June 27, 2020

पितृदिवश है यानी पिताजी का दिन* *(FATHER'S DAY)*

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आज मेने अपने *पिताजी* को एक उपहार दिया और उनके पैर छुए .....
पिताजी बोले: पैर छूना तो तेरा नित्यकर्म है पर आज ये *उपहार* क्यों ?
मैंने बड़े विनम्रतापूर्वक, खुश होकर कहा :- क्योंकि पिताजी आज *पितृदिवश है यानी पिताजी का दिन* *(FATHER'S DAY)*

  फिर क्या था

पिताजी ने जूता उतारा और बे मौसम वारिश कर दी 
दे दना दन........
*कितने जूते मुझमे मारे याद नही*
और बोले :- अभी में जिंदा हूँ, और तू मेरा श्राद निकाल रहा है! अरे मूर्ख हमारे यहाँ जिस दिन पिताजी की मृत्यु होती है उसे हर साल *पिताजी का दिन* कहा जाता है !

जब उनका गुस्सा ठंडा हुआ तब मैंने पूछा कि हुआ क्या ?
मेरे पिताजी बोले :- ये उन लोगो के लिए है जो पूरे बर्ष अपने माता पिता की कोई परवाह नही करते,न उनकी देखभाल करते, वो किस हाल में है ? यह जानने के लिए भी उनके पास समय नही है !
365 दिन में से 1 दिन पिता को और 1 दिन माँ को याद किया और इतिश्री कर ली ! वाकी 363 दिन उनका क्या हाल है ?
इससे कोई मतलब नही ।

हमारे हिंदुस्तान में 365 दिन ही *माता पिता* के होते है ! हमारी संस्कृति में माँ बाप के आशीर्वाद से ही दिन की शुरुआत होती है !!

और आखिर में बोले :- *ये गलत शुरुआत तो तूने शुरू कर दी है इसका परिणाम तेरे बेटा बेटी या उनके बच्चे भोगेंगे ।* जब माँ बाप को सिर्फ 1 दिन ही याद किया जाएगा और इसे गलत भी नही माना जायेगा ! *क्योकि तब तक ये परम्परा या रीति रिवाज का रूप ले चुका होगा !*

*उनकी ये बात मेरी समझ मे तो आ गयी और आपकी....?*

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