इकाई - 1 स्थिर वैद्युत
Unit – 1 Electrostatic
अध्याय - 2 स्थिर वैद्युत विभव एवं धारिता
Chapter – 2 Electrostatic Potential and Capacitance
वैद्युत विभव - एकांक धनावेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में जितना कार्य करना पड़ता है, उसे उस बिंदु का वैद्युत विभव कहते हैं। इसे से प्रदर्शित करते हैं।
मानलो एक परीक्षण आवेश q को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में W कार्य करना पड़ता है। तब उस बिंदु का विभव
V =W q ………..... (1)
मात्रक (Units) - समी. (1) से,
V का मात्रक= W का मात्रकq का मात्रक
विभव का SI मात्रक जूल प्रति कूलाम्ब होता है जिसे वोल्ट (volt) कहते है। इसे V से प्रदर्शित करते हैं।
समी. (1) में कार्य w = 1 जूल तथा आवेश q= 1 कूलॉम
V =1 जूल1 कूलॉम=1 जूल प्रति कूलॉम (J/C)
1 वोल्ट - यदि 1 कूलॉम धन आवेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में 1 जूल का कार्य करना पड़े तो उस बिंदु का विभव 1 वोल्ट होता है।
स्पष्ट है कि 1 वोल्ट = 1 जूल प्रति कूलॉम = 1 न्यूटन मीटर प्रति कूलॉम
विभव का विमीय सूत्र - सूत्र - V=wq से
V का विमीय सूत्र=w का विमीय सूत्र q का विमीय सूत्र
V का विमीय सूत्र =MLT-2AT
V का विमीय सूत्र =MLT-3A-1
प्रकृति- कार्य एक अदिश राशि है। अतः विभव भी एक अदिश राशि है।
विभव के प्रकार - विभव दो प्रकार के होते हैं-
धनात्मक विभव और
ऋणात्मक विभव।
धनात्मक विभव - जब एकांक धनावेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में वैद्युत बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है, तो उस बिंदु का विभव धनात्मक कहलाता है।
स्पष्ट है कि धनावेश के कारण वैद्युत विभव धनात्मक होगा।
ऋणात्मक विभव - जब एकांक धनावेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में वैद्युत बल द्वारा कार्य किया जाता है, तो उस बिंदु का विभव ऋणात्मक कहलाता है।
स्पष्ट है कि ऋणावेश के कारण वैद्युत विभव ऋणात्मक होगा।
विभांतर -
एकांक धनावेश को विद्युत क्षेत्र में एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में जो कार्य करना पड़ता है, उसे उन दोनों बिंदुओं के बीच का विभवांतर कहते हैं। यह एक अदिश राशि है।
मानलो एक परीक्षण आवेश q0 को विद्युत क्षेत्र में बिंदु A से बिंदु B तक ले जाने में W कार्य करना पड़ता है। तब दोनों बिंदुओं के बीच विभवांतर
V=VB-VA= Wq0
जहाँ, VA और VB क्रमशः बिंदु A और B के विभव हैं।
मात्रक - विभवांतर का SI मात्रक वोल्ट है।
समी. (2) से,
विभवांतर = 1 जूल 1 कूलोम = 1 वोल्ट
प्र0 वैधुत विभव का भौतिक अर्थ और पृथ्वी का विभव समझाइए
जिस प्रकार किसी पात्र में द्रव डालने पर उसका तल बढ़ने लगता है या फिर किसी वस्तु को ऊष्मा देने पर उसका ताप बढ़ने लगता है, उसी प्रकार किसी चालक को धनावेश देने पर उसका विद्युत तलं बढ़ने लगता है। इसे हम कहते हैं कि किसी चालक को धनावेश देने पर उसका विभव बढ़ने लगता है।
जिस प्रकार द्रव में भरे दो पात्रों को नीचे से एक पाइप द्वारा जोड़ दिया जाए जिनमें द्रव का तल भिन्न-भिन्न है, तो द्रव उच्च तल वाले पात्र से कम तल वाले पात्र की ओर तब तक प्रवाहित होती है जब तक कि दोनों पात्रों में द्रव का तल समान नहीं हो जाता। ठीक इसी प्रकार यदि विभिन्न विभव वाले दो चालकों को एक चालक तार द्वारा जोड़ दिया जाए तो आवेश अधिक विभव वाले चालक से कम विभव वाले चालक की ओर प्रवाहित होने लगता है। यह प्रवाह तब तक जारी रहता है जब तक कि दोनों का विभव समान न हो जाए।
अतः किसी चालक का विभव उसकी एक विद्युतीय अवस्था है जिस पर आवेश प्रवाह की दिशा निर्भर करती है यदि उसे अन्य चालक के विद्युतीय संपर्क में रखा जाए।
पृथ्वी का विभव - हम जानते हैं कि किसी भी स्थान की ऊँचाई समुद्र तल की ऊँचाई को मानक (Standard) शून्य मानकर की जाती है। इसका कारण यह है कि समुद्र से कितना भी पानी निकालें या उसमें कितना भी पानी डाले उसके जल स्तर में कोई उल्लेखनीय परिवर्तन नहीं होता है। किसी वस्तु के विभव की माप पृथ्वी के विभव को मानक मानकर की जाती है। पृथ्वी के मानक विभव को शून्य माना जाता है।
अध्याय - 2
स्व - मूल्यांकन
- समविभव पृष्ठ क्या है ? इसके गुण लिखिए।
- किसी चालक की धारिता से आप क्या समझते हैं ? इसका SI मात्रक लिखिए। किसी चालक की धारिता को कौन-कौन से कारक प्रभावित करते हैं ?
- संधारित्रों को श्रेणीक्रम में किस प्रकार संयोजित किया जाता है ? चित्र खींचकर समझाइये तथा तुल्य धारिता हेतु व्यंजक ज्ञात कीजिए।
- एक बिंदु आवेश के कारण किसी बिंदु पर वैद्युत विभव का व्यंजक ज्ञात कीजिए।
- समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता हेतु व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। इसकी धारिता को कौन-कौन से कारक प्रभावित करते है ?.
- वैद्युत द्विध्रुव के कारण किसी भी बिंदु पर वैद्युत विभव के लिए व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।
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