August 10, 2025

मुझे अंग्रेजों की गुलामी नहीं करना है सुभाष बाबू I don't want to be a slave to the British, Subhash Babu


सुभाष बाबू को उनके पिता ने भारत से हटाने के लिए आई.सी.एस. की परीक्षा में प्रवेश की तैयारी हेतु लन्दन जाने का आदेश दिया। सुभाष यह सुनकर उगे से रह गए। उन्होंने एक बार प्रयास किया किया कि उन्हें यहीं रहकर स्नातकोत्तर अध्ययन की अनुमति मिल जाए। किन्तु पिता ने इसे सुभाष के सामने इस रूप में रखा कि वह परीक्षा से घबराता है। अतः अन्त में इस कलंक को मिटाने हेतु लंदन जाने को सुभाष तैयार हो गए। लंदन में शीघ्र ही उनकी कुशाग्र बौद्धिक क्षमता एवं कुशल व्यवहार के कारण उनके कई अच्छे मित्र बन गए।

वे वहाँ परीक्षा मे शामिल हुए और कुछ समय पश्चात् परिणाम भी आ गए। सुभाषचन्द्र बोस के मित्र उनका परिणाम लेकर अत्यन्त उल्लास के साथ उनसे आकर मिले। किन्तु यह क्या। उत्तीर्ण परिणाम और वह भी सर्वोच्च  परीक्षा का, फिर भी सुनकर वे तनिक भी प्रसन्न नहीं हुए। मित्रों ने उनसे  पूछा, तो उन्होंने सहज भाव से कह दिया कि मुझे नौकरी नहीं करनी है। तुरन्त उन्होंने त्याग-पत्र लिख दिया। त्याग-पत्र का समाचार, समाचार-पत्रों के माध्यम से अधिक गति से फैल गया कुछ अंग्रेज अधिकारी उनसे मिले और आश्चर्य के साथ पूछा- "आप ऐसा क्यों कर रहे हैं। उन्होंने दृढ़ मन से कहा कि "मैं ब्रिटिश सरकार के अधीन रहकर अपने कर्तव्यों का निर्वाह उचित प्रकार से नहीं कर सकूँगा, यह मैं भलि भांति जानता हूँ। इसलिए त्याग-पत्र देने का मैंने पहले से ही निश्चय कर लिया था। विदेशी सरकार के अधीन रहकर में मातृ‌भूमि की सेवा कैसे कर सकता हूँ।

No comments:

Post a Comment