संस्कृतभाषायाः महत्त्वम्
संस्कृत भाषा का महत्व
(म. प्र. 2022, 23, 25, प्रश्न बैंक)
1. संस्कृतभाषा विश्वस्य सर्वासु भाषासु प्राचीनतमा सर्वोत्तमसाहित्यसंयुक्ता चास्ति ।
संस्कृत विश्व की सभी भाषाओं में सबसे प्राचीन है और इसका साहित्य सर्वश्रेष्ठ है।
2. संस्कृता परिशुद्धा व्याकरण सम्बन्धिदोषादि रहिता संस्कृतभाषेति निगद्यते।
संस्कृत को व्याकरण संबंधी त्रुटियों से मुक्त शुद्ध संस्कृत भाषा कहा जाता है।
3. प्राचीने समये एषैव भाषा सर्वसाधारणा आसीत्।
प्राचीन काल में यह आम भाषा थी।
4. सर्वे जनाः संस्कृतभाषाम् एव वदन्ति स्म।
सभी लोग केवल संस्कृत ही बोलते थे।
5. एषा एव अस्माकं पूर्वजानाम् आर्याणां सुलभा, शोभना, गरिमामयी च वाणी।
यही है हमारे महान पूर्वजों की सहज, सुंदर और गरिमामयी वाणी।
6. संस्कृतभाषायामेव विश्वसाहित्यस्य सर्वप्राचीनग्रन्थाः चत्वारो वेदाः सन्ति येषां महत्त्वमद्यापि सर्वोपरि वर्तते।
संस्कृत में ही विश्व साहित्य के प्राचीनतम ग्रंथ, चारों वेद समाहित हैं, जिनका आज भी अत्यधिक महत्व है।
7. भास-कालिदास-अश्वघोष-भवभूति-दण्डि-सुबन्धु-बाण-जयदेव प्रभृतयो महाकवयो नाटकाराश्च संस्कृतभाषायाः एव। जीवनस्य सर्वसंस्कारेषु संस्कृतस्य प्रयोगः भवति।
भास, कालिदास, अश्वघोष, भवभूति, दंडी, सुबंधु, बाण, जयदेव आदि महान कवि और नाटककार संस्कृत से हैं। जीवन के सभी अनुष्ठानों में संस्कृत का प्रयोग होता है।
8. अधुनाऽपि सङ्गणकस्य कृते संस्कृतभाषा अति उपयुक्ता अस्ति।
आज भी कंप्यूटर का उपयोग होता है। संस्कृत इसके लिए बहुत उपयुक्त है।
9. संस्कृतभाषैव भारतस्य प्राणभूताभाषा अस्ति राष्ट्रस्य ऐक्यं च साधयति।
संस्कृत भारत की जीवनदायिनी है और राष्ट्र की एकता को प्राप्त करती है।
10. भारतीय गौरवस्य रक्षणाय एतस्याः प्रसारश्च सर्वेरेव कर्त्तव्यः अत एव उच्यते - 'संस्कृतिः संस्कृताश्रिता ।'
भारतीय गौरव को संरक्षित करना और उसका प्रसार करना सभी का कर्तव्य है और इसीलिए कहा गया है - 'संस्कृति संस्कृत पर निर्भर है।'
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