May 22, 2024

कक्षा 10 हिंदी व्याकरण (अलंकर )

अलंकार 

अलंकार का शाब्दिक अर्थ हैै ‘‘आभूषण‘‘।  काव्य की शोभा में वृद्धि करने वाले  कारकों को अलंकार कहते है। जिस प्रकार आभूषण धारण करने से स्त्री के सुन्दरता में वृद्धि होती है उसी प्रकार अलंकार काव्य में सुन्दरता, चमत्कार तथा रोचकता उत्पन्न करतें है।
अलंकार तीन प्रकार के होते हैं।
1. शब्दाअलंकार - जिस रचना में शब्दों के कारण चमत्कार होता है  वंहा शब्दालंकार होता है 
जैसे - अनुप्रास अलंकार, श्लेष अलंकार, यमक अलंकार आदि  
2. अर्थ अलंकार - जिस रचना में अर्थ  के कारण चमत्कार होता है  वंहा अर्थालंकार होता है 
जैसे - उपमा अलंकार, उत्प्रेक्षा अलंकार, और रूपक अलंकार आदि
3. उभयालंकार -  जिस रचना में शब्द और अर्थ  दोनों  के कारण चमत्कार होता है  वंहा उभयालंकार  होता है  
 
अनुप्राश अलंकार - व्यंजन वर्णों की आवृति (जब एक वर्ण या अक्षर दो या दो से अधिक बार आया हो) 
उदाहरण - 
1. रघुपति राघव राजाराम। 
    पतित पावन सीताराम।। 
    ( र वर्ण की आवृति  3 बार  हुई है)
2. चंचल सा वदन चंचल चितवन। 
    (च वर्ण की आवृति बार-2 हुई है)

यमक अलंकार - जहाॅं एक शब्द एक से अधिक बार प्रयुक्त हो और उसके अर्थ हर बार अलग अलग हों 
उदाहरण -
1. कनक कनक तें सौ गुनी मादकता अधिकाय। 
    वा खाय बौराय जग, या पाय बौराय।
    ( पहले कनक का अर्थ है धतुरा  और दुसरे कनक का अर्थ गई सोना )
2. सजना है मुझे, सजना के लिये।
    (पहले सजना का मतलब है मेकप करना और दूसरे सजना का मतलब है पति)
3. काली घटा का घमंड घटा। 
    (पहली घटा का मतलब है घने बादल और दूसरी घटा का मतलब है घमंड कम होना )
4. तीन बेर खाती थी, वे तीन बेर खती है।
    (पहले तीन बेर का मतलब है तीन बार खाना और दूसरे तीन बेर का मतलब है कि तीन बेर
5. ये सूट तुझपे सूट करता। 

श्लेष अलंकार - एक शब्द में एक से अधिक अर्थ  जुडे/चिपके हों अर्थात् कोई शब्द एक ही बार प्रयुक्त हो किंतु प्रसंग भेद में उसके अर्थ अलग अलग हों।)
उदाहरण- 
रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून।
 पानी गये न उबरै, मोती मानुष चून ।।           
 (मोती-चमक,मानुष-प्रतिष्ठा,चून-जल)

अतिश्योक्ति अलंकार - जहाॅं किसी बात का या लोक -मर्यादा का उल्लघंन करके अर्थात बहुत बढ़ा चढ़ा कर वर्णन किया जाता है वहां अतिश्योक्ति अलंकार होता है 
उदाहरण - 
1. पानी परात को हाथ छुओ नही,
    नयनन के जल सों पग धोए।
2. हनुमान की पूॅछ में, लगन न पायी आग।
    लंका सारी जरि गयी, गये निशाचर भाग।

अन्योक्ति अलंकार - जहाँ किसी उक्ति के माध्यम से किसी अन्य को कोई बात कही जाए, वहाँ अन्योक्ति अलंकार होता है। कथन कहीं,निशाना कहीं। अतः यहाँ अन्योक्ति अलंकार है। 
जैसे -
1.  नहिं पराग नहिं मधुर मधु, नहिं विकास इहि काल। 
    अली कली ही सौं बंध्यो, आगे कौन हवाल
स्पष्टीकरण - यंहा कवि ने भौरे को निशाना साधकर महाराज जय सिंह को उनकी वास्तविक स्थिति का आभास कराया है 
2. माली आवत देखि के, कलियाँ करैं पुकार।
     फूली-फूली चुनि गई, कालि हमारी बार॥
 मृत्यु रूपी माली को आता देखकर अल्पवय जीव कहता है कि जो पुष्पित थे अर्थात् पूर्ण विकसित हो चुके थे, उन्हें काल चुन ले गया।
 
मानवीकरण अलंकार -  जहाँ पर स्थिर और निर्जीव चीजों का मनुष्य के जैसा बर्ताव और क्रियाएं करने का वर्णन हो वहां पर मानवीकरण अलंकार होता है।
या   
जब जड़ पदार्थों और प्रकृति के अंग ( जैसे- नदी, पर्वत, फूल, बादल पेड़, लताएँ, झरने, हवा, पत्थर, पक्षी, इत्यादि) मनुष्य जैसा क्रिया या व्यवहार करता हुआ दिखाया जाता है तब उसे मानवीकरण अलंकार कहा जाता है। 

उदाहरण -
1. जगीं वनस्पतियाँ अलसाई मुख धोतीं शीतल जल से।
(यहाँ पर प्रकृति को एसे वर्णन किया है जैसे मानव के रुपों में वर्णन किया है।
2. फूल हँसे कलियाँ मुसकाई। मेघ आये बड़े बन-ठन के संवर के।

पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार - जहाँ काव्य में एक ही शब्द की बार-बार आवृत्ति हो किंतु अर्थ की भिन्नता नही होती है, वहाँ पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार होता है।
उदाहरण -  
मेघमय आसमान से उत्तर रही है 
              वह संध्या सुंदरी परी सी
                   धीरे-धीरे-धीरे

स्पष्टीकरण-  यहाँ पर धीरे शब्द की आवृत्ति हुई है।




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