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स्थायी भाव और संचारी भाव में अन्तर |
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स्थायी भाव |
संचारी भाव |
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1. ये भाव सहृदय के चित्त में स्थायी रूप से
रहते हैं। 2. प्रत्येक रस का निजी स्थायी भाव होता है। इस
प्रकार स्थायी भाव अपने रस के जनक होते हैं। 3. स्थायी भावों की संख्या 10 है। 4. स्थायी भाव लम्बे समय तक बने रहते हैं। |
1. ये भाव सहृदय के चित्त में पानी के बुलबुले
के समान प्रकट होते हैं और लुप्त हो जाते हैं। 2. एक ही संचारी भाव अनेक रसों में प्रवेश कर
सकता है, इसलिए इसका दूसरा नाम व्यभिचारी भाव भी है 3. संचारी भावों की संख्या 33 मानी गई है। 4. संचारी भाव क्षणिक होते हैं। |