June 25, 2025

इकाई - 3 विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव एवं चुंबकत्व अध्याय- 4 गतिमान आवेश और चुंबकत्व Unit - 3 Magnetic effect of electric current and magnetism Chapter - 4 Moving charges and magnetism

Physics by लायक सर

Mob. 9754956951

इकाई - 3 विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव एवं चुंबकत्व 

Unit - 3 Magnetic effect of electric current and magnetism

अध्याय- 4 गतिमान आवेश और चुंबकत्व

Chapter - 4 Moving charges and magnetism

प्र. धारा का चुंबकीय प्रभाव किसे कहते हैं? समझाइए Explain what is the magnetic effect of current?

जब किसी चालक में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो चालक के चारों ओर विद्युत क्षेत्र उत्पन्न होने की घटना को विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव कहते हैं। When electric current is passed through a conductor, the phenomenon of the generated electric field around the conductor is called magnetic effect of electric current.


प्र0 चुंबकीय क्षेत्र दिशा को ज्ञात करने के नियम लिखिए 

विद्युत धारा को प्रवाहित करने पर चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने की निम्न नियम में है -

(i) मैक्सवेल का दक्षिणावर्ती कॉर्क पेंच का नियम - एक दक्षिणावर्ती कॉर्क पेंच  को इस प्रकार घुमाओ कि उसकी नोक धारा की दिशा में आगे बढ़े तो ऐसा करने के लिए अँगूठे को जिस दिशा में घुमाना पड़ता है, वही चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा होती है इसे मैक्सवेल का दक्षिणावर्ती कॉर्क पेंच का नियम कहते हैं। 


(ii) दाएँ हाथ का नियम -एक धारावाही चालक को दाएँ हाथ से इस प्रकार पकड़ो कि अँगूठा धारा की दिशा में हो तो उँगलियों को जिस दिशा में मोड़ना पड़ता है, वही चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा होती है।


प्र0 बायो - सेवर्ट का नियम लिखिए तथा व्यंजक निगमित कीजिये|  

भौतिकविद् बायो एवं सेवर्ट ने सरल आकृति के धारावाही चालकों के निकट चुंबकीय क्षेत्र के मापन के लिए एक नियम बताया जिसे बायो-सेवर्ट का नियम कहते हैं।

मानलो XY एक चालक तार है जिसमें विद्युत धारा I प्रवाहित हो रही है। इस चालक के एक अल्पांश dl के कारण किसी बिंदु P पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता dB निम्न कारकों पर निर्भर करती है -

(i) चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता dB चालक में प्रवाहित धारा I के समानुपाती होती है अर्थात् 

      ……… (1)

(ii) चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता dB अल्पांश की लंबाई dl के समानुपाती होती है अर्थात् 

   ……… (2)

(iii) चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता dB अल्पांश और उसको बिंदु P से मिलाने वाली रेखा के बीच का कोण की ज्या sin के समानुपाती होती है  अर्थात् 

 

       

(iv) चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता dB अल्पांश से बिंदु P के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होती है अर्थात् 

 ……… (4)

समी. (1) (2) (3) (4) को मिलाकर लिखने पर,



जहाँ K एक आनुपातिक नियतांक है जिसका मान मापन की पद्धति एवं  माध्यम पर निर्भर करता है।

SI में मुक्त आकाश (या निर्वात) के लिए

टेस्लामीटर प्रति ऐम्पियर

जहाँ ० निर्वात की चुंबकशीलता (Permeability)

समी. (5) से      

जहाँ ० निर्वात की चुंबकशीलता (Permeability) 

समी. (5) या (6) द्वारा प्रदर्शित संबंध को ही बायो-सेवर्ट का नियम कहते हैं। 

चुंबकीय क्षेत्र की दिशा - मैक्सवेल के दक्षिणावर्ती कॉर्क पेंच के नियम या दाएँ हाथ के नियम 1 के अनुसार धारा अवयव (अल्पांश) के कारण बिंदु P पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा कागज के तल के लंबवत नीचे की ओर होगी।



प्र०  एक सीधे तार में 5 ऐम्पियर की धारा दक्षिण से उत्तर की ओर प्रवाहित हो रही है। इस तार के 1 सेमी टुकड़े के कारण उत्तर-पूर्व दिशा में 1 मीटर की दूरी पर स्थित बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात कीजिए।



प्र.: - एक तार में, जो उत्तर-दक्षिण दिशा में रखा है, 8 ऐम्पियर की धारा दक्षिण से उत्तर दिशा में प्रवाहित की जाती है। इस तरह के 1 सेमी टुकड़े के कारण उत्तर-पूर्व दिशा में 100 सेमी दूर स्थित बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात कीजिए।


प्र0 निर्वात की विद्युतशीलता (ε0) एवं चुम्बकीय शीलता (μ0) में सम्बन्ध स्थापित कीजिये  

SI में मुक्त आकाश (या निर्वात) के लिए  

०4=10-7 …………  (1)

जहाँ ० निर्वात की चुंबकशीलता 

1 4० = 9109…………(2)

जहाँ ० निर्वात की विद्युतशीलता 

समी (1) व (2) का भाग करने पर  

०4/1 4० =10-79109

०44० 1=10-79109

०० =10-79109

०० =19109107

०० =191016

०० =131082

किंतु प्रकाश का वेग  c=3108 मी. प्रति सेकंड 

०० =1c2   

०० =1c2

c2=1००

c=1००

इस प्रकार प्रकाश का वेग ०और ० के गुणनफल के वर्गमूल के व्युत्क्रम के बराबर होता है।


प्र. धारावाही वृत्ताकार लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र हेतु व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए |

मानलो एक धारावाही वृत्ताकार लूप का केंद्र 0 तथा त्रिज्या r है जिसमें धारा i दक्षिणावर्त दिशा में प्रवाहित हो रही है। इस धारावाही लूप के केंद्र 0 पर चुंबकीय क्षेत्र की गणना करनी है।

इसके लिए dl लंबाई के एक अल्पांश (धारा अवयव) की कल्पना करते है। तब बायो-सेवर्ट के नियम से इस अवयव के कारण केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता

dB =०4.I dl sin r 2 ………..(1)

त्रिज्या स्पर्श रेखा के लम्बवत होती है | तब 

= 900

 sin =sin 900=1

समी (1 ) से 

 dB =०4.I dl (1)r 2 …….(2)

वृत्ताकार लूप को इसी प्रकार के कई अल्पंशो (अवयवों) से मिल  कर बना हुआ मान सकते हैं। अतः केंद्र 0 पर कुल चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता

B=dB

समी . (2) से 

B=०4.I dl r 2

B=०4.I r 2dl

जबकि  dl = वृत्त की परिधि = 2r

B=०4.Ir 2.2r

     B=०I2r  ………..(3)

यदि लूप के स्थान पर N फेरों वाली कुंडली हो तो 

    B=०NI2r  ………..(4)


प्र. धारावाही वृत्ताकार लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता किन-किन  कारकों पर निर्भर करती है?

धारावाही वृत्ताकार लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता किन-किन  कारकों पर निर्भर करती है -

(i) कुंडली में फेरों की संख्या - चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता कुंडली में फेरों की संख्या बढ़ाने पर बढ़ती है।

(ii) कुंडली में प्रवाहित होने वाली धारा - कुंडली में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा का मान बढ़ाने पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता भी बढ़ती है।

(iii) कुंडली की त्रिज्या - कुंडली की त्रिज्या का मान कम होने पर कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता अधिक होती है।

(iv) माध्यम - कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता माध्यम की चुंबकशीलता पर निर्भर करती है।


प्र. एक वृत्ताकार कुंडली का व्यास 0.2 मीटर है तथा इसमें तार के 1000 फेरे लपेटे गये हैं। यदि कुंडली में 0.1 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही हो तो उसके केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात कीजिए।

प्र. बायो-सेवर्ट नियम का उपयोग करते हुए धारावाही वृत्ताकार लूप के अक्ष के अनुदिश केंद्र से x दूरी पर चुंबकीय क्षेत्र के लिए व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।

माना कि R त्रिज्या और O केंद्र का एक धारावाही वृत्ताकार लूप  है जिसमें तीर की दिशा में धारा प्रवाहित हो रही है। केंद्र से उसके अक्ष पर x दूरी पर एक बिंदु P है, जिस पर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात करनी है।

Jiइसके लिए धारावाही लूप को d। लंबाई के कई अति अल्पंशो से मिलकर बना हुआ मान सकते हैं। तब प्रत्येक अवयव की बिंदु से दूरी r समान होगी।

मानली A और A' व्यास अभिमुखी (Diametrically opposite) दो धारा अवयव (अल्पांश) हैं।

अल्पांश A के कारण बिंदु P पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता 

dB=०4.I dl sin r 2  …....(1)

अल्पांश A और उसको बिंदु P से मिलाने वाली रेखा के बीच का कोण  (=90 ० ) समकोण है।

= 900

 sin =sin 900=1

समी (1 ) से 

 dB =०4.I dl (1)r 2

       dB =०4.I dl r 2 …...(2)

चुम्बकीय क्षेत्र को दिशा अवयव (अल्पांश) A  और उसको मिलाने वाली रेखा AP के तल के लम्बवत PQ दिशा के अनुदिश होगी।

मान कि  कोण APO=

बिंदु P पर चुम्बकीय क्षेत्र dB को दो घटकों में विभाजित किया जा सकता है-

(1) dB cos अक्ष OP के लंबवत PN दिशा में तथा 

(2) dB sin अक्ष OP के अनुदिश ।

अवयव A  के व्यास अभिमुखी अवयव A' के कारण भी बिंदु P पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता dB होगा। इसकी

दिशा PQ’ के अनुदिश होगी।


पुनः dB दो घटकों में विभाजित किया जा सकता है-

(1) dB cos अक्ष OP के लंबवत PN’ दिशा में तथा 

(2) dB sin अक्ष OP के अनुदिश ।


PN और PN’ के अनुदिश (अक्ष के लंबवत) घटक परिमाण में बराबर तथा विपरीत दिशा में हैं। इसलिए वे एक-दूसरे के  प्रभाव को निरस्त कर देंगे। किंतु अक्ष OP के अनुदिश समस्त घटक आपस में जुड़ जायेंगे।


अतः धारावाही वृत्ताकार लूप के अक्ष पर स्थित बिंदु P पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता

B=dB sin  

B=०4.I dl r 2 sin   …..(3)

किंतु समकोण त्रिभुज AOP में 

sin = OAAP

sin = R r

समी (3) से

B=०4.I dl r 2.R r

(० ,I , R  व  r नियत है )

B=० I R 4r 3.dl

जबकि  dl = वृत्त की परिधि = 2R

B=० I R 4r 3.2R

B=० I R2 2r 3 …..(4)

अब समकोण ∆AOP में पाइथागोरस के प्रमेय से,

AP2=AO2+OP2

r2=R2+x2

r=R2+x21/2

r3=R2+x23/2

समी. (4) में मान रखने पर, 

B=० I R2 2R2+x23/2

यदि वृत्ताकार लूप के स्थान पर N फेरों वाली वृत्ताकार कुंडली लें तो

B=० NI R2 2R2+x23/2

यही धारावाही वृत्ताकार कुंडली के अक्ष पर स्थित किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र का व्यंजक है।


प्र. ऐम्पियर का परिपथीय नियम लिखिए एवं सिद्ध कीजिए।

ऐम्पियर का परिपथीय नियमानुसार “निर्वात में किसी बंद वक्र के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र B का रेखीय समाकलन उस वक्र द्वारा घिरी कुल धारा I का ० गुना होता है अर्थात् 

जहाँ, ० निर्वात की चुंबकशीलता है।

बंद वक्र के परितः समाकलन तथा I वक्र द्वारा घेरी गई धारा है।

व्युत्पत्ति - असीमित लंबाई का सीधा धारावाही चालक XY है जिसमें I धारा X से Y की दिशा में प्रवाहित हो रही हो। इस चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ संकेंद्रीय वृत्तों के रूप में होंगी जो चालक के लंबवत तल में स्थित होंगी 

तब चालक से r दूरी पर स्थित किसी बिंदु P पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता

B=०4.2I r

  B=०I 2r …(1)

बिंदु P पर चुंबकीय क्षेत्र रेखा पर एक अल्प अवयव की कल्पना करते है तब और की दिशा समान होगी अर्थात् उनके बीच 0° का कोण बनेगा।

 अतः r त्रिज्या के वृत्त के चारों ओर का रेखीय समाकलन

B .dl cos 0०

          =B .dl cos 0०

      =B .dl (1)

=B .dl

=B dl

समी (1 ) से 

=०I 2r dl

जबकि  dl = वृत्त की परिधि = 2r

=०I 2r 2r

यही ऐम्पियर का परिपथीय नियम है।


प्र. ऐम्पियर के परिपथीय नियम का उपयोग करते हुए सीधे लंबे धारावाही तार के समीप चुंबकीय क्षेत्र हेतु व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।

माना कि XY एक सीधा धारावाही चालक तार है जिसमें I विद्युत धारा X से Y की दिशा में प्रवाहित हो रही है। इस तार के लंबवत r दूरी पर एक बिंदु P है जिस पर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात करना है।

इसके लिए r त्रिज्या के वृत्त के रूप में ऐम्पियर लूप की कल्पना करते है जो बिंदु P से होकर गुजरता है। इस लूप के प्रत्येक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण समान तथा दिशा स्पर्श रेखा के अनुदिश होगी।

अल्पांश A और उसको बिंदु P से मिलाने वाली रेखा के बीच का कोण  (=0 ० )होगा।

cos 0०=1

=B.dl (1)

=B.dl

=B dl

जबकि  dl = वृत्त की परिधि = 2r

=B.2r ……..(1)

ऐम्पियर के परिपथीय नियम से

............(2)

समी (1 ) व (2) से

B.2r=०I

      B=०I2r

यही अभीष्ट व्यंजक है |

एक लम्बे सीधे तार में 30A की धारा प्रवाहित हो रही है। तार से 30 cm दूरी पर स्थित बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र के परिमाण की गणना कीजिये। (म. प्र. 2024)

विद्युत धारा = 30A

त्रिज्या r=30cm 

=30× 10^-2 मीटर

एक सीधे लंबे तार के लिए

B=०I2r

B= 4pi×10^


प्र. परिनालिका किसे कहते है ?सचित्र समझाइये 

परिनालिका - परिनालिका एक लंबी बेलनाकार कुंडली होती है जो किसी विद्युतरोधी पदार्थ (जैसे चीनी मिट्टी, एस्बेस्टास आदि) पर ताँबे के विद्युतरोधी (Insulated) तार के बहुत से फेरे पास-पास लपेटकर बनायी जाती है। 

एक आदर्श परिनालिका की त्रिज्या उसकी लंबाई की तुलना में नगण्य होती है।

परिनालिका का चुंबकीय क्षेत्र - जब किसी परिनालिका में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो उसका प्रत्येक फेरा धारावाही वृत्ताकार लूप की तरह कार्य करता है। परिनालिका के सभी फेरों के कारण उत्पन्न कुल चुंबकीय क्षेत्र प्रत्येक फेरे के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र के सदिश योग के बराबर होता है। 

परिनालिका के भीतर मध्य बिंदु X पर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान, तीव्र तथा परिनालिका के अक्ष के अनुदिश होता है। जबकि परिनालिका के बाहर स्थित बिंदु Y पर चुंबकीय क्षेत्र दुर्बल तथा अक्ष के अनुदिश होता है। 

यदि परिनालिका की लंबाई अधिक एवं फेरे सघन हों तो उसके भीतर प्रत्येक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र अक्ष के समांतर होता है तथा बाहर चुंबकीय क्षेत्र लगभग शून्य होता है।


प्र. ऐम्पियर के परिपथीय नियम का उपयोग करते हुए धारावाही परिनालिका, जिसकी लंबाई l तथा जिसमें N फेरे हैं, के अक्ष के अनुदिश चुंबकीय क्षेत्र का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।

माना कि  किसी परिनालिका के प्रति एकांक लंबाई पर फेरों की संख्या n तथा इसमें बहने वाली धारा I है  जब किसी परिनालिका में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान तथा बाहर लगभग शून्य होता है। हमें परिनालिका के अंदर किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र का मान ज्ञात करना है।

इसके लिए एक आयताकार ऐम्पियर-लूप abcd की कल्पना करते है जिसकी भुजाएँ ab तथा cd परिनालिका के अक्ष के समांतर हो।

तब आयत abcd के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र B का रेखीय समाकलन

{ab के अनुदिश और एक-दूसरे के समांतर हैं}

cos 0०=1

=B.dl (1)

=B.dl

=B dl

जबकि  dl=x 

=B.x ……(2)

{bc के अनुदिश और एक-दूसरे के लम्बवत हैं}

cos 90०=0

=B.dl (0)

  =0 ………….(3)

…………………….(4) 

{परिनालिका के बाहर चुंबकीय क्षेत्र B का मान शून्य होता है}

     ............(5)

समी. (1) में मान रखने पर

................ (6)

आयताकार लूप abcd में फेरों की संख्या nx होगी। आयताकार लूप abcd द्वारा घेरी गई कुल धारा nxI होगी।

अब ऐम्पियर के परिपथीय नियम से 

०nxI …………..(7)

समी. (2) और (3) से

Bx=०nxI

B=०nI 

यही धारावाही परिनालिका के अंदर किसी बिंदु पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का व्यंजक है।


प्र. 500 फेरे/मीटर की परिनालिका में 3A की धारा प्रवाहित हो रही है। परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण ज्ञात कीजिए।

दिया है - 

 फेरों की संख्या n = 500 फेरे/मीटर

     विद्युत धारा I = 3 ऐम्पियर

          सूत्र - B=०nI

B=410-75003

B=43.1410-715102   

B=43.1410-715102  

B=603.1410-5

B=188.410-5

B=1.910-3 टेस्ला 


प्र. एक परिनालिका की लंबाई 0.5 मीटर तथा त्रिज्या 1 सेमी है। इसमें 500 फेरे हैं। परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण ज्ञात कीजिए यदि इसमें 5 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही हो।

दिया है - 

 फेरों की संख्या n = 500 फेरे/मीटर

परिनालिका की लंबाई l = 0.5 मीटर

     विद्युत धारा I = 5 ऐम्पियर

          सूत्र - B=०nI

B=०NlI

B=410-75000.55

B=43.1410-7500055

B=203.1410-71000

B=62.8010-4

B=6.210-3 टेस्ला

प्र. चुंबकीय लॉरेंज बल किसे कहते है ?

चुंबकीय लॉरेंज बल - जब कोई आवेश किसी चुंबकीय क्षेत्र में गति करता है तो उस पर एक बल कार्य करता है, जिसे चुंबकीय लॉरेंज बल कहते हैं। इस बल का नाम लॉरेंज बल इनके खोजकर्ता भौतिकविद् लॉरेंज के नाम पर रखा गया है।

चुंबकीय लॉरेंज बल f = qvB sin 



प्र. चुंबकीय लॉरेंज बल की दिशा ज्ञात करने के नियम लिखिए  

(i) फ्लेमिंग का बाएँ हाथ का नियम - बायें हाथ के अँगूठे, तर्जनी एवं मध्यमा को इस प्रकार फैलाओ कि वे परस्पर लंबवत हों। अब यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को एवं मध्यमा धनावेश की गति की दिशा को प्रदर्शित करे तो अँगूठा आवेश पर लगने वाले बल की दिशा को प्रदर्शित करेगा।

(ii) दाएँ हाथ की हथेली का नियम नं. 2 - दाएँ हाथ की हथेली को इस प्रकार फैलाओ कि उँगलियाँ अँगूठे के लंबवत रहे। अब यदि उँगलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करें तथा अँगूठा धनावेश की गति की दिशा को प्रदर्शित करे तो आवेश पर बल हथेली के लंबवत बाहर की ओर कार्य करेगा

प्र. एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में विद्युत धारावाही चालक पर लगने वाले बल के लिए व्यंजक ज्ञात कीजिए। 

एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में विद्युत धारावाही चालक पर लगने वाला निम्न कारको पर निर्भर करता है -

 


 





ट्रांसफॉर्मर (Transformer) क्या है समझाइए 

ट्रांसफॉर्मर एक इलेक्ट्रिकल डिवाइस है जो एक विद्युत धारा को एक वोल्टेज से दूसरे वोल्टेज में बदलने के लिए उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है:


1. पावर ट्रांसमिशन: उच्च वोल्टेज पर बिजली को लंबी दूरी तक भेजने के लिए।

2. इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: स्मार्टफ़ोन, कंप्यूटर, टीवी आदि में वोल्टेज को नियंत्रित करने के लिए।

3. औद्योगिक अनुप्रयोग: मोटर, पंप, और अन्य औद्योगिक उपकरणों में वोल्टेज को नियंत्रित करने के लिए।

4. मेडिकल उपकरण: एमआरआई मशीन, ईसीजी मशीन आदि में वोल्टेज को नियंत्रित करने के लिए।

5. ऑटोमोबाइल: वाहनों में वोल्टेज को नियंत्रित करने के लिए।


ट्रांसफॉर्मर के प्रकार:


1. स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर /

उच्चायी ट्रांसफॉर्मर 

2. स्टेप-डाउन ट्रांसफॉर्मर/

 अपचायी ट्रांसफॉर्मर 


ट्रांसफॉर्मर के फायदे:


1. वोल्टेज को नियंत्रित करने में मदद।

2. ऊर्जा की बचत।

3. विद्युत धारा को स्थिर करने में मदद।

4. लंबी दूरी तक बिजली को भेजने में मदद।


 

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