कहानी - एक कहानी या कथा शब्दों (लिखित या मौखिक), कल्पना (स्थिर और गतिशील), शारीरिक भाषा, प्रदर्शन, संगीत, या संचार के किसी अन्य रूप के माध्यम से बताई गई घटनाओं की एक जुड़ी हुई श्रृंखला है।
कहानी किसी व्यक्ति जीवन की किसी एक घटना पर आधारित होती है
कहानी - एक कहानी या कथा शब्दों (लिखित या मौखिक), कल्पना (स्थिर और गतिशील), शारीरिक भाषा, प्रदर्शन, संगीत, या संचार के किसी अन्य रूप के माध्यम से बताई गई घटनाओं की एक जुड़ी हुई श्रृंखला है।
कहानी किसी व्यक्ति जीवन की किसी एक घटना पर आधारित होती है
Educational Qualification: 1. High School Passed from M.P. Board Bhopal in 2007 with 86%. 2. Higher Secondary (Mathematics) Passed from M.P. Board Bhopal in 2009 with 81 %. (Math’s Mark 97%) 3. B.Sc. (Mathematics) Passed from M.P. Bhoj University Bhopal in 2015 with 63 %. 4. M.Sc. (Mathematics) Passed from M.P. Bhoj University Bhopal in 2017 with 61% 5. Master Of Social Work in Running from Mahatma Gandhi Chitrakoot Gramodaya Vishwavidyalaya, Satna MP Other Qualification: 1. Computer Course of Three Month (CCA) 2. BE (CS) third Sem MPCTM Collage. 3. BTC 20 Days Camp Surya Foundation from Delhi. 4. OTC in RSS second Year
अलंकार
Educational Qualification: 1. High School Passed from M.P. Board Bhopal in 2007 with 86%. 2. Higher Secondary (Mathematics) Passed from M.P. Board Bhopal in 2009 with 81 %. (Math’s Mark 97%) 3. B.Sc. (Mathematics) Passed from M.P. Bhoj University Bhopal in 2015 with 63 %. 4. M.Sc. (Mathematics) Passed from M.P. Bhoj University Bhopal in 2017 with 61% 5. Master Of Social Work in Running from Mahatma Gandhi Chitrakoot Gramodaya Vishwavidyalaya, Satna MP Other Qualification: 1. Computer Course of Three Month (CCA) 2. BE (CS) third Sem MPCTM Collage. 3. BTC 20 Days Camp Surya Foundation from Delhi. 4. OTC in RSS second Year
रस किसे कहते है?
‘रस‘ का शाब्दिक अर्थ है ‘आनंद‘।
किसी काव्य को पढने, सुनने या देखने पाठक या दर्शक को जिस आनंद की अनुभूति होती है, उसे ‘रस‘ कहा जाता है।
प्रश्न - रस के कितने अंग होते हैं उनके नाम लिखिए
रस के चार अवयव (अंग) होते है -
1. स्थायी भाव
2. विभाव
3. अनुभाव
4. संचारी भाव/व्यभिचारी भाव
प्रश्न - स्थायी भाव किसे कहते हैं और यह कहां विद्यमान हैं?
1. स्थायी भाव - स्थायी भाव का मतलब है प्रधान भाव (मुख्य भाव), जो काव्य या नाटक में एक स्थायी भाव शुरू से लेकर आखिर तक होता है स्थायी भावों की संख्या नौ मानी गयी है।
2. विभाव - स्थायी भावों के उद्बोधक (जगाने वाले) कारण को विभाव कहते हैं।
विभाव दो प्रकार के होते हैं
1) आलंबन विभाव 2) उद्दीपन विभाव
1) आलंबन विभाव- जिसका आलंबन या सहारा पाकर स्थायी भाव जगते हैं आलंबन विभाव कहलाता है
जैसे- नायक नायिका आलंबन विभाव के दो पक्ष होते हैं
उदाहरण- यदि राम के मन में सीता के प्रति रति का भाव जगता है तो राम आश्रय होंगे और सीता विषय होगी
2) उद्दीपन विभाव- जिन वस्तुओं व परिस्थतियों को देखकर स्थायी भाव उद्दीप्त होने लगता है उद्दीपन विभाव कहलाता है।
जैसे - चाॅदनी, कोकिल, एकांत स्थल, नायक और नायक की शारीरिक चेष्टाए आदि।
3. अनुभाव - मन में आए हुए भाव को व्यक्त करने वाले शरीर विकार अनुभाव कहलाते हैं अनुभावों की संख्या आठ मानी गयी है।
1.स्तम्भ 2. स्वेद 3.रोमांच
4. स्वर भंग 5. कंप
6. विवर्णता (रंगहीनता) 7. अश्रु
8. प्रलय (संज्ञाहीनता/निश्चेष्टता)
4. संचारी भाव/व्यभिचारी भाव - मन में संचरण करने वाले (आने जाने वाले) भावों को संचारी भाव कहते हैं संचारी भावों की कुल संख्या 33 मानी गयी है कुछ इस प्रकार हैं हर्ष, विषाद, त्रास (भय) आदि।
प्र. श्रृंगाार रस किसे कहते है? उदाहरण सहित समझाइऐ
विभाव, अनुभाव, संचारी भाव के योग से रति (प्रेम) नामक स्थायी भाव द्वारा श्रृंगार रस की उत्पत्ति होती है।
श्रृंगाार रस दो प्रकार का होता है-
संयोग श्रृंगार - संयोग श्रृंगाार में नायक और नायिका का मिलन होता है।
उदहारण -
1. राम को रूप निहारति जानकी, कंगन के नग की परछाही।
यातै सबै सुधि भूलि गयी, कर टेक रही पल टारत नाहीं।
2. मेरे तो गिरिधर गोपाल दूसरो न कोई
जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई।
वियोग श्रृंगार - वियोग श्रंगार में नायक और नायिका बिछडते हैं।
उदहारण -
हे खग मृग हे मधुकर श्रेणी, तुम देखी सीता मृग नयनी।
प्र. हास्य रस किसे कहते है? उदाहरण सहित समझाइऐ
विभाव, अनुभाव, संचारी भाव के योग से हास नामक स्थायी भाव द्वारा हास्य रस की उत्पत्ति होती है।
उदहारण -
1. बंदर ने कहा बंदरिया से चलो नहाने गंगा
बच्चों को छोडो घर पर होने दो हुडदंगा।
2. सीरा पर गंगा हसै, भुजानि में भुजंगा हसै
हास ही को दंगा भयो ,नंगा के विवाह में।
प्र. करूण रस किसे कहते है? उदाहरण सहित समझाइऐ
विभाव, अनुभाव, संचारी भाव के योग से शोक नामक स्थायी भाव द्वारा करूण रस की उत्पत्ति होती है।
उदहारण -
1. हे प्रिय पति प्राँण प्यारा कहाँ है,
दुःख जल निधि डूबी का सहारा कहाँ है।
लख मुख जिसका में आज लो जी सकी हूँ
वह हृदय हमारा नयन तारा कहाँ है।
प्र. वीर रस किसे कहते है? उदाहरण सहित समझाइऐ
विभाव, अनुभाव, संचारी भाव के योग से उत्साह नामक स्थायी भाव द्वारा वीर रस की उत्पत्ति होती है।
उदहारण -
1. बुंदेले हर बोलों मुह, हमने सुनी कहानी थी
खूब लडी मर्दानी वो तो झाॅसी वाली रानी थी।
2. दूध मागोगे तो खीर देंगे, कश्मीर मागोगे तो चीर देंगे।
प्र. रोंद्र रस किसे कहते है? उदाहरण सहित समझाइऐ
विभाव, अनुभाव, संचारी भाव के योग से क्रोध नामक स्थायी भाव द्वारा रोंद्र रस की उत्पत्ति होती है।
उदहारण -
1. श्री कृष्ण के सुनकर वचन, अर्जुन क्रोध के जलने लगे
सब शील अपना भूलकर, करतल युगल मलने लगेे।
2. उस काल मरे क्रोध के तन कापने उसका लगा
मानो हवा के जोर से सोता हुआ सागर जगा।
प्र. भयानक रस किसे कहते है? उदाहरण सहित समझाइऐ
विभाव, अनुभाव, संचारी भाव के योग से भय नामक स्थायी भाव द्वारा भयानक रस की उत्पत्ति होती है।
उदहारण -
1. एक ओर अजगरहि लखि, एक ओर मृगराय
विकल बटोही बीच ही परयों मूर्छा खाय।
2. देखे जब बारात में भूत प्रेत सब व्याल
थर थर काँपे नारी नर भाग चले सब व्याल ।
प्र. वीभत्य रस किसे कहते है? उदाहरण सहित समझाइऐ
विभाव, अनुभाव, संचारी भाव के योग से जुगुप्त्सा/घृणा नामक स्थायी भाव द्वारा वीभत्य रस की उत्पत्ति होती है।
उदहारण -
1. घर में लाशें बाहर लाशें सडती लाशें नुस्ती लाशें
दुर्गंध छाडती हैं साँसे इंसान हुआ लाशें-लाशें।
प्र. अद्भुत रस किसे कहते है? उदाहरण सहित समझाइऐ
विभाव, अनुभाव, संचारी भाव के योग से विस्मय/आश्चर्य नामक स्थायी भाव द्वारा अद्भुत रस की उत्पत्ति होती है।
उदहारण -
1.नारी बीच सारी है कि सारी बीच नारी है
नारी ही की सारी है कि नारी की ही सारी है।
2. देख यशोदा शिशु के मुख में, सकल विश्व की माया
क्षण भर को वह बनी अचेतन, हिल न सकी कोमल काया।
3. अखिल भुवन चर अचर सव हरि मुख में लखि मातु
यकित भई गद-गद वचन विकसिन द्रग पुलकात
प्र. शांत रस किसे कहते है? उदाहरण सहित समझाइऐ
विभाव, अनुभाव, संचारी भाव के योग से निर्वेद/शम नामक स्थायी भाव द्वारा शांत रस की उत्पत्ति होती है।
उदहारण -
1. चलती चाकी देखकर दिया कबीरा रोई
दुई पाटन के बीच में साबुत बचा न कोई।
2. मन रे तन कागद का पुतला,
लागै बूॅद विनसि जाए छिन में गरब करे क्या इतना।
टीप -
1. श्रंगार रस को रासराज या रसपति कहा जाता है।
2. नाटक में आठ ही रस माने जाते हैं क्योंकि वहां शांत का रस में नहीं गिना जाता।(भरत मुनि ने रसों की संख्या आठ मानी है)
3. श्रंगार रस के व्यापक दायरे में वत्सल रस और भक्ति रस आ जाते हैं इस लिये रसों की संख्या नौ ही मानना ज्यादा उचित है।
Educational Qualification: 1. High School Passed from M.P. Board Bhopal in 2007 with 86%. 2. Higher Secondary (Mathematics) Passed from M.P. Board Bhopal in 2009 with 81 %. (Math’s Mark 97%) 3. B.Sc. (Mathematics) Passed from M.P. Bhoj University Bhopal in 2015 with 63 %. 4. M.Sc. (Mathematics) Passed from M.P. Bhoj University Bhopal in 2017 with 61% 5. Master Of Social Work in Running from Mahatma Gandhi Chitrakoot Gramodaya Vishwavidyalaya, Satna MP Other Qualification: 1. Computer Course of Three Month (CCA) 2. BE (CS) third Sem MPCTM Collage. 3. BTC 20 Days Camp Surya Foundation from Delhi. 4. OTC in RSS second Year
प्र. प्रकाशिकी से आप क्या समझते है? कितने प्रकार की होती है?
प्रकाशिकी - प्रकाशिकी भौतिकी की वह शाखा है जिसके अन्तर्गत प्रकाश ऊर्जा और उस से सम्बन्धित परिघटनाओं जैसे - प्रकाश का परावर्तन, अपवर्तन, व्यतिकरण, विवर्तन, ध्रुवण आादि का अध्ययन किया जाता है।
प्रकाशिकी की दो शाखाऐ है-
१. किरण प्रकाशिकी
२. तंरग प्रकाशिकी
1. किरण प्रकाशिकी- किरण प्रकाशिकी के अन्तर्गत प्रकाश से संबन्घित परिघटनाओं का अध्ययन इस आधार पर किया जाता है कि प्रकाश, किरणों से मिलकर बना है।
2. तंरग प्रकाशिकी - तंरग प्रकाशिकी के अन्तर्गत प्रकाश से संबन्धित परिघटनाओं का अध्ययन इस आधार पर किया जाता है कि प्रकाश तंरग के रूप में एक स्थान से दुसरे स्थान तक गमन करता है।
प्र. प्रकाश का परावर्तन क्या है? इसके नियम लिखिऐ।
उ. प्रकाश का किसी सतह से टकराकर उसी माघ्यम में वापस आ जाना प्रकाश का परावर्तन कहलाता है।
परावर्तक पृष्ठ - प्रकाश का जिस पृष्ठ से परावर्तन होता है उस पृष्ठ को परावर्तक पृष्ठ कहते है। दैनिक जीवन में परावर्तक पृष्ठ के रुप में समतल दर्पण का उपयोग किया जाता है।
प्रतिबिंम्बि की स्थिति- वक्रताकेन्द्र और मुख्यफोकस के बीच
प्रतिबिंम्ब का आकार - वस्तु से छोटा
प्रतिबिम्बि की प्रकृति- वास्तविक एवं उल्टा
स्थिति 3. जब वस्तु वक्रता केन्द्र पर स्थित हो।
प्रतिबिंम्बि की स्थिति- वक्रता केन्द्र पर
प्रतिबिंम्ब का आकार - वस्तु के बराबर
प्रतिबिम्बि की प्रकृति- वास्तविक एवं उल्टा
स्थिति 4. जब वस्तु वक्रता केन्द्र और मुख्य फोकस के बीच स्थित हो।
प्रतिबिंम्बि की स्थिति- वक्रता केन्द्र और अनन्त के बीच
प्रतिबिंम्ब का आकार - वस्तु के बडा
प्रतिबिम्बि की प्रकृति- वास्तविक एवं उल्टा
स्थिति 5. जब वस्तु फोकस पर स्थित हो।
प्रतिबिंम्बि की स्थिति- अनन्त पर
प्रतिबिंम्ब का आकार - वस्तु के बहुत बडा
प्रतिबिम्बि की प्रकृति- वास्तविक एवं उल्टा
स्थिति 6. जब वस्तु फोकस और धु्रव के बीच स्थित हो।
प्रतिबिंम्बि की स्थिति- दर्पण के पीछे
प्रतिबिंम्ब का आकार - वस्तु के बडा
प्रतिबिम्बि की प्रकृति- आभासी एवं सीधा
उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिंम्ब का बनना - उत्तल दर्पण के सामने स्थित वस्तु का प्रतिम्बिंब दर्पण के दूसरी ओर (दर्पण के पीछे) दर्पण के ध्रुव और फोकस के बीच बनता है जो वस्तु से छोटा, आभासी और सीधा होता है।
प्र. दूरी मापने के लिए उपयोग की जाने वाली चिन्ह परिपाटी को समझाइऐ ।
दर्पण मे दूरियॉं मापने के लिए नई कार्तीय चिन्ह परिपाटी का उपयोग करते है। यह निम्नवत् है-
1. वस्तु को दर्पण के बायाीें ओर स्थित माना जाता है।
2. सभी दूरियॉं दर्पण के ध्रुव से मापी जाती है।
3. दर्पण पर पॉलिस दायीं ओर से की जाती है।
4. प्रकाश किरण दर्पण पर बायीं ओर से आपतित होंती है।
5. आपतित किरण की दिशा मे मापी गई दूरियॉ धनात्मक तथा इसके विपरीत दिशा में मापी गई दूरियॉ ऋणात्मक मानी जाती है।
6. मुख्य अक्ष के लम्बवत् ऊपर की ओर मापी गई दूरियॉ धनात्मक तथा नीचे की ओर मापी गई दूरियॉं ऋणात्मक मानी जाती है।
7. दर्पण के ध्रुव से वस्तु की दूरी को u से, प्रतिबिंम्ब की दूरी को v से, फोकस दूरी को f से प्रदर्शित करते है।
8. वस्तु की लम्बाई को O से तथा प्रतिबिम्ब की लम्बाई को I से प्रदर्शित करते है।
प्र. किसी अवतल दर्पण के लिए सिद्ध कीजिए कि फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है?
अथवा
किसी अवतल दर्पण के लिए सिद्ध कीजिए कि f=R/2
Educational Qualification: 1. High School Passed from M.P. Board Bhopal in 2007 with 86%. 2. Higher Secondary (Mathematics) Passed from M.P. Board Bhopal in 2009 with 81 %. (Math’s Mark 97%) 3. B.Sc. (Mathematics) Passed from M.P. Bhoj University Bhopal in 2015 with 63 %. 4. M.Sc. (Mathematics) Passed from M.P. Bhoj University Bhopal in 2017 with 61% 5. Master Of Social Work in Running from Mahatma Gandhi Chitrakoot Gramodaya Vishwavidyalaya, Satna MP Other Qualification: 1. Computer Course of Three Month (CCA) 2. BE (CS) third Sem MPCTM Collage. 3. BTC 20 Days Camp Surya Foundation from Delhi. 4. OTC in RSS second Year