एक बार मदनमोहन मालवीय और रमापति मिश्र के बीच क्रोध पर चर्चा हो रही थी। मिश्र जी अपने को अत्यंत ही संतुलित, अक्रोधी तथा सौम्य व्यक्त्ति समझते थे। उनहोंने मालवीय जी से कहा- "आप मुझे 100 गालियाँ देकर देखिए। मैं थोडा भी विचिलित नहीं होऊंगा और न ही मुझे क्रोध आएगा।"
मालवीय जी मुस्कुराने लगे और बोले- "यह मैं नहीं कर पाऊंगा. क्योंकि आप की सहनशक्ति की परीक्षा तो सौ गालियां देने के पश्चात् निश्चित होगी, पर मेरा मुँह तो एक गाली देने के बाद गंदा हो जायेगा।"
मिश्र जी मालवीय जी की ओर देखते रह गये और मन ही मन अभिवादन किया।
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