August 10, 2025

आत्मनिर्भर होना अनिवार्य है

जैसे सिंह धरती का राजा है, उसी प्रकार गरुड़ पक्षी को आकाश का राजा माना जाता है। एक गरुड़ पक्षी अपने आलसी बेटे को उड़ना व अपना खाना खुद तलाशना सिखाना चाहता था। छोटा गरुड़ कठिनाइयों में घिर जाता पर उड़ना न सीखता। गरुड़ रोज उसे पीठ पर बिठा कर दाना चुगाने ले जाता पर छोटा गरुड सीखना ही न चाहता था।

यह क्रम बहुत दिन चला। गरुड़ ने बहुतेरा कहा, पर बच्चे ने उड़ना न सीखा। उसकी सोच यह थी कि जब आराम से काम चल रहा हो तो स्वयं श्रम क्यों किया जाए। गरुड़ अपने बच्चे की इस दुर्बलता को बड़ी सावधानी से देखता रहा।

एक दिन जब वह आकाश में उड़ रहा था, तब गरुड़ ने धीरे से अपने पंख खींच लिए। बच्चा गिरने लगा तब उसे चेत आया, फड़फडाया, गिरते-फिरते बचा, पर अब उसने उड़ना सीखने की आवश्यकता अनुभव कर अपने पंख फड़फडाए और किसी तरह उड़ना सीख ही लिया। सायंकाल बालक गरुड़ ने माँ से कहा, "माँ, आज पंख न फड़फडाए होते तो पिताजी ने तो बीच में ही गिरा दिया होता।"

माँ गरुड़ हँसी और बोली, "बेटे, जो अपने आप नहीं सीखते, आत्मनिर्भर नहीं बनते उन्हें सिखाने का यही तरीका है।"

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