August 14, 2025

सुभाषित - 1 Shubhashit

येषां न विद्या न तपो न दानं

ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः।

ते मृत्युलोके भुवि भारभूता

 मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति॥

श्लोकार्थ - जिनके पास विद्या, तप, दान, ज्ञान, शील, गुण और धर्म ये नहीं होते हैं, वे पृथ्वी पर भार स्वरूप मनुष्य रूप में पशु के समान विचरण करते हैं।


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