Layak sir Physics
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लघु उत्तरीय प्रश्न अंक 2
इकाई - 1 स्थिर विद्युत
अध्याय - 1 वैधुत आवेश एवं क्षेत्र
प्र0 स्थिर विद्युत या स्थिर वैद्युतिकी किसे कहते है ? What is static electricity or electrostatics?
भौतिकी की वह शाखा जिसके अंतर्गत स्थिर आवेशों का अध्ययन किया जाता है, उसे स्थिर वैद्युत या स्थिर वैद्युतिकी कहा जाता है। The branch of physics which studies stationary charges is called static electricity or electrostatics.
प्र0 वैद्युत या विद्युत किसे कहते हैं ? समझाए What is called electricity? Explain
विद्युत वह ऊर्जा जिसके कारण किसी पदार्थ में हल्की वस्तुओं को आकर्षित करने का गुण उत्पन्न हो जाता है यह विद्युत रगड़ने से या घर्षण से उत्पन्न होती है, इसलिए इसे घर्षण विद्युत कहते हैं। Electricity is the energy due to which a substance acquires the property of attracting light objects. This electricity is produced by rubbing or friction, hence it is called frictional electricity.
विद्युन्मय(Electrified)- जिस पदार्थ में हल्की वस्तुओं को आकर्षित करने का गुण उत्पन्न हो जाता है, उसे विद्युन्मय कहते हैं। विद्युन्मय पदार्थ को 'आवेशित' (Charged) पदार्थ भी कहते हैं। The substance which develops the property of attracting light objects is called electrified. The electrified substance is also called 'charged' substance.
प्र0 विद्युत आवेश किसे कहते है? यह कितने प्रकार का होता है? समझाइए। What is electric charge? How many types are there? Explain.
वैद्युत आवेश एक भौतिक राशि है जिसे अर्जित (प्राप्त) कर लेने पर कोई पदार्थ विद्युन्मय (आवेशित) हो जाता है और विद्युतीय गुणों का प्रदर्शन करता है। Electric charge is a physical quantity which when acquired makes a substance electrified (charged) and exhibits electrical properties.
वैद्युत आवेश एक अदिश राशि है। इसका SI मात्रक कूलॉम (coulomb) तथा संकेत C होता है। Electric charge is a scalar quantity. Its SI unit is coulomb and symbol is C.
आवेश दो प्रकार के होते हैं— There are two types of charges-
(i) धनावेश (Positive charge)- काँच की छड़ को रेशम के कपड़े से रगड़ने पर काँच की छड़ में उत्पन्न आवेश को धनावेश कहते हैं। When a glass rod is rubbed with a silk cloth, the charge generated in the glass rod is called positive charge.
(ii) ऋणावेश (Negative charge)- एबोनाइट की छड़ को ऊनी कपड़े या बिल्ली की खाल से रगड़ने पर एबोनाइट की छड़ में उत्पन्न आवेश को ऋणावेश कहते हैं। The charge produced in the ebonite rod when it is rubbed with a woolen cloth or cat's skin is called negative charge.
प्र0 पदार्थ को विद्युत आवेश की गति के आधार पर कितने भागों में विभाजित किया गया है समझाइए। Explain how many parts the matter is divided into based on the movement of electric charge.
पदार्थ को विद्युत आवेश की गति के आधार पर तीन वर्गों में विभाजित किया गया है जो निम्न वत है Matter is divided into three classes based on the movement of electric charge which are as follows.
चालक conductors
विद्युत विरोधी electric insulators
अर्धचालक semiconductors
1. चालक(Conductors)- ऐसे पदार्थ जो अपने में से वैद्युत आवेश बहने देते हैं, उन्हें चालक कहते हैं। जैसे - धातुएँ, पृथ्वी, मानव तथा जन्तु शरीर चालक के उदाहरण हैं। Substances that allow electric charge to flow through them are called conductors. For example, metals, earth, human and animal bodies are examples of conductors.
# चाँदी आवेश का सर्वोत्तम चालक है। चालकों में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या अत्यधिक होती है। ये मुक्त इलेक्ट्रॉन चालक के अंदर गति करने के लिए स्वतंत्र होते हैं। Silver is the best conductor of charge. Conductors have a large number of free electrons. These free electrons are free to move inside the conductor.
2. विद्युतरोधी Electric insulators- ऐसे पदार्थ जो अपने में से वैद्युत आवेश को बहने नहीं देते उन्हें विद्युतरोधी कहते हैं। Substances that do not allow electric charge to flow through them are called insulators.
जैसे - लकड़ी, रबर, काँच, प्लॉस्टिक, नायलॉन आदि विद्युतरोधी हैं। Such as – wood, rubber, glass, plastic, nylon etc. are electrical insulators.
# विद्युतरोधी में मुक्त इलेक्ट्रॉनों का अभाव रहता है। Insulators lack free electrons.
3. अर्धचालक Semiconductors- ऐसे पदार्थ जिनकी चालकता चालक और विद्युतरोधी के बीच होती है। ताप बढ़ाने पर अर्धचालकों की चालकता बढ़ जाती है जबकि चालकों की चालकता घट जाती है। Substances whose conductivity lies between conductors and insulators. On increasing the temperature, the conductivity of semiconductors increases while that of conductors decreases.
जैसे - सिलिकॉन, जर्मेनियम आदि अर्धचालक के उदाहरण हैं। For example – silicon, germanium etc. are examples of semiconductors.
प्र0 विद्युत आवेश के मूल गुण कौन-कौन से हैं समझाइए Explain what are the basic properties of electric charge.
विद्युत आवेश के मूल गुण निम्न है- The basic properties of electric charge are as follows-
1. आवेश का संरक्षण Conservation of charge
2. आवेश का क्वांटम Quantum of charge
3. आवेशों की योग्यता Quantity of charges
1. आवेश का संरक्षण Conservation of charge - आवेश संरक्षण नियम के अनुसार, किसी विलगित अथवा पृथक्कृत निकाय (Isolated system) का कुल आवेश संरक्षित रहता है अर्थात् आवेश न तो उत्पन्न किया जा सकता है ना लगाया और न ही नष्ट किया जा सकता है। According to the law of conservation of charge, the total charge of an isolated system is conserved, that is, the charge can neither be created nor added nor destroyed.
जैसे - जब कांच की छड़ को रेशम के कपड़े से रगड़ा जाता है तो कांच की छड़ में धन आवेश की मात्रा रेशम के कपड़े में ऋण आवेश की मात्रा के ठीक बराबर होती है। For example – when a glass rod is rubbed with a silk cloth, the amount of positive charge in the glass rod is exactly equal to the amount of negative charge in the silk cloth.
2. आवेश का क्वांटमीकरण Quantum of charge - किसी आवेशित पदार्थ पर आवेश का मात्रा मूल आवेश e के मात्रा के पूर्ण गुणज में होता है। इसे ही आवेश का क्वांटमीकरण कहते हैं। इस प्रकार यदि किसी पदार्थ पर आवेश का परिमाण q हो, तो The amount of charge on a charged substance is an absolute multiple of the amount of the fundamental charge e. This is called quantization of charge. Thus, if the magnitude of charge on a substance is q, then
q = ne
जहाँ n कोई धनात्मक या ऋणात्मक पूर्णांक है। अर्थात् Where n is any positive or negative integer. That is
n = ±1, ±2, ±3, ±4, ...........
मूल आवेश क्या है? What is fundamental charge?
मूल आवेश :- यदि n=1 हो तो Fundamental charge: - If n = 1 then
1 इलेक्ट्राॅन पर उपस्थ्ति आवेश को मूल आवेश कहते है इसे e से प्रदर्शित करतें है। इसका मान 1.6×10-19 कुलाॅम है। The charge present on 1 electron is called fundamental charge and is represented by e. Its value is 1.6×10-19 coulomb.
3. आवेशों की योज्यता Quantity of charges- किसी भी पदार्थ में कुल आवेश उसके विभिन्न भागों में उपस्थित समस्त आवेशों के बीजीय योग के बराबर होता है। The total charge in any substance is equal to the algebraic sum of all the charges present in its various parts.
प्र0 स्थिर वैद्युत के अन्तर्गत कुलाॅम के व्युत्क्रम वर्ग के नियम को लिखिए तथा इसकी सहायता से एकांक आवेश को परिभाषित कीजिए। Write Coulomb's inverse square law under static electricity and define unit charge with its help.
अथवा
दो बिन्दु आवेशों के बीच लगने वाले आकर्षण या प्रतिकर्षण बल सम्बन्धी कुलाॅम नियम लिखिए तथा SI पद्धति में बल का व्यंजक ज्ञात कीजिए। Write Coulomb's law regarding the force of attraction or repulsion between two point charges and find the expression of force in SI system.
कुलाॅम के नियम अनुसार ‘‘ किन्ही दो स्थिर बिन्दु आवेशो के बीच लगने वाले बल का मान उन आवेशों के परिणामों बीके गुणनफल के समानुपाती तथा बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है‘‘ According to Coulomb's law, "the force between two stationary point charges is proportional to the product of the magnitude of their charges and inversely proportional to the square of the distance between them."
यदि q1व q2 परिमाण के दो बिन्दु आवेश एक दूसरे से r दूरी पर स्थित हो तथा उनके बीच लगने वाला बल f हो तो If two point charges of magnitude q1 and q2 are located at a distance r from each other and the force between them is f, then
K एक समानुपाती नियातांक है जो मापन की पद्धति एवं बीच के माध्यम पर निर्भर करता है। K is a proportionality constant which depends on the method of measurement and the intermediate medium.
SI पद्धति में, वायु या निर्वात में - In the SI system, in air or vacuum -
यदि समान परिमाण के दो सजातीय आवेश वायु या निर्वात् में 1 मीटर की दूरी पर स्थित होने पर एक दूसरे को 9×109 न्यूटन बल से प्रतिकर्षित करे तो प्रत्येंक आवेश एकांक आवेश कहलाता है। If two homogeneous charges of equal magnitude repel each other with a force of 9×109 Newton when situated at a distance of 1 meter in air or vacuum, then each charge is called unit charge.
प्र0 विद्युत बल रेखाओं को परिभाषित कीजिए तथा इनके कोई चार गुण लिखिऐ Define electric force lines and write any four of their properties.वि़द्युत बल रेखा विद्युत क्षेत्र में खीचा गया वह काल्पनिक व निष्कोण वक्र है जिस पर एक स्वतंत्र धनावेश (परीक्षण आवेश) गमन कर सकता है। The electric field line is an imaginary smooth-angled curve drawn in an electric field on which a free positive charge (test charge) can move.
प्र0 वैद्युत द्विध्रुव आघुर्ण की परिभाषा लिखिए इसका मात्रक एवं विमीय सूत्र लिखिए। Write the definition of electric dipole moment, write its unit and dimensional formula.
विद्युत द्विध्रुव (Electric dipole):- यदि दो समान परिणाम के बराबर एवं विपरीत आवेश एक दूसरे से अल्प दूरी पर स्थित हो तो इस प्रकार का निकाय विद्युत द्विध्रुव कहलाता है।
माना q1व q2 दो समान परिणाम के आवेश एक दूसरे से २l दूरी पर स्थित हो, तब
अध्याय - 1
स्व - मूल्यांकन
प्रश्न. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
आवेश का विमीय सूत्र है।
[AT]
2. दो सजातीय आवेश एक-दूसरे को करते हैं।
प्रतिकर्षित
3. दो विजातीय आवेश एक-दूसरे को करते हैं। -
आकर्षित
विद्युत् क्षेत्र की तीव्रता का SI मात्रक है।
न्यूटन/कूलॉम
विद्युत् क्षेत्र का विमीय सूत्र है।
[MLTA¹]
दो बिन्दु आवेश-q तथा +q दूरी l पर स्थित हैं। द्विध्रुव आघूर्ण होगा।
p=q × 2l
एकसमान विद्युत् क्षेत्र E में द्विध्रुव आघूर्ण पर लगने वाला अधिकतम बल आघूर्ण. है।
pE
वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण एक राशि है।
सदिश
S.I. पद्धति में विद्युत्शीलता का मात्रक. होता है।
कूलॉम /(न्यूटन मीटर²)
कूलॉम व्युत्क्रम वर्ग नियम केवल उस बिन्दु आवेशों के लिए सत्य होता है जो ……….अवस्था में रहते हैं।
विराम।
एक बिंदु आवेश के कारण उससे r दूरी पर स्थित किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यजंक निगमित कीजिए।
विद्युत द्विध्रुव के कारण अक्षीय रेखा के अनुदिश किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए।
गौस की प्रमेय लिखिए तथा सिद्ध कीजिए।
4 माइक्रो कुलॉम आवेश निर्वात में स्थित है उससे 2 मीटर की दूरी पर स्थित किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता की गणना कीजिए।
एक समान विद्युत क्षेत्र में विद्युत द्विध्रुव पर लगने वाले बल युग्म आघूर्ण के लिए व्यंजक ज्ञात कीजिए
अनत्त लंबाई के एकसमान आवेशित सीधे तार के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए।
वायु में एक दूसरे से 30 सेमी की दूरी पर रखे दो छोटे आवेशित गोले पर क्रमशः 2× 10^-7 तथा 3× 10^-7 आवेश हैं उनके बीच कितना बल है?
इकाई - 1 स्थिर वैद्युत
अध्याय - 2 स्थिर वैद्युत विभव एवं धारिता
वैद्युत विभव - एकांक धनावेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में जितना कार्य करना पड़ता है, उसे उस बिंदु का वैद्युत विभव कहते हैं। इसे से प्रदर्शित करते हैं।
मानलो एक परीक्षण आवेश q को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में W कार्य करना पड़ता है। तब उस बिंदु का विभव
V =W q ………..... (1)
मात्रक (Units) - समी. (1) से,
V का मात्रक= W का मात्रकq का मात्रक
विभव का SI मात्रक जूल प्रति कूलाम्ब होता है जिसे वोल्ट (volt) कहते है। इसे V से प्रदर्शित करते हैं।
समी. (1) में कार्य w = 1 जूल तथा आवेश q= 1 कूलॉम
V =1 जूल1 कूलॉम=1 जूल प्रति कूलॉम (J/C)
1 वोल्ट - यदि 1 कूलॉम धन आवेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में 1 जूल का कार्य करना पड़े तो उस बिंदु का विभव 1 वोल्ट होता है।
स्पष्ट है कि 1 वोल्ट = 1 जूल प्रति कूलॉम = 1 न्यूटन मीटर प्रति कूलॉम
विभव का विमीय सूत्र - सूत्र - V=wq से
V का विमीय सूत्र=w का विमीय सूत्र q का विमीय सूत्र
V का विमीय सूत्र =MLT-2AT
V का विमीय सूत्र =MLT-3A-1
प्रकृति- कार्य एक अदिश राशि है। अतः विभव भी एक अदिश राशि है।
विभव के प्रकार - विभव दो प्रकार के होते हैं-
धनात्मक विभव और
ऋणात्मक विभव।
धनात्मक विभव - जब एकांक धनावेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में वैद्युत बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है, तो उस बिंदु का विभव धनात्मक कहलाता है।
स्पष्ट है कि धनावेश के कारण वैद्युत विभव धनात्मक होगा।
ऋणात्मक विभव - जब एकांक धनावेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में वैद्युत बल द्वारा कार्य किया जाता है, तो उस बिंदु का विभव ऋणात्मक कहलाता है।
स्पष्ट है कि ऋणावेश के कारण वैद्युत विभव ऋणात्मक होगा।
विभांतर -
एकांक धनावेश को विद्युत क्षेत्र में एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में जो कार्य करना पड़ता है, उसे उन दोनों बिंदुओं के बीच का विभवांतर कहते हैं। यह एक अदिश राशि है।
मानलो एक परीक्षण आवेश q0 को विद्युत क्षेत्र में बिंदु A से बिंदु B तक ले जाने में W कार्य करना पड़ता है। तब दोनों बिंदुओं के बीच विभवांतर
V=VB-VA= Wq0
जहाँ, VA और VB क्रमशः बिंदु A और B के विभव हैं।
मात्रक - विभवांतर का SI मात्रक वोल्ट है।
समी. (2) से,
विभवांतर = 1 जूल 1 कूलोम = 1 वोल्ट
प्र0 वैधुत विभव का भौतिक अर्थ और पृथ्वी का विभव समझाइए
जिस प्रकार किसी पात्र में द्रव डालने पर उसका तल बढ़ने लगता है या फिर किसी वस्तु को ऊष्मा देने पर उसका ताप बढ़ने लगता है, उसी प्रकार किसी चालक को धनावेश देने पर उसका विद्युत तलं बढ़ने लगता है। इसे हम कहते हैं कि किसी चालक को धनावेश देने पर उसका विभव बढ़ने लगता है।
जिस प्रकार द्रव में भरे दो पात्रों को नीचे से एक पाइप द्वारा जोड़ दिया जाए जिनमें द्रव का तल भिन्न-भिन्न है, तो द्रव उच्च तल वाले पात्र से कम तल वाले पात्र की ओर तब तक प्रवाहित होती है जब तक कि दोनों पात्रों में द्रव का तल समान नहीं हो जाता। ठीक इसी प्रकार यदि विभिन्न विभव वाले दो चालकों को एक चालक तार द्वारा जोड़ दिया जाए तो आवेश अधिक विभव वाले चालक से कम विभव वाले चालक की ओर प्रवाहित होने लगता है। यह प्रवाह तब तक जारी रहता है जब तक कि दोनों का विभव समान न हो जाए।
अतः किसी चालक का विभव उसकी एक विद्युतीय अवस्था है जिस पर आवेश प्रवाह की दिशा निर्भर करती है यदि उसे अन्य चालक के विद्युतीय संपर्क में रखा जाए।
पृथ्वी का विभव - हम जानते हैं कि किसी भी स्थान की ऊँचाई समुद्र तल की ऊँचाई को मानक (Standard) शून्य मानकर की जाती है। इसका कारण यह है कि समुद्र से कितना भी पानी निकालें या उसमें कितना भी पानी डाले उसके जल स्तर में कोई उल्लेखनीय परिवर्तन नहीं होता है। किसी वस्तु के विभव की माप पृथ्वी के विभव को मानक मानकर की जाती है। पृथ्वी के मानक विभव को शून्य माना जाता है।
अध्याय - 2
स्व - मूल्यांकन
समविभव पृष्ठ क्या है ? इसके गुण लिखिए।
किसी चालक की धारिता से आप क्या समझते हैं ? इसका SI मात्रक लिखिए। किसी चालक की धारिता को कौन-कौन से कारक प्रभावित करते हैं ?
संधारित्रों को श्रेणीक्रम में किस प्रकार संयोजित किया जाता है ? चित्र खींचकर समझाइये तथा तुल्य धारिता हेतु व्यंजक ज्ञात कीजिए।
एक बिंदु आवेश के कारण किसी बिंदु पर वैद्युत विभव का व्यंजक ज्ञात कीजिए।
समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता हेतु व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। इसकी धारिता को कौन-कौन से कारक प्रभावित करते है ?.
वैद्युत द्विध्रुव के कारण किसी भी बिंदु पर वैद्युत विभव के लिए व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।
इकाई - 2 विद्युत धारा
अध्याय - 3
प्र. विद्युत धारा किसे कहते है इसका मात्रक एवं 1 ऐम्पियर का परिभाषित कीजिए ।
विद्युत धारा - किसी चालक के किसी परिच्छेद से प्रति एकांक समय में प्रवाहित आवेश की मात्रा को विद्युत धारा कहतें है।
यदि t समय में किसी चालक के परिच्छेद से A आवेश q प्रवाहित होता है तो उस चालक से बहने वाली धारा
विधुत धारा=आवेशसमय …..... (1)
मात्रक - विद्युत धारा का SI मात्रक ऐम्पियर होता है जिसका संकेत I है।
1 ऐम्पियर की परिभाषा - समी. (1) से
यदि आवेश = 1 कुलॉम तथा समय = 1 सेकेण्ड हो तो
विद्युत धारा = 1 कूलाम्ब1 सेकेण्ड =1 एम्पियर
“किसी चालक के किसी परिच्छेद से 1 सेकेण्ड में 1 कुलॉम आवेश प्रवाहित होता है तों उस चालक से बहने वाली विद्युत धारा 1 ऐम्पियर कहलाती है।’’
प्रकृति- विद्युत धारा में परिणाम और दिशा दोनो ही होते है फिर भी विद्युत धारा एक अदिश राशि है।
प्र. धारा घनत्व किसे कहतें है? इसका मात्रक एवं प्रकृति लिखिए।
धारा घनत्व - किसी चालक के प्रति एकांक अनुप्रस्थ परिच्छेद क्षेत्रफल से बहने वाली विद्युत धारा को परिच्छेद के उस बिंदु पर धारा घनत्व कहते हैं। इसे j से प्रदर्शित करते हैं।
यदि किसी चालक के अनुप्रस्थ परिच्छेद क्षेत्रफल A से बहने वाली धारा I हो तो परिछेद के उसे बिंदु पर धारा घनत्व
धारा घनत्व =विद्युत धाराअनुप्रस्थ परिच्छेद का क्षेत्रफल
j =IA
धारा घनत्व का मात्रक- धारा घनत्व का SI मात्रक एम्पीयर प्रति मीटर2 होता है।
प्रकृति -धारा घनत्व एक सदिश राशि है। इसकी दिशा उस बिंदु पर धन आवेश के चलने की दिशा के अनुदिश होती है।
प्र0 अनुगमन वेग किसे कहते हैं समझाइए
अनुगमन वेग - किसी चालक के मुक्त इलेक्ट्रॉन बाह्य विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में एक नियत औसत वेग से प्रवाहित होते हैं इस नियत औसत वेग को अनुगमन वेग या अपवाह वेग कहते हैं इसे अक्षर Vd से प्रदर्शित करते हैं।
अनुगमन वेग का मान बहुत ही कम 10-4 मीटर प्रति सेकंड होता है।
प्र0 विद्युत धारा और अनुगमन वेग में संबंध स्थापित कीजिए।
माना PQ एक चालक है जिसकी लंबाई l तथा अनुप्रस्थ परिच्छेद का क्षेत्रफल A है
तब चालक का आयतन = A l
यदि चालक के प्रति एकांक आयतन में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या n है तो चालक में
मुक्त इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या N= n A
यदि प्रत्येक इलेक्ट्रॉन पर आवेश e हो तो
चालक PQ में कुल आवेश q=Ne
q=nAle
बाह्य विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में मुक्त इलेक्ट्रॉन विद्युत क्षेत्र की विपरीत दिशा में अनुगमन वेग Vd से गति करने लगते हैं आवेश को चालक को पार करने में लगा समय t हो तो
t=lVd
इस प्रकार चालक में बहने वाली विद्युत धारा I हो तो
i=qt
i=nAlelVd
i=nAlelVd
i=nAle Vdl
i=nAe Vd
यही विद्युत धारा और धारा घनत्व में अभीष्ट संबंध है।
प्र0 गतिशीलता किसे कहते हैं इसका मात्रक लिखिए।
प्रति एकांक विद्युत क्षेत्र के अनुगमन वेग के परिमाण को आवेश वाहक की गतिशीलता कहते हैं। गतिशीलता को 0 से प्रदर्शित करते हैं
यदि E तीव्रता के विद्युत क्षेत्र में आवेश वाहक द्वारा प्राप्त अनुगमन वेग Vd हो तो
गतिशीलता 0=VdE ………..(1)
मात्रक -समी. (1) से
गति शीलता 0 का मात्रक =Vd का मात्रक E का मात्रक
गतिशीलता का मात्रक = मीटर प्रति सेकंड/बोल्ट प्रति मीटर
गतिशीलता का SI मात्रक मीटर2 प्रति वोल्ट सेकंड होता है।
प्र0 ओम का नियम क्या है लिखिए। इसके लागू होने के लिए क्या अनिवार्यता है।
भौतिक विद जॉर्ज साइमन ओम ने विद्युत धारा और विभांतर के बीच संबंध स्थापित किया किसी चालक में बहने वाली विद्युत धारा और विभांतर में संबंध बताने वाले नियम को ओम का नियम कहते हैं।
ओम के नियम के अनुसार “यदि किसी चालक की भौतिक अवस्था (ताप, विकृति आदि) में परिवर्तन न हो उसमें बहने वाली धारा चालक के सिरों के बीच लगाए गए विभांतर के समानुपाती होती है।”
यदि किसी चालक सिरों के बीच V विभांतर लगाने पर उसमें बहने वाली धारा I हो तो
ओम के नियम के अनुसार
V I
V IR
यहां R एक अनुपातिक नियतांक है जिसे चालक का प्रतिरोध कहते हैं।
प्र0 प्रतिरोध से आप क्या समझते हैं इसका मात्रक एवं विमीय सूत्र लिखिए तथा एक ओम को परिभाषित कीजिए What do you understand by resistance? Write its unit and dimensional formula and define one ohm.
प्रतिरोध Resistance - किसी चालक द्वारा विद्युत धारा के मार्ग में डाली की रुकावट को उस चालक का प्रतिरोध कहते हैं। तथा ऐसे चालक को प्रतिरोधक कहते हैं। The obstruction placed by a conductor in the path of electric current is called the resistance of that conductor. And such a conductor is called a resistor.
किसी चालक का प्रतिरोध उसके सिरों के बीच लगाकर विभांतर और उसमें बहने वाली विद्युत धारा के अनुपात के बराबर होता है। यदि किसी चालक के सिरों के बीच V विभांतर लगाने से उसमें बहने वाली धारा I हो तो उसे चालक का प्रतिरोध The resistance of a conductor is equal to the ratio of the potential difference applied between its ends and the electric current flowing through it. If the current flowing through a conductor is I when a potential difference V is applied between its ends, then the resistance of the conductor.
प्रतिरोध=विभान्तरविद्युत धारा
R=VI …...….(1)
मात्रक - प्रतिरोध का SI मात्रक वोल्ट प्रति एम्पीयर होता है जिससे ओह्म कहते हैं।
1 ओह्म - समी. (1) में
V= 1 वोल्ट तथा I = एम्पीयर रखने पर
Physics by लायक सर
Mob. 9754956951
इकाई - 3 विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव एवं चुंबकत्व
अध्याय- 4 गतिमान आवेश और चुंबकत्व
प्र0 धारा का चुंबकीय प्रभाव किसे कहते हैं? समझाइए Explain what is the magnetic effect of current?
जब किसी चालक में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो चालक के चारों ओर विद्युत क्षेत्र उत्पन्न होने की घटना को विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव कहते हैं। When electric current is passed through a conductor, the phenomenon of the generated electric field around the conductor is called magnetic effect of electric current.
प्र0 चुंबकीय क्षेत्र दिशा को ज्ञात करने के नियम लिखिए
विद्युत धारा को प्रवाहित करने पर चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने की निम्न नियम में है -
(i) मैक्सवेल का दक्षिणावर्ती कॉर्क पेंच का नियम - एक दक्षिणावर्ती कॉर्क पेंच को इस प्रकार घुमाओ कि उसकी नोक धारा की दिशा में आगे बढ़े तो ऐसा करने के लिए अँगूठे को जिस दिशा में घुमाना पड़ता है, वही चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा होती है इसे मैक्सवेल का दक्षिणावर्ती कॉर्क पेंच का नियम कहते हैं।
(ii) दाएँ हाथ का नियम -एक धारावाही चालक को दाएँ हाथ से इस प्रकार पकड़ो कि अँगूठा धारा की दिशा में हो तो उँगलियों को जिस दिशा में मोड़ना पड़ता है, वही चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा होती है।
प्र0 बायो - सेवर्ट का नियम लिखिए तथा व्यंजक निगमित कीजिये|
भौतिकविद् बायो एवं सेवर्ट ने सरल आकृति के धारावाही चालकों के निकट चुंबकीय क्षेत्र के मापन के लिए एक नियम बताया जिसे बायो-सेवर्ट का नियम कहते हैं।
मानलो XY एक चालक तार है जिसमें विद्युत धारा I प्रवाहित हो रही है। इस चालक के एक अल्पांश dl के कारण किसी बिंदु P पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता dB निम्न कारकों पर निर्भर करती है -
(i) चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता dB चालक में प्रवाहित धारा I के समानुपाती होती है अर्थात्
dB I ……… (1)
(ii) चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता dB अल्पांश की लंबाई dl के समानुपाती होती है अर्थात्
dB dl ……… (2)
(iii) चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता dB अल्पांश और उसको बिंदु P से मिलाने वाली रेखा के बीच का कोण की ज्या sin के समानुपाती होती है अर्थात्
dB sin ……… (3)
(iv) चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता dB अल्पांश से बिंदु P के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होती है अर्थात्
dB 1r 2 ……… (4)
समी. (1) (2) (3) (4) को मिलाकर लिखने पर,
dB I dl sin r 2
dB =K I dl sin r 2 ….....(5)
जहाँ K एक आनुपातिक नियतांक है जिसका मान मापन की पद्धति एवं माध्यम पर निर्भर करता है।
SI में मुक्त आकाश (या निर्वात) के लिए K = ०4 टेस्लामीटर प्रति ऐम्पियर
जहाँ ० निर्वात की चुंबकशीलता (Permeability)
समी. (5) से
dB =०4.I dl sin r 2 …….(6)
जहाँ ० निर्वात की चुंबकशीलता (Permeability)
समी. (5) या (6) द्वारा प्रदर्शित संबंध को ही बायो-सेवर्ट का नियम कहते हैं।
चुंबकीय क्षेत्र की दिशा - मैक्सवेल के दक्षिणावर्ती कॉर्क पेंच के नियम या दाएँ हाथ के नियम 1 के अनुसार धारा अवयव (अल्पांश) के कारण बिंदु P पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा कागज के तल के लंबवत नीचे की ओर होगी।
प्र० एक सीधे तार में 5 ऐम्पियर की धारा दक्षिण से उत्तर की ओर प्रवाहित हो रही है। इस तार के 1 सेमी टुकड़े के कारण उत्तर-पूर्व दिशा में 1 मीटर की दूरी पर स्थित बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात कीजिए।
प्र.: - एक तार में, जो उत्तर-दक्षिण दिशा में रखा है, 8 ऐम्पियर की धारा दक्षिण से उत्तर दिशा में प्रवाहित की जाती है। इस तरह के 1 सेमी टुकड़े के कारण उत्तर-पूर्व दिशा में 100 सेमी दूर स्थित बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात कीजिए।
प्र0 निर्वात की विद्युतशीलता (ε0) एवं चुम्बकीय शीलता (μ0) में सम्बन्ध स्थापित कीजिये
SI में मुक्त आकाश (या निर्वात) के लिए
०4=10-7 ………… (1)
जहाँ ० निर्वात की चुंबकशीलता
1 4० = 9109…………(2)
जहाँ ० निर्वात की विद्युतशीलता
समी (1) व (2) का भाग करने पर
०4/1 4० =10-79109
०44० 1=10-79109
०० =10-79109
०० =19109107
०० =191016
०० =131082
किंतु प्रकाश का वेग c=3108 मी. प्रति सेकंड
०० =1c2
०० =1c2
c2=1००
c=1००
इस प्रकार प्रकाश का वेग ०और ० के गुणनफल के वर्गमूल के व्युत्क्रम के बराबर होता है।
प्र. धारावाही वृत्ताकार लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र हेतु व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए |
मानलो एक धारावाही वृत्ताकार लूप का केंद्र 0 तथा त्रिज्या r है जिसमें धारा i दक्षिणावर्त दिशा में प्रवाहित हो रही है। इस धारावाही लूप के केंद्र 0 पर चुंबकीय क्षेत्र की गणना करनी है।
इसके लिए dl लंबाई के एक अल्पांश (धारा अवयव) की कल्पना करते है। तब बायो-सेवर्ट के नियम से इस अवयव के कारण केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता
dB =०4.I dl sin r 2 ………..(1)
त्रिज्या स्पर्श रेखा के लम्बवत होती है | तब
= 900
sin =sin 900=1
समी (1 ) से
dB =०4.I dl (1)r 2 …….(2)
वृत्ताकार लूप को इसी प्रकार के कई अल्पंशो (अवयवों) से मिल कर बना हुआ मान सकते हैं। अतः केंद्र 0 पर कुल चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता
B=dB
समी . (2) से
B=०4.I dl r 2
B=०4.I r 2dl
जबकि dl = वृत्त की परिधि = 2r
B=०4.Ir 2.2r
B=०I2r ………..(3)
यदि लूप के स्थान पर N फेरों वाली कुंडली हो तो
B=०NI2r ………..(4)
प्र. धारावाही वृत्ताकार लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता किन-किन कारकों पर निर्भर करती है?
धारावाही वृत्ताकार लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता किन-किन कारकों पर निर्भर करती है -
(i) कुंडली में फेरों की संख्या - चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता कुंडली में फेरों की संख्या बढ़ाने पर बढ़ती है।
(ii) कुंडली में प्रवाहित होने वाली धारा - कुंडली में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा का मान बढ़ाने पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता भी बढ़ती है।
(iii) कुंडली की त्रिज्या - कुंडली की त्रिज्या का मान कम होने पर कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता अधिक होती है।
(iv) माध्यम - कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता माध्यम की चुंबकशीलता पर निर्भर करती है।
प्र. एक वृत्ताकार कुंडली का व्यास 0.2 मीटर है तथा इसमें तार के 1000 फेरे लपेटे गये हैं। यदि कुंडली में 0.1 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही हो तो उसके केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात कीजिए।
प्र. बायो-सेवर्ट नियम का उपयोग करते हुए धारावाही वृत्ताकार लूप के अक्ष के अनुदिश केंद्र से x दूरी पर चुंबकीय क्षेत्र के लिए व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।
माना कि R त्रिज्या और O केंद्र का एक धारावाही वृत्ताकार लूप है जिसमें तीर की दिशा में धारा प्रवाहित हो रही है। केंद्र से उसके अक्ष पर x दूरी पर एक बिंदु P है, जिस पर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात करनी है।
Jiइसके लिए धारावाही लूप को d। लंबाई के कई अति अल्पंशो से मिलकर बना हुआ मान सकते हैं। तब प्रत्येक अवयव की बिंदु से दूरी r समान होगी।
मानली A और A' व्यास अभिमुखी (Diametrically opposite) दो धारा अवयव (अल्पांश) हैं।
अल्पांश A के कारण बिंदु P पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता
dB=०4.I dl sin r 2 …....(1)
अल्पांश A और उसको बिंदु P से मिलाने वाली रेखा के बीच का कोण (=90 ० ) समकोण है।
= 900
sin =sin 900=1
समी (1 ) से
dB =०4.I dl (1)r 2
dB =०4.I dl r 2 …...(2)
चुम्बकीय क्षेत्र को दिशा अवयव (अल्पांश) A और उसको मिलाने वाली रेखा AP के तल के लम्बवत PQ दिशा के अनुदिश होगी।
मान कि कोण APO=
बिंदु P पर चुम्बकीय क्षेत्र dB को दो घटकों में विभाजित किया जा सकता है-
(1) dB cos अक्ष OP के लंबवत PN दिशा में तथा
(2) dB sin अक्ष OP के अनुदिश ।
अवयव A के व्यास अभिमुखी अवयव A' के कारण भी बिंदु P पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता dB होगा। इसकी
दिशा PQ’ के अनुदिश होगी।
पुनः dB दो घटकों में विभाजित किया जा सकता है-
(1) dB cos अक्ष OP के लंबवत PN’ दिशा में तथा
(2) dB sin अक्ष OP के अनुदिश ।
PN और PN’ के अनुदिश (अक्ष के लंबवत) घटक परिमाण में बराबर तथा विपरीत दिशा में हैं। इसलिए वे एक-दूसरे के प्रभाव को निरस्त कर देंगे। किंतु अक्ष OP के अनुदिश समस्त घटक आपस में जुड़ जायेंगे।
अतः धारावाही वृत्ताकार लूप के अक्ष पर स्थित बिंदु P पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता
B=dB sin
B=०4.I dl r 2 sin …..(3)
किंतु समकोण त्रिभुज AOP में
sin = OAAP
sin = R r
समी (3) से
B=०4.I dl r 2.R r
(० ,I , R व r नियत है )
B=० I R 4r 3.dl
जबकि dl = वृत्त की परिधि = 2R
B=० I R 4r 3.2R
B=० I R2 2r 3 …..(4)
अब समकोण ∆AOP में पाइथागोरस के प्रमेय से,
AP2=AO2+OP2
r2=R2+x2
r=R2+x21/2
r3=R2+x23/2
समी. (4) में मान रखने पर,
B=० I R2 2R2+x23/2
यदि वृत्ताकार लूप के स्थान पर N फेरों वाली वृत्ताकार कुंडली लें तो
B=० NI R2 2R2+x23/2
यही धारावाही वृत्ताकार कुंडली के अक्ष पर स्थित किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र का व्यंजक है।
प्र. ऐम्पियर का परिपथीय नियम लिखिए एवं सिद्ध कीजिए।
ऐम्पियर का परिपथीय नियमानुसार “निर्वात में किसी बंद वक्र के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र B का रेखीय समाकलन उस वक्र द्वारा घिरी कुल धारा I का ० गुना होता है अर्थात्
जहाँ, ० निर्वात की चुंबकशीलता है।
बंद वक्र के परितः समाकलन तथा I वक्र द्वारा घेरी गई धारा है।
व्युत्पत्ति - असीमित लंबाई का सीधा धारावाही चालक XY है जिसमें I धारा X से Y की दिशा में प्रवाहित हो रही हो। इस चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ संकेंद्रीय वृत्तों के रूप में होंगी जो चालक के लंबवत तल में स्थित होंगी
तब चालक से r दूरी पर स्थित किसी बिंदु P पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता
B=०4.2I r
B=०I 2r …(1)
बिंदु P पर चुंबकीय क्षेत्र रेखा पर एक अल्प अवयव की कल्पना करते है तब और की दिशा समान होगी अर्थात् उनके बीच 0° का कोण बनेगा।
अतः r त्रिज्या के वृत्त के चारों ओर का रेखीय समाकलन
B .dl cos 0०
=B .dl cos 0०
=B .dl (1)
=B .dl
=B dl
समी (1 ) से
=०I 2r dl
जबकि dl = वृत्त की परिधि = 2r
=०I 2r 2r
यही ऐम्पियर का परिपथीय नियम है।
प्र. ऐम्पियर के परिपथीय नियम का उपयोग करते हुए सीधे लंबे धारावाही तार के समीप चुंबकीय क्षेत्र हेतु व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।
माना कि XY एक सीधा धारावाही चालक तार है जिसमें I विद्युत धारा X से Y की दिशा में प्रवाहित हो रही है। इस तार के लंबवत r दूरी पर एक बिंदु P है जिस पर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात करना है।
इसके लिए r त्रिज्या के वृत्त के रूप में ऐम्पियर लूप की कल्पना करते है जो बिंदु P से होकर गुजरता है। इस लूप के प्रत्येक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण समान तथा दिशा स्पर्श रेखा के अनुदिश होगी।
अल्पांश A और उसको बिंदु P से मिलाने वाली रेखा के बीच का कोण (=0 ० )होगा।
cos 0०=1
=B.dl (1)
=B.dl
=B dl
जबकि dl = वृत्त की परिधि = 2r
=B.2r ……..(1)
ऐम्पियर के परिपथीय नियम से
............(2)
समी (1 ) व (2) से
B.2r=०I
B=०I2r
यही अभीष्ट व्यंजक है |
एक लम्बे सीधे तार में 30A की धारा प्रवाहित हो रही है। तार से 30 cm दूरी पर स्थित बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र के परिमाण की गणना कीजिये। (म. प्र. 2024)
विद्युत धारा = 30A
त्रिज्या r=30cm
=30× 10^-2 मीटर
एक सीधे लंबे तार के लिए
B=०I2r
B= 4pi×10^
प्र. परिनालिका किसे कहते है ?सचित्र समझाइये
परिनालिका - परिनालिका एक लंबी बेलनाकार कुंडली होती है जो किसी विद्युतरोधी पदार्थ (जैसे चीनी मिट्टी, एस्बेस्टास आदि) पर ताँबे के विद्युतरोधी (Insulated) तार के बहुत से फेरे पास-पास लपेटकर बनायी जाती है।
एक आदर्श परिनालिका की त्रिज्या उसकी लंबाई की तुलना में नगण्य होती है।
परिनालिका का चुंबकीय क्षेत्र - जब किसी परिनालिका में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो उसका प्रत्येक फेरा धारावाही वृत्ताकार लूप की तरह कार्य करता है। परिनालिका के सभी फेरों के कारण उत्पन्न कुल चुंबकीय क्षेत्र प्रत्येक फेरे के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र के सदिश योग के बराबर होता है।
परिनालिका के भीतर मध्य बिंदु X पर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान, तीव्र तथा परिनालिका के अक्ष के अनुदिश होता है। जबकि परिनालिका के बाहर स्थित बिंदु Y पर चुंबकीय क्षेत्र दुर्बल तथा अक्ष के अनुदिश होता है।
यदि परिनालिका की लंबाई अधिक एवं फेरे सघन हों तो उसके भीतर प्रत्येक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र अक्ष के समांतर होता है तथा बाहर चुंबकीय क्षेत्र लगभग शून्य होता है।
प्र. ऐम्पियर के परिपथीय नियम का उपयोग करते हुए धारावाही परिनालिका, जिसकी लंबाई l तथा जिसमें N फेरे हैं, के अक्ष के अनुदिश चुंबकीय क्षेत्र का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।
माना कि किसी परिनालिका के प्रति एकांक लंबाई पर फेरों की संख्या n तथा इसमें बहने वाली धारा I है जब किसी परिनालिका में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान तथा बाहर लगभग शून्य होता है। हमें परिनालिका के अंदर किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र का मान ज्ञात करना है।
इसके लिए एक आयताकार ऐम्पियर-लूप abcd की कल्पना करते है जिसकी भुजाएँ ab तथा cd परिनालिका के अक्ष के समांतर हो।
तब आयत abcd के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र B का रेखीय समाकलन
{ab के अनुदिश और एक-दूसरे के समांतर हैं}
cos 0०=1
=B.dl (1)
=B.dl
=B dl
जबकि dl=x
=B.x ……(2)
{bc के अनुदिश और एक-दूसरे के लम्बवत हैं}
cos 90०=0
=B.dl (0)
=0 ………….(3)
…………………….(4)
{परिनालिका के बाहर चुंबकीय क्षेत्र B का मान शून्य होता है}
............(5)
समी. (1) में मान रखने पर
................ (6)
आयताकार लूप abcd में फेरों की संख्या nx होगी। आयताकार लूप abcd द्वारा घेरी गई कुल धारा nxI होगी।
अब ऐम्पियर के परिपथीय नियम से
०nxI …………..(7)
समी. (2) और (3) से
Bx=०nxI
B=०nI
यही धारावाही परिनालिका के अंदर किसी बिंदु पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का व्यंजक है।
प्र. 500 फेरे/मीटर की परिनालिका में 3A की धारा प्रवाहित हो रही है। परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण ज्ञात कीजिए।
दिया है -
फेरों की संख्या n = 500 फेरे/मीटर
विद्युत धारा I = 3 ऐम्पियर
सूत्र - B=०nI
B=410-75003
B=43.1410-715102
B=43.1410-715102
B=603.1410-5
B=188.410-5
B=1.910-3 टेस्ला
प्र. एक परिनालिका की लंबाई 0.5 मीटर तथा त्रिज्या 1 सेमी है। इसमें 500 फेरे हैं। परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण ज्ञात कीजिए यदि इसमें 5 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही हो।
दिया है -
फेरों की संख्या n = 500 फेरे/मीटर
परिनालिका की लंबाई l = 0.5 मीटर
विद्युत धारा I = 5 ऐम्पियर
सूत्र - B=०nI
B=०NlI
B=410-75000.55
B=43.1410-7500055
B=203.1410-71000
B=62.8010-4
B=6.210-3 टेस्ला
प्र. चुंबकीय लॉरेंज बल किसे कहते है ?
चुंबकीय लॉरेंज बल - जब कोई आवेश किसी चुंबकीय क्षेत्र में गति करता है तो उस पर एक बल कार्य करता है, जिसे चुंबकीय लॉरेंज बल कहते हैं। इस बल का नाम लॉरेंज बल इनके खोजकर्ता भौतिकविद् लॉरेंज के नाम पर रखा गया है।
चुंबकीय लॉरेंज बल f = qvB sin
प्र. चुंबकीय लॉरेंज बल की दिशा ज्ञात करने के नियम लिखिए
(i) फ्लेमिंग का बाएँ हाथ का नियम - बायें हाथ के अँगूठे, तर्जनी एवं मध्यमा को इस प्रकार फैलाओ कि वे परस्पर लंबवत हों। अब यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को एवं मध्यमा धनावेश की गति की दिशा को प्रदर्शित करे तो अँगूठा आवेश पर लगने वाले बल की दिशा को प्रदर्शित करेगा।
(ii) दाएँ हाथ की हथेली का नियम नं. 2 - दाएँ हाथ की हथेली को इस प्रकार फैलाओ कि उँगलियाँ अँगूठे के लंबवत रहे। अब यदि उँगलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करें तथा अँगूठा धनावेश की गति की दिशा को प्रदर्शित करे तो आवेश पर बल हथेली के लंबवत बाहर की ओर कार्य करेगा
प्र. एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में विद्युत धारावाही चालक पर लगने वाले बल के लिए व्यंजक ज्ञात कीजिए।
एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में विद्युत धारावाही चालक पर लगने वाला निम्न कारको पर निर्भर करता है -
ट्रांसफॉर्मर (Transformer) क्या है समझाइए
ट्रांसफॉर्मर एक इलेक्ट्रिकल डिवाइस है जो एक विद्युत धारा को एक वोल्टेज से दूसरे वोल्टेज में बदलने के लिए उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है:
1. पावर ट्रांसमिशन: उच्च वोल्टेज पर बिजली को लंबी दूरी तक भेजने के लिए।
2. इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: स्मार्टफ़ोन, कंप्यूटर, टीवी आदि में वोल्टेज को नियंत्रित करने के लिए।
3. औद्योगिक अनुप्रयोग: मोटर, पंप, और अन्य औद्योगिक उपकरणों में वोल्टेज को नियंत्रित करने के लिए।
4. मेडिकल उपकरण: एमआरआई मशीन, ईसीजी मशीन आदि में वोल्टेज को नियंत्रित करने के लिए।
5. ऑटोमोबाइल: वाहनों में वोल्टेज को नियंत्रित करने के लिए।
ट्रांसफॉर्मर के प्रकार:
1. स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर /
उच्चायी ट्रांसफॉर्मर
2. स्टेप-डाउन ट्रांसफॉर्मर/
अपचायी ट्रांसफॉर्मर
ट्रांसफॉर्मर के फायदे:
1. वोल्टेज को नियंत्रित करने में मदद।
2. ऊर्जा की बचत।
3. विद्युत धारा को स्थिर करने में मदद।
4. लंबी दूरी तक बिजली को भेजने में मदद।
यूनिट - 5 विद्युत चुम्बकीय तरंगे
अध्याय - 8
विद्युत्-चुम्बकीय तरंगें क्या हैं? इनके कोई चार गुण लिखिए। What are electromagnetic waves? Write any four of their properties.
अथवा
विद्युत्-चुम्बकीय तरंगें क्या हैं ? इनके मुख्य गुणों का वर्णन कीजिए। What are electromagnetic waves? Describe their main properties.
उत्तर-विद्युत्-चुम्बकीय तरंगें (Electromagnetic Waves)- विद्युत्-चुम्बकीय तरंगें वे तरंगें होती हैं, जो एक-दूसरे के लम्बवत् तलों में विद्युत्-क्षेत्र और चुम्बकीय क्षेत्र के ज्यावक्रीय दोलनों से बनी होती हैं तथा ये दोलन तरंग-संचरण की दिशा के लम्बवत् होते हैं। Electromagnetic waves are waves which are composed of sinusoidal oscillations of electric field and magnetic field in planes perpendicular to each other and these oscillations are perpendicular to the direction of wave propagation.
चित्र-विद्युत्-चुम्बकीय दोलन का ग्राफीय निरूपण Figure-Graphical representation of electromagnetic oscillation
विद्युत्-चुम्बकीय तरंगों के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं- (The main properties of electromagnetic waves are as follows:)
विद्युत्-चुम्बकीय तरंग अनुप्रस्थ होती हैं। Electromagnetic waves are transverse.
ये तरंगें निर्वात् में भी संचरित हो सकती हैं। These waves can also be transmitted in vacuum.
ये तरंगें विद्युत् तथा चुम्बकीय क्षेत्रों द्वारा अप्रभावित रहती हैं। These waves remain unaffected by electric and magnetic fields.
निर्वात् में इनका वेग नियत (3 × 10^8 m/s) होता है। Their velocity in vacuum is constant (3 × 10^8 m/s).
ये तरंगें परावर्तन, अपवर्तन, व्यतिकरण, विवर्तन, ध्रुवण आदि गुण दर्शाती हैं। These waves show properties like reflection, refraction, interference, diffraction, polarization etc.
ये तरंगें दोलायमान या त्वरित आवेशों से उत्पन्न होती हैं। These waves are produced by oscillating or accelerating charges.
विद्युत् तथा चुम्बकीय क्षेत्रों के दोलन ज्या वक्रीय होते हैं। The oscillations of electric and magnetic fields are sine curved.
विद्युत् तथा चुम्बकीय क्षेत्र समान कला में होते हैं। The electric and magnetic fields are in the same phase.
विद्युत चुंबकीय तरंगों के प्रकार: Types of electromagnetic waves:
1. रेडियो तरंगें (Radio Waves)
2. माइक्रोवेव तरंगें (Microwave Waves)
3. इन्फ्रारेड तरंगें (Infrared Waves)
4. दृश्यमान प्रकाश तरंगें (Visible Light Waves)
5. अल्ट्रावायलेट तरंगें (Ultraviolet Waves)
6. एक्स-रे तरंगें (X-Ray Waves)
7. गामा तरंगें (Gamma Waves)
विद्युत चुंबकीय तरंगों के उपयोग: Uses of electromagnetic waves:
1. संचार के साधन रेडियो, टेलीविजन, मोबाइल फ़ोन आदि में विद्युत चुंबकीय तरंगों के उपयोग किया जाता है। Electromagnetic waves are used in means of communication like radio, television, mobile phones etc.
2.विद्युत ऊर्जा को लंबी दूरी तक भेजने के लिए ऊर्जा संचरण के रूप में विद्युत चुंबकीय तरंगों के उपयोग किया जाता है। Electromagnetic waves are used as a form of energy transmission to send electrical energy over long distances.
3. चिकित्सा के क्षेत्र में एक्स-रे, एमआरआई आदि में विद्युत चुंबकीय तरंगों के उपयोग किया जाता है। In the field of medicine, electromagnetic waves are used in X-rays, MRI etc.
4. रक्षा क्षेत्र में रडार, मिसाइल गाइडेंस आदि के लिए विद्युत चुंबकीय तरंगों के उपयोग किया जाता है। Electromagnetic waves are used in the defence sector for radar, missile guidance etc.
विद्युत चुंबकीय तरंगों के नुकसान: Disadvantages of Electromagnetic Waves:
1. विद्युत चुंबकीय विकिरण का खतरा। Hazards of electromagnetic radiation.
2. स्वास्थ्य पर प्रभाव। Effects on health.
3. इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर प्रभाव। Effects on electronic devices.
4. पर्यावरण पर प्रभाव। Effects on the environment.
विद्युत चुंबकीय तरंगों के आविष्कार कौन के नाम-
विद्युत चुंबकीय तरंगों के आविष्कार का श्रेय जेम्स क्लर्क मैक्सवेल और हेनरिच रुडोल्फ हर्ट्ज को दिया जाता है।
जेम्स क्लर्क मैक्सवेल -
- मैक्सवेल ने 1864 में विद्युत चुंबकीय तरंगों के सिद्धांत को विकसित किया।
- उन्होंने दिखाया कि विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।
- मैक्सवेल के समीकरणों ने विद्युत चुंबकीय तरंगों के अस्तित्व की भविष्यवाणी की।
हेनरिच रुडोल्फ हर्ट्ज -
- हर्ट्ज ने 1887 में विद्युत चुंबकीय तरंगों का प्रायोगिक रूप से पता लगाया।
- उन्होंने विद्युत चुंबकीय तरंगों को उत्पन्न करने के लिए एक उपकरण बनाया।
- हर्ट्ज के प्रयोगों ने मैक्सवेल के सिद्धांत की पुष्टि की।
इन दोनों वैज्ञानिकों के काम ने विद्युत चुंबकीय तरंगों के अध्ययन की नींव रखी और आधुनिक भौतिकी और तकनीक में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रश्न - विद्युत् चुंबकीय तरंगों के विभिन्न भागों के आविष्कारक के नाम बताइए।
विद्युत् चुंबकीय तरंगों के विभिन्न भागों के आविष्कारक के नाम निम्न हैं-
y-किरणें - बेकुरल तथा क्यूरी
X-किरणें- राजन
पराबैंगनी किरणें- रिटर
दृश्य प्रकाश- न्यूटन
अवरक्त किरणें- हर्शल
हर्जियन तरंगें-हर्ज
वायरलेस तरंगें - मारकोनी।
इकाई - 6
अध्याय - 9
किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
Ray Optics and Optical Instruments
एक वाक्य में उत्तर दीजिए
छोटा एवं आभासी प्रतिबिंब प्राप्त किया जा सकता है।
उत्तर=उत्तल दर्पण द्वारा
एक प्रकाश किरण किसी दर्पण पर अभिलंबत आपतित होती है तो परावर्तन कोण का मन क्या होगा।
उत्तर=0 डिग्री
गोलीय दर्पण की फोकस दूरी एवं वक्रता त्रिज्या में संबंध होता है।
उत्तर=फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी
होती है
बड़ा एवं आभासी प्रतिबिंब प्राप्त किया जा सकता है।
उत्तर=अवतल दर्पण द्वारा
अवतल दर्पण से बने प्रतिबिम्ब को पर्दे पर प्राप्त नहीं कर सकते जबकि वस्तु।
उत्तर=ध्रुव और फोकस के बीच हो
जब प्रकाश किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रवेश करता है तो निम्न में से किसका मान परिवर्तित नहीं होगा। उत्तर=आवृत्ति
F1 और f2 फोकस दूरी के दो लेंस एक दूसरे के संपर्क में रखे गए हैं संयुक्त लेंस की फोकस दूरी होगी।
उत्तर=f1.f2/f1+f2
एक लेंस की फोकस दूरी किस रंग के लिए न्यूनतम होती है।
उत्तर=बैंगनी
प्रकाश का रंग ज्ञात किया जाता है। उत्तर=आवृत्ति से
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में नेत्रिका की फोकस दूरी, अभिदृश्यक की फोकस दूरी।
उत्तर=से अधिक होती है
खगोलीय दूरदर्शी के अभीदृश्यक की फोकस दूरी fe तथा नेत्र का की फोकस दूरी f0 है। सामान्य समायोजन की स्थिति में उनकी आवर्धन क्षमता होती है
उत्तर=-f0/fe
दूरदर्शी में नेत्र का के फोकस दूरी, अभी दर्शन की फोकस दूरी—
उत्तर=से कम होती है
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