति में पुण्य बेचने को विवश किया।

दोनों ने तय किया कि वह इसमें से कुछ अंश निकालकर व्यापार शुरू करेंगे। व्यापार से प्राप्त धन को इसमें मिलाकर जनकल्याण में लगा देंगे।

ईश्वर आपकी परीक्षा लेता है। परीक्षा में वह सबसे ज्यादा आपके उसी गुण को परखता है जिस पर आपको गर्व हो।
अगर आप परीक्षा में खरे उतर जाते हैं तो ईश्वर वह गुण आपमें हमेशा के लिए वरदान स्वरूप दे देते हैं।

अगर परीक्षा में उतीर्ण न हुए तो ईश्वर उस गुण के लिए योग्य किसी अन्य व्यक्ति की तलाश में लग जाते हैं।

इसलिए विपत्तिकाल में भी भगवान पर भरोसा रखकर सही राह चलनी चाहिए। आपके कंकड़-पत्थर भी अनमोल रत्न हो सकते हैं।

   *न डर रे मन दुनिया से*
   *यहाँ किसी के चाहने से नहीं*
   *किसी का बुरा होता है,*
   *मिलता है वही, जो हमने बोया होता है,*
   *कर पुकार उस प्रभु के आगे.. क्योकि सब कुछ उसी के बस में होता है।।*
        🚩🚩🚩🙏🏻🙏🏻🙏🏻

भगवान को भेंट

*भगवान को भेंट-*

पुरानी बात है एक सेठ के पास एक व्यक्ति काम करता था। सेठ उस व्यक्ति पर बहुत विश्वास करता था। जो भी जरुरी काम हो सेठ हमेशा उसी व्यक्ति से कहता था। वो व्यक्ति भगवान का बहुत बड़ा भक्त था l वह सदा भगवान के चिंतन भजन कीर्तन स्मरण सत्संग आदि का लाभ लेता रहता था।

एक दिन उस ने सेठ से श्री जगन्नाथ धाम यात्रा करने के लिए कुछ दिन की छुट्टी मांगी सेठ ने उसे छुट्टी देते हुए कहा- *"भाई ! मैं तो हूं संसारी आदमी हमेशा व्यापार के काम में व्यस्त रहता हूं जिसके कारण कभी तीर्थ गमन का लाभ नहीं ले पाता। तुम जा ही रहे हो तो यह लो 100 रुपए मेरी ओर से श्री जगन्नाथ प्रभु के चरणों में समर्पित कर देना।"* 

भक्त सेठ से सौ रुपए लेकर श्री जगन्नाथ धाम यात्रा पर निकल गया।

कई दिन की पैदल यात्रा करने के बाद वह श्री जगन्नाथ पुरी पहुंचा। मंदिर की ओर प्रस्थान करते समय उसने रास्ते में देखा कि बहुत सारे संत, भक्त जन, वैष्णव जन, हरि नाम संकीर्तन बड़ी मस्ती में कर रहे हैं। सभी की आंखों से अश्रु धारा बह रही है। जोर-जोर से हरि बोल, हरि बोल गूंज रहा है। संकीर्तन में बहुत आनंद आ रहा था। भक्त भी वहीं रुक कर हरिनाम संकीर्तन का आनंद लेने लगा। 

फिर उसने देखा कि संकीर्तन करने वाले भक्तजन इतनी देर से संकीर्तन करने के कारण उनके होंठ सूखे हुए हैं वह दिखने में कुछ भूखे भी प्रतीत हो रहे हैं। उसने सोचा क्यों ना सेठ के सौ रुपए से इन भक्तों को भोजन करा दूँ। 

उसने उन सभी को उन सौ रुपए में से भोजन की व्यवस्था कर दी। सबको भोजन कराने में उसे कुल 98 रुपए खर्च करने पड़े। उसके पास दो रुपए बच गए उसने सोचा चलो अच्छा हुआ दो रुपए जगन्नाथ जी के चरणों में सेठ के नाम से चढ़ा दूंगा l

जब सेठ पूछेगा तो मैं कहूंगा पैसे चढ़ा दिए। सेठ यह तो नहीं कहेगा 100 रुपए चढ़ाए। सेठ पूछेगा पैसे चढ़ा दिए मैं बोल दूंगा कि, पैसे चढ़ा दिए। झूठ भी नहीं होगा और काम भी हो जाएगा।

भक्त ने श्री जगन्नाथ जी के दर्शनों के लिए मंदिर में प्रवेश किया श्री जगन्नाथ जी की छवि को निहारते हुए अपने हृदय में उनको विराजमान कराया। अंत में उसने सेठ के दो रुपए श्री जगन्नाथ जी के चरणो में चढ़ा दिए। और बोला यह दो रुपए सेठ ने भेजे हैं।

उसी रात सेठ के पास स्वप्न में श्री जगन्नाथ जी आए आशीर्वाद दिया और बोले सेठ तुम्हारे 98 रुपए मुझे मिल गए हैं यह कहकर श्री जगन्नाथ जी अंतर्ध्यान हो गए। सेठ जाग गया सोचने लगा मेरा नौकर तौ बड़ा ईमानदार है, पर अचानक उसे क्या जरुरत पड़ गई थी उसने दो रुपए भगवान को कम चढ़ाए ? उसने दो रुपए का क्या खा लिया ? उसे ऐसी क्या जरूरत पड़ी ? ऐसा विचार सेठ करता रहा।

काफी दिन बीतने के बाद भक्त वापस आया और सेठ के पास पहुंचा। सेठ ने कहा कि मेरे पैसे जगन्नाथ जी को चढ़ा दिए थे  ? भक्त बोला हां मैंने पैसे चढ़ा दिए। सेठ ने कहा पर तुमने 98 रुपए क्यों चढ़ाए दो रुपए किस काम में प्रयोग किए। 

तब भक्त ने सारी बात बताई की उसने 98 रुपए से संतो को भोजन करा दिया था। और ठाकुरजी को सिर्फ दो रुपए चढ़ाये थे। सेठ सारी बात समझ गया व बड़ा खुश हुआ तथा भक्त के चरणों में गिर पड़ा और बोला- *"आप धन्य हो आपकी वजह से मुझे श्री जगन्नाथ जी के दर्शन यहीं बैठे-बैठे हो गए 

सन्तमत विचार-  *भगवान को आपके धन की कोई आवश्यकता नहीं है। भगवान को वह 98 रुपए स्वीकार है जो जीव मात्र की सेवा में खर्च किए गए और उस दो रुपए का कोई महत्व नहीं जो उनके चरणों में नगद चढ़ाए गए...सच्चे मन से किसी जरूरतमंद की जरूरत को पूरा कर देना भगवान को भेंट चढ़ाने से भी कहीं ज्यादा अच्छा होता है।*

*सुप्रभात। आज का दिन आपके लिए शुभ एवं मंगलमय हो।*

कटी प्याज के नुकसान"' विज्ञानं"

*🙏🌹Very Very Important Msg Please Read 🌹🙏* 


        *कटी प्याज के नुकसान*
                जरूर पढ़ें

  मानो या ना मानो यह पूर्णतया सत्य है.
देर से कटी प्याज का कभी उपयोग ना करें.
    प्याज हमेशा तुरंत काट कर खाएं.
कटी रखी प्याज दस मिनिट में 
अपने आस पास के सारे कीटाणु 
     अवशोसित कर लेती है.

यह वेज्ञानिक तौर पर सिद्ध हो चुका है.

जब भी किसी मौसमी बीमारी का प्रकोप फैले 
       घर में सुबह शाम हर कमरें में 
            प्याज काट कर रख दें.
            बाद में उसे फैंक दें. 
             सुरक्षित बने रहेंगें.

*प्याज के संबध में महत्वपूर्ण जानकारी.*

सन 1919 में फ्लू से चार करोड़ लोग 
मारे जा चुके थे, तब एक डॉक्टर 
कई किसानों से उनके घर इस प्रत्याशा में 
मिला कि वो कैसे इन किसानों को 
इस महामारी से लड़ने में 
सहायता कर सकता है.
बहुत सारे किसान इस फ्लू से ग्रसित थे 
और उनमें से बहुत से मारे जा चुके थे.

डॉक्टर जब इनमें से एक किसान के 
संपर्क में आया तो उसे ये जान कर 
बहुत आश्चर्य हुआ, कि सारे गाँव के 
फ्लू से ग्रसित होने के बावजूद 
ये किसान परिवार बिलकुल स्वस्थ्य था.
तब डॉक्टर को ये जानने की इच्छा जागी कि 
ऐसा इस किसान के परिवार ने 
सारे गाँव से हटकर क्या किया कि 
वो *इस भंयकर महामारी में भी*
         *स्वस्थ्य थे.*
 तब किसान की पत्नी ने उन्हें बताया कि 
उसने अपने मकान के दोनों कमरों में 
एक प्लेट में  छिली हुई प्याज रख दी थी 
तब डॉक्टर ने प्लेट में रखी इन प्याज को 
माइक्रोस्कोप से देखा तो उसे इस प्याज में 
उस घातक फ्लू के बैक्टेरिया मिले जो 
संभवतया इन प्याज द्वारा अवशोषित 
   कर लिए गए थे और शायद 
        यही कारण था कि 
इतनी बड़ी महामारी में ये परिवार 
   बिलकुल स्वस्थ्य था, क्योंकि 
*फ्लू के वायरस इन प्याज द्वारा*
     *सोख लिए गए थे.*

जब मैंने अपने एक मित्र जो 
अमेरिका में रहते थे और मुझे हमेशा 
स्वास्थ्य संबधी मुद्दों पर  
बेहद ज्ञानवर्धक जानकारी भेजते रहते हैं,
तब उन्होंने प्याज के संबध में बेहद महत्वपूर्ण 
जानकारी/अनुभव मुझे भेजा. उनकी इस 
बेहद रोचक कहानी के लिए धन्यवाद.

*जब मैं न्यूमोनिया से ग्रसित था और कहने की आवश्यकता नहीं थी कि मैं बहुत कमज़ोर महसूस कर रहा था तब मैंने एक लेख पढ़ा था जिसमें ये बताया गया था कि प्याज को बीच से काटकर रात में  न्यूमोनिया से ग्रस्त मरीज़ के कमरे में एक जार में रख दिया गया था और सुबह यह देख कर बेहद आश्चर्य हुआ कि प्याज सुबह कीटाणुओं की वज़ह से  बिलकुल काली हो गई थी*
*तब मैंने भी अपने कमरे में वैसे ही किया और देखा अगले दिन प्याज बिलकुल काली होकर खराब हो चुकी थी और मैं काफी स्वस्थ्य महसूस कर रहा था.*

कई बार हम पेट की बीमारी से दो चार होते है तब हम इस बात से अनजान रहते है कि इस बीमारी के लिए किसे दोषी ठहराया जाए. तब नि :संदेह प्याज को इस बीमारी के लिए दोषी ठहराया जा सकता है.

*प्याज बैक्टेरिया को अवशोषित कर लेती है यही कारण है कि अपने इस गुण के कारण प्याज हमें ठण्ड और फ्लू से बचाती है.*

*अत: वे प्याज बिलकुल नहीं खाना चाहिए जो बहुत देर पहले काटी गई हो और प्लेट में रखी गई हों. ये जान लें कि ...*
 *काट कर रखी गई प्याज बहुत विषाक्त होती हैं.*

जब कभी भी फ़ूड पॉइसनिंग के केस अस्पताल में आते हैं तो सबसे पहले इस बात की जानकारी ली जाती कि मरीज़ ने अंतिम बार प्याज कब खाई थी. और वे प्याज कहाँ से आई थीं , 
(खासकर सलाद में )

   *प्याज बैक्टेरिया के लिए*
*चुंबक की तरह काम करती हैं*
    *खासकर कच्ची प्याज*

*आप कभी भी थोड़ी सी भी कटी हुई प्याज को देर तक रखने की गलती न करे ये बेहद खतरनाक हैं.*

    *यहाँ तक कि किसी बंद थैली में*
*इसे रेफ्रिजरेटर में रखना भी सुरक्षित नहीं है.*

प्याज ज़रा सी काट देने पर ये बैक्टेरिया से ग्रसित हो सकती है और आपके लिए खतरनाक हो सकती है. यदि आप कटी हुई प्याज को सब्ज़ी बनाने के लिए उपयोग कर रहें हो, तब तो ये ठीक है, लेकिन यदि आप कटी हुई प्याज अपनी ब्रेड पर रख कर खा रहें है तो ये बेहद खतरनाक है. ऐसी स्थिति में आप मुसीबत को न्योता दे रहें हैं. याद रखे कटी हुई प्याज और कटे हुए आलू की नमी बैक्टेरिया को तेज़ी से  पनपने में बेहद सहायक होता है.
कुत्तों को कभी भी प्याज नहीं खिलाना चाहिए, क्योंकि प्याज को उनका पेट का मेटाबोलिज़ कभी भी नहीं पचाता.

*कृपया ध्यान रखे कि ...*
प्याज को काट कर अगले दिन सब्ज़ी बनाने के लिए नहीं रखना चाहिए क्योंकि ये बहुत खतरनाक है यहाँ तक कि कटी हुई प्याज एक रात में बहुत विषाक्त हो जाती है क्योंकि ये टॉक्सिक बैक्टेरिया बनाती है जो पेट खराब करने के लिए पर्याप्त रहता है।

प्याज परमाणविक रेडिएशन को भी सोख लेता है,पोखरन में भी इसका इस्तेमाल हुआ था।

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*Be safe n take care*

🙏🌹👳👳🌟✨🍛⚖️✅🙏

*ना करें सहारे तलाश*

*ना करें सहारे तलाश* 

ईरान का एक बादशाह सर्दियों की शाम जब अपने महल में दाखिल हो रहा था तो एक बूढ़े दरबान को देखा जो महल के सदर दरवाज़े पर पुरानी और बारीक वर्दी में पहरा दे रहा था। 
बादशाह ने उसके करीब अपनी सवारी को रुकवाया और उस बुज़ुर्ग दरबान से पूछा,
"क्या तुम्हें सर्दी नही लग रही है ?"
दरबान ने जवाब दिया " बहुत लग रही है हुज़ूर ! मगर क्या करूँ, गर्म वर्दी है नहीं मेरे पास, इसलिए बर्दाश्त करना पड़ता है।"
"मैं अभी महल के अंदर जाकर अपना ही कोई गर्म जोड़ा भेजता हूँ तुम्हें।"
दरबान ने ख़ुश होकर बादशाह को फर्शी सलाम किया और आजिज़ी का इज़हार किया। 
लेकिन बादशाह जैसे ही महल में दाखिल हुआ, दरबान के साथ किया हुआ वादा भूल गया। 
सुबह दरवाज़े पर उस बूढ़े दरबान की अकड़ी हुई लाश मिली और करीब ही मिट्टी पर उसकी उंगलियों से लिखी गई ये तहरीर भी -
"बादशाह सलामत ! मैं कई सालों से सर्दियों में इसी नाज़ुक वर्दी में दरबानी कर रहा था, मगर कल रात आप के गर्म लिबास के वादे ने मेरी जान निकाल दी।"

सहारे इंसान को खोखला कर देते हैं, उसी तरह उम्मीदें भी कमज़ोर कर देती हैं। अपने बलबूते पर जीना शुरू कीजिए, असल सहारा उस मालिक का है जो ज़िन्दगी में भी हमारे साथ है और मरने के बाद भी जिसकी रहमत हमको तन्हा नही छोड़ती है !

June 16, 2020

class math chapter 4 quadratic equation in english medium

class 10th chapter 4 quadratic equation in eng.

June 11, 2020

मेरा मेरी और मै

  *!! मेरे नाम का गुब्बारा !!*

एक बार पचास लोगों का ग्रुप किसी सेमीनार में हिस्सा ले रहा था। सेमीनार शुरू हुए अभी कुछ ही मिनट बीते थे कि स्पीकर अचानक ही रुका और सभी पार्टिसिपेंट्स को गुब्बारे देते हुए बोला, ”आप सभी को गुब्बारे पर इस मार्कर से अपना नाम लिखना है। सभी ने ऐसा ही किया। अब गुब्बारों को एक दुसरे कमरे में रख दिया गया। स्पीकर ने अब सभी को एक साथ कमरे में जाकर पांच मिनट के अंदर अपना नाम वाला गुब्बारा ढूंढने के लिए कहा।

सारे पार्टिसिपेंट्स तेजी से रूम में घुसे और पागलों की तरह अपना नाम वाला गुब्बारा ढूंढने लगे। पर इस अफरा-तफरी में किसी को भी अपने नाम वाला गुब्बारा नहीं मिल पा रहा था…पांच मिनट बाद सभी को बाहर बुला लिया गया। स्पीकर बोला, ” अरे! क्या हुआ, आप सभी खाली हाथ क्यों हैं ? क्या किसी को अपने नाम वाला गुब्बारा नहीं मिला ?” ” नहीं ! हमने बहुत ढूंढा पर हमेशा किसी और के नाम का ही गुब्बारा हाथ आया…”, एक पार्टिसिपेंट कुछ मायूस होते हुए बोला।

“कोई बात नहीं, आप लोग एक बार फिर कमरे में जाइये, पर इस बार जिसे जो भी गुब्बारा मिले उसे अपने हाथ में ले और उस व्यक्ति का नाम पुकारे जिसका नाम उसपर लिखा हुआ है, स्पीकर ने निर्दश दिया। एक बार फिर सभी पार्टिसिपेंट्स कमरे में गए, पर इस बार सब शांत थे, और कमरे में किसी तरह की अफरा-तफरी नहीं मची हुई थी। सभी ने एक दुसरे को उनके नाम के गुब्बारे दिए और तीन मिनट में ही बाहर निकले आये।

स्पीकर ने गम्भीर होते हुए कहा , ”बिलकुल यही चीज हमारे जीवन में भी हो रही है। हर कोई  अपने लिए ही जी रहा है, उसे इससे कोई मतलब नहीं कि वह किस तरह औरों की मदद कर सकता है, वह तो  बस  पागलों की तरह अपनी ही खुशियां ढूंढ रहा है, पर बहुत ढूंढने के बाद भी उसे कुछ नहीं मिलता।

*शिक्षा*:- 
दोस्तों ! हमारी ख़ुशी दूसरों की ख़ुशी में छिपी हुई है। जब तुम औरों को उनकी खुशियां देना सीख जाओगे तो अपने आप ही तुम्हे तुम्हारी खुशियां मिल जाएँगी। और यही मानव-जीवन का उद्देश्य है।”

समर्पण


        एक बार किसी देश का राजा अपनी प्रजा का हाल-चाल पूछने के लिए गाँवो में घूम रहा था। घूमते-घूमते उसके कुर्ते का बटन टूट गया, उसने अपने मंत्री को कहा कि, पता करो की इस गाँव में कौन सा दर्जी हैं,जो मेरे बटन को सिल सके, मंत्री ने पता किया, उस गाँव में सिर्फ एक ही दर्जी था, जो कपडे सिलने का काम करता था।
उसको राजा के सामने ले जाया गया, राजा ने कहा, क्या तुम मेरे कुर्ते का बटन सी सकते हो, दर्जी ने कहा,यह कोई मुश्किल काम थोड़े ही है, उसने मंत्री से बटन ले लिया, धागे से उसने राजा के कुर्ते का बटन फोरन सी दिया, क्योंकि बटन भी राजा के पास था, सिर्फ उसको अपना धागे का प्रयोग करना था।
        राजा ने दर्जी से पूछा कि, कितने पैसे दू, उसने कहा, महाराज रहने दो, छोटा सा काम था, उसने मन में सोचा कि, बटन भी राजा के पास था, उसने तो सिर्फ धागा ही लगाया हैं, राजा ने फिर से दर्जी को कहा, कि, नहीं नहीं बोलो कितनीे माया दू, दर्जी ने सोचा कि, 2 रूपये मांग लेता हूँ, फिर मन में सोचा कि; कहीं राजा यह ने सोचलें,कि, बटन टाँगने के मुझ से 2 रुपये ले रहा हैं, तो गाँव वालों से कितना लेता होगा, क्योंकि उस जमाने में २ रुपये की कीमत बहुत होती थी।
        दर्जी ने राजा से कहा, कि, महाराज जो भी आपको उचित लगे, वह दे दो, अब था तो राजा ही, उसने अपने हिसाब से देना था, कहीं देने में उसकी पोजीशन ख़राब न हो जाये।
उसने अपने मंत्री से कहा कि, इस दर्जी को २ गाँव दे दों, यह हमारा हुकम है।
कहाँ वो दर्जी सिर्फ २ रुपये की मांग कर रहा था, और कहाँ राजा ने उसको २ गाँव दे दिए ,, जब हम प्रभु पर सब कुछ छोड़ देते हैं, तो वह अपने हिसाब से देता हैं, सिर्फ हम मांगने में कमी कर जाते है, देने वाला तो पता नही क्या देना चाहता हैं, इसलिए संत-महात्मा कहते है, प्रभु के चरणों पर अपने आपको -अर्पण कर दों,, फिर देखो उनकी लीला।

June 07, 2020

मनोवैज्ञानिक तथ्य भाग 1

शुभ प्रभात
चलो दिन की शुरुवात कुछ मनोवैज्ञानिक तथ्यों से करते है

फोन खो जाने पर होने वाली चिंता उस चिंता के समान होती हैं, जब व्यक्ति अपनी मौत के करीब होता हैं.

 यदि आप किसी को अपने गोल बता देते हो तो आपके सफ़ल होने की संभावना कम हो जाती हैं.. ऐसा इसलिए, क्यों कि आप motivation lose कर देते हैं.

 हम जितना ज्यादा दूसरों पर खर्च करते हैं उतने ज्यादा खुश रहते हैं.

 90% लोग मैसेज़ में वो चीज़े लिखते हैं जिन्हें वो कह नही सकते.

आपका पसंदीदा गाना आपको इसलिए पसंद हैं क्यों कि वह आपकी ज़िंदगी की असल घटना के साथ जुड़ा हुआ होता हैं.

18 से 33 साल की उम्र तक आदमी सबसे ज्यादा तनाव में रहता हैं.

किसी भी आदमी को प्यार में पड़ने के लिए सिर्फ़ 4 मिनट ही काफी होते हैं.

Comedian और मजाकिया लोग दूसरो के मुकाबले ज्यादा उदास रहते हैं.

आधे से ज्यादा समय आपका दिमाग केवल यादें दोहराता रहता हैं.

 आप किसी से जितना भावनाओं को छिपाओगें.. उस व्यक्ति के लिए उतना ही मुश्किल होगा आपको समझना.


 जब कोई हमें ignore करता हैं तो वही chemical रिलिज़ होता हैं जो चोट लगने पर होता हैं.

 Smarter लोग खुद को कम मानते हैं लेकिन अनज़ान लोग उन्हें brilliant समझते हैं.

 यदि आप पुराने समय को याद करते हैं तो उससे ज्यादा ये याद आता हैं कि इसे आखिरीं बार कब याद किया था.

 जितनी चिंता आजकल के बच्चे दिखाते हैं 1950 में उतनी चिंता तो दिमागी मरीज़ दिखाते थे.

 जब किसी से प्यार होता हैं तो हमारा दिमाग इसमें कुछ नही करता करता बस एक chemical रिलिज़ होता हैं.

. जब कोई कहता हैं कि आपसे एक प्रश्न पूछना हैं तो हाल ही में किए गए सारे बुरे काम एक मिनट के अंदर याद आ जाते हैं.

 जो लोग ज्यादा हँसते हैं वो ज्यादा दर्द सहन कर सकते हैं.

 हम जो सोचते हैं उसका 90% हिस्सा सीधा हमारे मूड पर असर करता हैं एक गलत विचार पूरे मूड को खराब कर सकता हैं.

 लोग आपके बारे में अच्छा सुनने पर शक करते हैं लेकिन बुरा सुनने पर तुरंत यकीन कर लेते हैं.

. किसी के साथ ज्यादा समय बिताने से आप उसकी आदतें अपनानें लगते हैं इसलिए सोच-समझकर दोस्त बनाएं.

. इंसान के लिए सबसे मुश्किल कामों में से एक हैं.. खुद को ये समझाना कि अब मुझे किसी की परवाह नही हैं.

 90% लोगो का दिमाग ये सोचता हैं कि काश कुछ पल के लिए समय पीछे चला जाएं.

अगर कोई नाख़ून चबाता हैं तो इसका मतलब वह बहुत परेशान हैं.


यदि कोई ज्यादा तकियें लेकर सोता हैं तो इसका मतलब वह खुद को अकेला महसूस करता हैं.

June 06, 2020

दर्जी की सीख

!! *दर्जी की सीख* !!
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एक दिन स्कूल में छुट्टी की घोषणा होने के कारण, एक दर्जी का बेटा, अपने पापा की दुकान पर चला गया। वहाँ जाकर वह बड़े ध्यान से अपने पापा को काम करते हुए देखने लगा। उसने देखा कि उसके पापा कैंची से कपड़े को काटते हैं और कैंची को पैर के पास टांग से दबा कर रख देते हैं। फिर सुई से उसको सीते हैं और सीने के बाद सु ई को अपनी टोपी पर लगा लेते हैं ।

जब उसने इसी क्रिया को चार-पाँच बार देखा तो उससे रहा नहीं गया, तो उसने अपने पापा से कहा कि वह एक बात उनसे पूछना चाहता है ?  पापा ने कहा- बेटा बोलो क्या पूछना चाहते हो ? बेटा बोला- पापा मैं बड़ी देर से आपको देख रहा हूं , आप जब भी कपड़ा काटते हैं, उसके बाद कैंची को पैर के नीचे दबा देते हैं, और सुई से कपड़ा सीने के बाद, उसे टोपी पर लगा लेते हैं, ऐसा क्यों ? 

इसका जो उत्तर पापा ने दिया- उन दो पंक्तियाँ में मानों उसने ज़िन्दगी का सार समझा दिया। उत्तर था- ” बेटा, कैंची काटने का काम करती है, और सुई जोड़ने का काम करती है, और काटने वाले की जगह हमेशा नीची होती है परन्तु जोड़ने वाले की जगह हमेशा ऊपर होती है । यही कारण है कि मैं सुई को टोपी पर लगाता हूं और कैंची को पैर के नीचे रखता हूं ।”

*शिक्षा* :-
उपर्युक्त कहानी से हमें भी यही सीख मिलती हैं कि जो समाज में एक-दूसरे को जोड़ने का काम करते हैं उसकी जगह हमेशा ऊपर, था जो काटने अलग करने का काम करता हैं, उसकी जगह हमेशा नीचे ही रहती हैं।

महत्वपूर्ण वैज्ञानिक नाम

📒महत्वपूर्ण जानकारी📒

• मनुष्य का वैज्ञानिक नाम क्या है?- होमो सैपियंस
• मेढक का वैज्ञानिक नाम क्या है?- राना टिग्रिना
• बिल्ली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- फेलिस डोमेस्टिका
• चूहा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- Rattus
छिपकली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- Lacertilia
• कुत्ता का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैनिस फैमिलियर्स
• गाय का वैज्ञानिक नाम क्या है?- बॉस इंडिकस
• भैँस का वैज्ञानिक नाम क्या है?- बुबालस बुबालिस
• बैल का वैज्ञानिक नाम क्या है?- बॉस प्रिमिजिनियस टारस
• बकरी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- केप्टा हिटमस
• भेँड़ का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ओवीज अराइज
• सुअर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- सुसस्फ्रोका डोमेस्टिका
• शेर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पैँथरा लियो
• बाघ का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पैँथरा टाइग्रिस
• चीता का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पैँथरा पार्डुस
• भालू का वैज्ञानिक नाम क्या है?- उर्सुस मैटिटिमस कार्नीवेरा
• खरगोश का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ऑरिक्टोलेगस कुनिकुलस
• हिरण का वैज्ञानिक नाम क्या है?- सर्वस एलाफस
• ऊँट का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैमेलस डोमेडेरियस
• लोमडी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैनीडे
• लंगूर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- होमिनोडिया
• बारहसिंगा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- रुसर्वस डुवाउसेली
• मक्खी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- मस्का डोमेस्टिका
• मोर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पैवो क्रिस्टेटस
• हाथी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एफिलास इंडिका
• डॉल्फिन का वैज्ञानिक नाम क्या है?- प्लैटिनिस्ट गैंगेटिका
• घोड़ा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ईक्वस कैबेलस
• गधा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- इक्विस असिनस
• आम का वैज्ञानिक नाम क्या है?- मैग्नीफेरा इंडिका
• अंगुर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- विटियस
• संतरा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- साइट्रस सीनेन्सिस
• नारियल का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कोको न्यूसीफेरा
• सेब का वैज्ञानिक नाम क्या है?- मेलस प्यूमिया/डोमेस्टिका
• अनानास का वैज्ञानिक नाम क्या है?- आननास कॉमोजस
• पपीता का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैरीका पपीता
• नाशपाती का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पाइरस क्यूमिनिस
• केला का वैज्ञानिक नाम क्या है?- म्यूजा पेराडिसिएका
• लीची का वैज्ञानिक नाम क्या है?- लीची चिन्नीसिस
• इमली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- तामार इंडस इंडिका
• खीरा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कुसुमिस सैटिवस
• बेर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ज़िज़ीफस मौरीतियाना
• चुकंदर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- बीटा वाल्गारिस
• जामुन का वैज्ञानिक नाम क्या है?- शायजियम क्यूमिनी
• गन्ना का वैज्ञानिक नाम क्या है?- सुगरेन्स औफिसीनेरम
• मक्का का वैज्ञानिक नाम क्या है?- जिया मेज
• बाजरा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पेनिसिटम अमेरीकोनम
• धान का वैज्ञानिक नाम क्या है?- औरिजया सैटिवाट
• गेहूँ का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ट्रिक्टिकम एस्टिवियम
• कपास का वैज्ञानिक नाम क्या है?- गैसीपीयम
• सरसोँ का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ब्रेसिका कम्पेस्टरीज
• कॉफी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कॉफिया अरेबिका
• चाय का वैज्ञानिक नाम क्या है?- थिया साइनेनिसस
• तुलसी का वैज्ञानिक नाम क्या हैं?- ऑक्सीमेन्ट टेन्यूफ़्लोरम
• एलोविरा का वैज्ञानिक नाम क्या हैं?- एलोविरा
• अफीम का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पपवर सोम्निफेरुम
• काजू का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एनाकार्डियम अरोमैटिकम
• बादाम का वैज्ञानिक नाम क्या है?- प्रुनस अरमेनिका
• मुंगफली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एरैकिस हाइजोपिया
• लालमिर्च का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैप्सियम एनुअम
• कालीमिर्च का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पाइपर नाइग्रम
• केसर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- क्रोकस सैटिवियस
• सौफ (Fennel) का वैज्ञानिक नाम क्या है?- फ़ीनिकुलम वल्गेरे
• जीरा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- क्यूमीनियम सिमिनियम
• हल्दी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कुरकुमा लोँगा
• नीबू का वैज्ञानिक नाम क्या है?- साइट्रस लिंबोन
• आंवला(gooseberry) का वैज्ञानिक नाम क्या है?- फ़िलेन्थस इम्ब्लिका
• धनिया का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कोरियेंडम सटिवुम
• टमाटर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- लाइकोप्रेसिकन एस्कुलेँटम
• पालक का वैज्ञानिक नाम क्या है?- स्पिनिया ओलेरसाइए
• बैगन का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एकोनिटियम हेटरोफिलम
• फूलगोभी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ब्रासिका औलिरेशिया
• अदरक का वैज्ञानिक नाम क्या है?- जिँजिबर ऑफिसिनेल
• लहसून का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एलियम सेराइवन
• गाजर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- डाकस कैरोटा
• मूली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- रेफेनस सैटाइविस

हमें अवसर नही मिला प्रेरक प्रसंग

*प्रेरक प्रसंग*

            !! *अवसर की पहचान* !!
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एक बार एक ग्राहक चित्रों की दुकान पर गया। उसने वहाँ पर अजीब से चित्र देखे। पहले चित्र में चेहरा पूरी तरह बालों से ढँका हुआ था और पैरों में पंख थे। एक दूसरे चित्र में सिर पीछे से गंजा था। ग्राहक ने पूछा- यह चित्र किसका है? दुकानदार ने कहा- अवसर का। ग्राहक ने पूछा- इसका चेहरा बालों से ढका क्यों है? दुकानदार ने कहा - क्योंकि अक्सर जब अवसर आता है तो मनुष्य उसे पहचानता नहीं है। 

ग्राहक ने पूछा- और इसके पैरों में पंख क्यों है? दुकानदार ने कहा – वह इसलिये कि यह तुरंत वापस भाग जाता है, यदि इसका उपयोग न हो तो यह तुरंत उड़ जाता है। ग्राहक ने पूछा- और यह दूसरे चित्र में पीछे से गंजा सिर किसका है? दुकानदार ने कहा- यह भी अवसर का है। 

यदि अवसर को सामने से ही बालों से पकड़ लेंगे तो वह आपका है। अगर आपने उसे थोड़ी देरी से पकड़ने की कोशिश की तो पीछे का गंजा सिर हाथ आयेगा और वो फिसलकर निकल जायेगा। वह ग्राहक इन चित्रों का रहस्य जानकर हैरान था, पर अब वह बात समझ चुका था।


*शिक्षा*:-
दोस्तों, आपने कई बार दूसरों को ये कहते हुए सुना होगा या खुद भी कहा होगा कि ‘हमें अवसर ही नहीं मिला’ लेकिन ये अपनी जिम्मेदारी से भागने और अपनी गलती को छुपाने का बस एक बहाना है। Real में भगवान ने हमें ढ़ेरों अवसरों के बीच जन्म दिया है। अवसर हमेशा हमारे सामने से आते-जाते रहते हैं, पर हम उसे पहचान नहीं पाते या पहचानने में देर कर देते हैं। और कई बार हम सिर्फ इसलिये चूक जाते हैं क्योंकि हम बड़े अवसर की ताक में रहते हैं। पर अवसर बड़ा या छोटा नहीं होता है। हमें हर अवसर का भरपूर उपयोग करना चाहिये।

शरीर से जुड़े रोचक तथ्य भाग 3

शुभ प्रभात,,,,,
चलो दिन की शुरुवात कुछ रोचक तथ्यों से करते है

मानव आँख 576 मेगा पिक्सेल की होती है,जो की आजकल के मोबाइल कैमरा से कई गुना ज्यादा है


 यदि आप अपने पुरे जीवनकाल में अपने बाल नहीं कटवाएँगे तो आपके बालों की लंबाई 725 किलोमीटर हो सकती हैं

 एक हवाई जहाज की उड़ान के दौरान एक व्यक्ति के बाल डबल गति सेबढ़ते हैं।

 60 वर्ष की आयु तक के अधिकांश लोग अपने आधे स्वाद खो देते हैं।


. आंख के अंदर रेटिनस लगभग 650 वर्ग मीटर के होते है और इसमें 137 मिलियन प्रकाश संवेदनशील कोशिकाएं होती है. 130 मिलियन काले और दृष्टी के लिए होते है और 7 मिलियन आप को रंग देखने में मदद करते हैं।

. हमारी आंखें उसी आकार में रहती है जैसे वे जन्म में थी लेकिन हमारे कान और नाक बढ़ने से कभी नहीं रुकते हैं।

 आंखे खोल कर  छींकना असंभव ह

 मनुष्य केवल एकमात्र प्राणी है जो सीधे रेखाएं खींच सकते हैं।


आपका दायां फेफड़ा आपके बाएं फेफड़े से अधिक हवा ले सकता हैं।

 मानव मुंह में करीब 40,000 बैक्टीरिया होते है और करीब 2,000 स्वाद कब्ज हैं।

72. एक वयस्क व्यक्ति लगभग 23,000 सांस लेता है और छोड़ देता है।

मानव शरीर में सबसे छोटी कोशिकाएं शुक्राणु कोशिका होती हैं।

 मानव ह्रदय रक्त इतनी तेज पंप करता है जिससे वह इमारत के चौथे मंजिल तक खून उठाने में सक्षम होता हैं।

बच्चे वसंत में तेजी से बढ़ते हैं.

76 की उम्र तक मनुष्य लगभग 12,000 गैलन पानी का उपभोग कर लेता है.

शरीर 0.0015 सेकंड में स्वाद का अनुभव कर लेता है जो की हमारी पलकें झपकने से ज्यादा तेज है.

 मनुष्य का मुंह और स्त्रियों की जननांग, एक ही प्रकार की त्वचा कोशिका से बनी होती है.

मनुष्य की छींक की गति लगभग 100 Mph या उससे भी ज्यादा होती है.

मनुष्य जिस हाथ से लिखता है, उस हाथ के नाख़ून तेजी से बढ़ते है. ये पैर के अंगूठे और लम्बी उंगली के नाख़ून से भी तेज बढ़ते हैं.

June 05, 2020

महत्व पूर्ण अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ important international borders

⛩ अंतराष्ट्रीय सीमाएं
 

1. रेखा का नाम – डूरंड रेखा
(Durand Line)
- देशों के मध्य – पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान
- 1886 में सर मार्टिमर डूरंड द्वारा निर्धारित।

 
2. रेखा का नाम – मैकमाहोन रेखा
(Macmahon Line)
- देशों के मध्य – भारत तथा चीन
- 1120 किमी. लंबी यह रेखा सर हेनरी मैकमोहन द्वारा निर्धारित की गई थी।

 
3. रेखा का नाम – रेडक्लिफ रेखा
(Radcliffe Line)
- देशों के मध्य – भारत तथा पाकिस्तान
- 1947 में भारत-पाकिस्तान सीमा आयोग के अध्यक्ष सर सायरिल रेडक्लिफ द्वारा निर्धारित।

 
4. रेखा का नाम – 17 वीं समानांतर रेखा
(17th Parallel)
- देशों के मध्य – उत्तरी वियतनाम तथा द. वियतनाम
- वियतनाम के एकीकरण के पहले यह देश को दो भागों में बांटती थी।

 
5. रेखा का नाम – 24 वीं समानांतर रेखा
(24th Parallel)
- देशों के मध्य – भारत तथा पाकिस्तान
- पाकिस्तान के अनुसार कच्छ क्षेत्र का यह रेखा सही निर्धारण करती है लेकिन भारत इस रेखा को स्वीकार नहीं करता है।

 
6. रेखा का नाम – 38 वीं समानांतर रेखा
(38th Parallel)
- देशों के मध्य – उत्तर कोरिया तथा दक्षिण कोरिया
- कोरिया को दो भागों में बांटती है।

 
7. रेखा का नाम – 49 वीं समानांतर रेखा
(49th Parallel)
- देशों के मध्य – अमेरिका तथा कनाडा
- अमेरिका तथा कनाडा को दो भागों में बांटती है।

 
8. रेखा का नाम – हिंडनबर्ग रेखा
(Hindenburg Line)
- देशों के मध्य – जर्मनी तथा पोलैंड
- प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी की सेना यहीं से वापस लौटी थी।

 
9. रेखा का नाम – ओडरनास रेखा
(Order-Neisse Line)
- देशों के मध्य – जर्मनी तथा पोलैंड
- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद निर्धारित की गई।

 
10. रेखा का नाम – मैगिनाट रेखा
(Maginot Line)
- देशों के मध्य – जर्मनी तथा फ्रांस
- जर्मनी के आक्रमण से बचाव के लिए फ्रांस ने यह रेखा बनाई थी।

 

11. रेखा का नाम – सीजफ्राइड रेखा
(Seigfrid Line)
- देशों के मध्य – जर्मनी तथा फ्रांस
-जर्मनी ने यह रेखा बनाई थी

Important fact about to body

कुछ रोचक बाते मानव सरीर के बारे में


 1 जिस मानव का वजन 70 किलो होता है उसमें 0.2 मिलीग्राम तक सोना होता है।

2. मनुष्य के थूक का उबाल दर्जा पानी से तीन गुना होता है। 

3. दुनिया के सबसे कम उम्र के मां-बाप 8 और 9 साल के थे और 1910 में चीन में रहते थे।

4. आप के महिदे (Stomatch) में जो तेजाब होता है वह बलेड़ को भी पचा सकता है।यह तेजाब Hydrochloric तेजाब होता है।

5. दुनिया में हर 40 सैकेंड में एक आत्महत्या होती है।

6. मनुष्य के बाल न तो सर्दी द्वारा, न जलवायु द्वारा, न पानी द्वारा और न ही अन्य कुदरती बलों द्वारा नष्ट होते है और यह कई प्रकार के तेजाबों के प्रतीरोधक भी है।

7. एक औसतन मनुष्य के 1,00,000 बाल होते हैं।जिन के बाल काले होते है उनके औसतन 1,10,000 , जिनके भुरे होते है उनके 1,00,000 और जिनके लाल होते है उनके औसतन 86,000 बाल होते है।

8. आप की कुहनी से नचले भाग से कलाई तक के भाग जितने ही आपके पैर होते है।ऐसे ही आपके अंगुठे की लंम्बाई आपकी नाक की लंम्बाई जितनी होती है और होठों की लंम्बाई आपकी पहली ऊगली जितनी होती है

Important fact for human body

good mornIng
शुभ प्रभात
चलो दिन की शुरुवात करते है कुछ रोचक बातो से

1. आप के फेफड़े की सतह का क्षेत्रफल एक Tennis Court के जितना होता है।

. मनुष्य का बायां फेफडा, दाएँ फेफडे से छोटा होता है क्योकि उसने दिल को जगा देनी होती है।

. जिन लोगो कि शरीर पर तिलों की संख्या ज्यादा होती है वह औसतन कम तिल वाले लोगो से ज्यादा जीते हैं।

 काले रंग के लोगो को गोरे रंग के लोगो से कम दिल का दौरा पड़ता है।

हम शाम के मुकाबले सवेर को 1 Cm लंम्बे होते हैं।

अगर एक औसतन मनुष्य की खुन की वाहिकायों को जोड़ दिया जाए तो 96,000 किलोमीटर लंम्बी लड़ी बन सकती है जिससे धरती का ढाई बार चक्कर लगाया जा सकता है।

बहुत ज्यादा खा लेने के बाद आपकी सुनने की समता थोड़ी कम हो जाती है।

 अपने जीवन काल के दौरान आप दो स्वीमिंग पुल जितनी लार बना लेते है।लार भोजन को पचाने और उसे सवादिस्ट बनाने के लिए महत्वपुर्ण भूमिका निभाती है।

. मानव एकलौते ऐसे प्राणी हैं जो भावुक होकर रोते हैं।

 साठ साल की उम्र के बाद 60% बुजुर्ग और 40% बुजुर्ग महिलाएँ सोते समय खराटे मारने लगते हैं।

. एक मिनट में दुनिया में सात लोग धुम्रपान की वजह से मारे जाते है।

. आपके शरीर में 1 सैकेंड में 1 करोड़ लाल रकताणु बनते और मरते हैं।

एक मिनट में 1 करोड़ सिगरेट पी ली जाती है।

आपके सिर में 22 हड्डिया होती है।

. शारीरक तौर पर एक ही समय पर पेशाब करना और रक्त देना असंभ्व है।

बुद्धीमान लोगों के बालों में जिंक और ताबें की मात्रा ज्यादा होती है।

 हमारी आँखे जन्म से लेकर सदा एकसार रहती है जबकि हमारे कान और नाक कभी बढ़ना नही रूकते।

 टैलीविजन देखते समय आप सोने से ज्यादा कैलोरी खप्त करते है।

 अपने Muscles के बारे में सोचना आपको ताकतवर बनाता है।

 सोमवार एक ऐसा दिन होता है जब Heart Attack (दिल के दौरे) होने के ज्यादा Chance होते है।Scotland में हुए एक अध्ययन के अनुसार 20% लोग अन्य किसी दिन के बजाए सोमवार को दिल के दौरे से मरे